रेरा दूर करेगा रियल इस्टेट की विसंगतियां

 विवेक हिन्दी  31-Jul-2017


 

देश के ९ राज्यों और ४ केंद्र शासित राज्यों में RERA लाया गया है| रेरा रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट का संक्षिप्तिकरण है| इसके प्रभाव से इस क्षेत्र में वर्षों से चला आ रहा भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा खरीदार की गाढ़ी कमाई भवन निर्माताओं द्वारा ठगी जा रही थी और वे सही न्याय पाने के लिए न्यायालय की दया पर आश्रित थे, जिसमें बहुत ज्यादा समय लगने के कारण खरीदार के मन में निराशा घर कर जाती थी| रियल इस्टेट का मामला आने पर ग्राहक के मन में जितने भी प्रश्न या संदेह उठते हैं वे सभी रेरा की हेल्प डेस्क के माध्यम से मात्र एक कदम की दूरी पर रह गए हैं| क्या टाइटल सही है? क्या बिल्डर के पास आवश्यक अनुमतियां हैं? जिस जमीन पर निर्माण कार्य हो रहा है, क्या उसमें कुछ रुकावटें हैं? जैसे तमाम प्रश्नों का सटीक उत्तर खरीदार के लिए संभव है|

रेरा के क्रियान्वयन द्वारा बिल्डर्स/प्रमोटर्स/एजेंट्स को नियम और कानूनों का कठोरतापूर्वक पालन करने तथा किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार में संलिप्तता के प्रति चेतावनी दी गई है| रेरा के अंतर्गत विसंगति होने की स्थिति में बिल्डर पर उसके प्रोजेक्ट का ५% से १०% तथा एजेंट पर फ्लैट की कीमत का ५% से १०% तक जुर्माना तथा केस के अनुसार जेल का भी प्रावधान है | इसका महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ५१% बुकिंग होते ही निर्माणाधीन अवस्था में भी बिल्डर को सोसायटी का निर्माण कर देना पड़ेगा| इस प्रकार बिल्डर के कार्यों पर रेरा के साथ ही साथ को-आपरेटिव हाउसिंग सोसायटी भी नजर रख पाएगी| आदर्श घोटाला, गुड़गांव-नोयडा के रियल इस्टेट के परिदृश्य के अलावा मीडिया में उछलने वाले कई अन्य मुद्दों की वजह से लोगों के बीच बिल्डर लॉबी की काफी किरकिरी हुई है जो कि पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी| देश के रियल इस्टेट उद्योग में रेरा जैसा कानून काफी समय से अपेक्षित था| महाराष्ट्र में अभी तक एमओएफए अर्थात महाराष्ट्र ओनरशिप ऑफ फ्लैट्स एक्ट, १९६३ में भी वही दिशानिर्देश थे जो कि रेरा में हैं परंतु उसमें बिल्डर्स और खरीदारों के बीच इतनी उलझनें थीं कि उनका समुचित पालन नहीं हो पाता था| उदाहरण के तौर पर एमओएफए के अंतर्गत एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन २०% के बुकिंग राशि के साथ था| पर इसका बिल्कुल पालन नहीं किया जाता था जबकि रेरा के अंतर्गत वही स्थिति है; पर बुकिंग राशि का प्रतिशत कम कर दिया गया है| अब १० प्रतिशत देने पर एग्रीमेंट बनेगा पर सेल एग्रीमेंट तुरंत बनवाए जाने की आवश्यकता पड़ेगी|

बिल्डर द्वारा आवश्यक रूप से अपलोड किए जाने वाले और ग्राहक के लिए उपलब्ध दस्तावेजों की सूची:-
१) प्लान की अनुमोदित कॉपी/ले-आउट/सी.सी.
२) अधिकार निरीक्षण रिपोर्ट की कापी
३) विक्रय समझौते की कापी/आवंटन पत्र
४) उस जगह के विकास के कानूनी अधिकार देने वाले सभी समझौतों की कॉपी
५) प्रस्तावक/साझीदार/संयुक्त कार्य के सारे विवरण
६) समय सीमा, जिसमें वह प्रोजेक्ट पूरा हो पाएगा

खरीदार द्वारा मांगी जाने वाली सूची-
१) किसी भी प्रोजेक्ट को चुनते समय उसके रेरा नंबर की मांग करें|
२) रेरा के वेबपेज पर जाकर बिल्डर द्वारा दिया गया रेरा क्र. डालिए|
३) वेबसाइट पर क्रॉस चेकिंग कर सारी डिटेल चेक कीजिए|
४) कोई भी कांट्रेक्ट करने से पहले सभी जरूरी कागजातों का निरीक्षण करें|

रेरा एजेंट के लिए सूची
१) जब तक विकासक रेरा में नम्बर न प्राप्त कर लें तब तक उसके प्रोजेक्ट की मार्केटिंग न करें|
२) ग्राहकों से कोई ऐसी गलतबयानी न करें जिसके प्रति आप आश्वस्त नहीं हैं या कि जो सहीं स्टेटमेंट नहीं है|
३) सबसे महत्वपूर्व बात, किसी भी विक्रय में तब तक हाथ न डालें जब तक कि स्वयं का रेरा में रजिस्ट्रेशन न करवा लें|
विभिन्न राज्यों में उन राज्यों की आवश्यकताओं के हिसाब से रेरा ने कुछ अलग नियम अपनाए हैं:-

चंडीगढ़-
१) पुराने ढांचे को तोड़ते समय प्री बुकिंगः इस नियम के अंतर्गत प्रोजेक्ट राशि का ७०% एक अलग खाते में जमा कराएं|
२) देर होने अथवा किसी बदलाव की स्थिति में किराएदारों को एस.बी.आई. की उच्चतर स्तर के उधारी दर से २ प्रतिशत अधिक की दर से मुआवजा दिया जाए|
३) मुआवजे का नियम देरी की समय सीमा के हिसाब से तय होगा| ४५ दिनों की देरी पर २ प्रतिशत की दर लगेगी जबकि बहुत ज्यादा देरी होने पर यह दर ११% प्रतिशत तक भी हो सकती है|
४) बिल्डरों के पक्ष को देखते हुए बिल्डरों का पंजीकरण शुल्क आधा कर दिया गया है|
५) ग्राहकों को सूचित किए बिना बिल्डर प्लान में तब्दीली नहीं कर सकते|

उत्तर प्रदेश -
१) नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में बिल्डर का पेमेंट रोका जा सकता है, साथ ही खरीदार द्वारा समय पर भुगतान करने में असमर्थ होने पर विकासक १८% की पेनाल्टी के साथ ही नियमावली रद्द भी कर सकता है|
२) देरी से भुगतान की स्थिति में बिल्डर एग्रीमेंट समाप्त कर सकता है| साथ ही बिल्डर को बुकिंग राशि जब्त करने तथा उस पर ब्याज लगाने का अधिकार होगा|
३) निर्माण की गति सही न होने की दशा में किराएदार भुगतान रोक सकता है| बिल्डर को पहले तय काम पूरा करना पड़ेगा| उसके बाद ही वह बिना किसी ब्याज के भुगतान लेने का अधिकारी होगा|
४) यदि बिल्डर पजेशन देने में देरी करता है तो ऐसी स्थिति में केंद्र के रेरा नियमों के अंतर्गत अपने आप एग्रीमेंट समाप्त होने का आदेश देते हैं|
५) कई नियमों के अंतर्गत कारावास का भी प्रावधान है (इसमें कारावास के बदले अर्थदण्ड का भी प्रावधान है|)
६) यूपी रेरा में ६०% कार्य पूरा होने पर पूर्णता का प्रमाणपत्र मिल जाएगा|
७) यह निर्धारित करने के लिए कि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो और डेवलपर द्वारा बिल्डर खरीदार एग्रीमेंट का पालन हो रहा है, रियल इस्टेट के विक्रय नियम, २०१६ में बिल्डर और खरीदार के अधिकारों और प्रतिज्ञापत्र की रक्षा करता है|
८) सार्वजनिक स्थान व सुविधाएं, संस्था या निवासी वेलफेयर असोसिएशन को हिफाजत के लिए सौंप दी जाएंगी|

गुजरात -
१) गुजरात ने वर्तमान कार्यों को इस एक्ट से बाहर रखा है| अधिकारियों के अनुसार इससे नए कानून को सरलतापूर्वक लागू किया जा सकेगा|
२) गुजरात ने नवंबर में नोटिफिकेशन जारी होने से पहले के सभी प्रोजेक्ट शुल्क मुक्त कर दिए हैं| प्रोजेक्ट को रजिस्टर करने जैसी कई जरूरी बातों से भी बाहर रखा है|
३) काफी समय से लटके पड़े प्रोजेक्ट्स भी बाहर कर दिए गए हैं; क्योंकि सरकार को घर पाने की आशा में बैठे हजारों खरीदारों की चिंता है|

महाराष्ट्र -
महाराष्ट्र सरकार ने रेरा में कुछ नए नियम भी जोड़े हैं, जैसे कि पार्किंग की जगह, जो अभी तक बिल्डर बेंचते थे, को भी नियमित किया है| राज्य सरकार ने आज्ञापत्र जारी किया है कि बिल्डर को पार्किंग की जगह की बिक्री का भी खुलासा करना होगा| को.हा. सोसायटियों को यह पावर दिया गया है कि वे पार्किंग की जगह को अपने सदस्यों को आवंटित कर सकें| कुल मिलाकर RERA में कुछ और नियम आ जाने की वजह से रियल इस्टेट क्षेत्र को सुचारुपूर्वक चलने में मदद मिलेगी|
१) खरीदार के लिए पार्किंग की जगह खरीदना आसान होगा|
२) वेबसाइट पर खरीदार के लिए प्रोजेक्ट और विक्रय संबंधी सभी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए और हर ३ महीने में इसे अपडेट किया जाना चाहिए ताकि खरीदार को प्रोजेक्ट का अवलोकन करने में मदद मिले|
३)उचित कारणों के आधार पर समय सीमा १ वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है| इसके बाद बिल्डर पर प्रति दिन का १०% कर लगाया जाएगा|
४) खरीदारों की जानकारी और इच्छा के विरुद्ध बदलाव नहीं किए जा सकते|
५) रेरा के अंतर्गत धोखा देने अथवा झूठे वादे करने की स्थिति में खरीदार एजेंट पर भी कानूनी कार्यवाही कर सकता है|
६) देर अथवा बदलाव होने की स्थिति में खरीदार को एस.बी.आई की उधारी की कीमत के उच्चतम सीमांत लागत से दो प्रतिशत अधिक क्षतिपूर्ति प्राप्त होगी|

महत्वपूर्ण यह भी है कि सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी बाकी है जिन्हें इस क्षेत्र को कुशल बनाने में अपनी सेवाएं नियमित व सही तौर पर देनी आवश्यक है क्योंकि विकासक बुरे नहीं होते बल्कि धीमा सिस्टम बिल्डर को प्रभावित करता है|