अन्य लेख

मारीशस में श्रीराम मंदिर का भव्य उद्घाटनहिंदी विवेक

यह बड़े ही हर्ष का विषय है कि श्री हनुमंत कृपा से मारीशस के रामायण सेंटर परिसर में नवनिर्मित श्री राम मंदिर का भव्य उद्घाटन आषाढ़ शुक्ल सप्तमी २०७४ तद्नुसार दि ३० जून २०१७ को बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ। मारीशस के पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री तथा वर्तम..

"विवेक संवाद" की संगोष्ठी में "टेक ए बिग लीप" पर विचार मंथनहिंदी विवेक

  ‘देश की चौतरफा प्रगति तथा भौतिक और सामाजिक विकास केवल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और भारतीय संस्कृति पर आधारित विचारों से ही संभव है। ’ उक्त विचार केंद्रीय सड़क परिवहन व नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने २८ जून को ‘विवेक स..

हिन्दी का व्यावहारिक व्याकरणउमेश सिंह

किसी समाज में भाषा अथवा बोली का प्रयोग शुरू होने के काफी समय बाद उसके व्याकरण की रचना होती है। भाषा मूलतः व्याकरण की आश्रित नहीं होती, किन्तु व्याकरण के माध्यम से संस्कारित होकर वह बोली और लिखी जाती है। व्याकरण में भाषा के इन्हीं नियमों को सिद्धांत रूप ..

भारतीय रेल का एवरेस्ट: चिनाब पुलसरोज त्रिपाठी

शिवालिक की पहाड़ियों के बीच चिनाब नदी पर बन रहा नया पुल ऊंचाई, डिजाइन और भारतीय इंजीनियरिंग कारीगरी का नायाब नमूना होगा, जिसकी मिसाल सदियों तक दुनिया भर में दी जाएगी। यह एफिल टॉवर और कुतुब मीनार से भी ऊंचा होगा। भारतीय रेलवे जल्द ही दुनिया में एक नया इत..

रेरा दूर करेगा रियल इस्टेट की विसंगतियांखुशबू चौरसिया

  देश के ९ राज्यों और ४ केंद्र शासित राज्यों में RERA लाया गया है| रेरा रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट का संक्षिप्तिकरण है| इसके प्रभाव से इस क्षेत्र में वर्षों से चला आ रहा भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा खरीदार की गाढ़ी कमाई भवन निर्माताओं द्वारा ठगी जा रही..

विश्व के अद्वितीय संगठन का सरल परिचयमल्हार कृष्ण गोखले

  हमारा भारत देश अपने आप में एक अद्वितीय देश है। विश्व के किसी भी देश को, अर्थात् उस देश के समाज के मन में अपनी राष्ट्रीयता के बारे में कोई संदेह नहीं होता है। वैसे तो हमारा देश अपनेे कण-कण में हिंदू संस्कृति को समाहित किए है। हमारे प्राचीन ऋषि-मु..

राष्ट्रीय संत नामदेवविद्याधर ताठे

नामदेव महाराष्ट्र के पहले ऐसे संत हैं जिन्होंने विट्ठल नाम भक्ति का परचम महाराष्ट्र से बाहर भी फहराया। गुजरात, राजस्थान होते हुए पंजाब तक पहुंच कर संत नामदेव ने जो भी कार्य किया उसे महान राष्ट्रीय कार्य ही कहा जा सकता है। सिक्खों के धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ स..

शिक्षा का व्यवसायीकरणनरेंद्र पाण्डेय

कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे सी.बी.एस.ई, आई. सी. एस ई, आई.बी. समेत तमाम माध्यमों के विद्यालयों और गैर सरकारी महाविद्यालयों की खेती के बीच एक यक्ष प्रश्न देश भर के बुद्धिजीवियों के दिल में लगातार बना हुआ है कि वर्तमान शिक्षा पद्धति देश समाज और नौनिहालों के लि..

समाज में बढ़ता दुराचारडॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी

बलात्कार केवल पुरुष की अतृप्त यौन इच्छा की संतुष्टि ही नहीं है बल्कि यह स्त्री को बलहीन, मर्यादाहीन, शीलहीन और नेतृत्वहीन बनाकर पूरे स्त्री समाज को कमजोर दिखाने की कवायत है। ...इस अपराध से समाज को मुक्त करने के लिए राजनीतिक और सामाजिक दोनों तरह की इच्छाशक..

उलटफेर भरी रही चैंपियंस ट्राफीदिवाकर सिंह

ग्रुप ए में कई मजबूत टीमें थी और ऐसा माना जा रहा था कि यह ग्रुप ऑफ़ डेथ साबित होगा और अच्छा मुकाबला देखने को मिलेगा। इस ग्रुप से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के सेमीफइनल में जाने के मौके ज्यादा दिख रहे थे। लेकिन जिस तरह से इस ग्रुप में उलटफेर हुआ,उसने सभी को आश..

नमामि देवि नर्मदेवीरेन्द्र याज्ञिक

मध्यप्रदेश के १६ जिलों तथा ५१ विकास खण्डों से होती हुई १०७७ कि.मी. की नर्मदा सेवा यात्रा का १५ जून को अमरकंटक में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में समापन हुआ। लगभग १५० दिनों तक नर्मदा तट पर चली यह यात्रा विश्व का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान था, ज..

नई संभावनाओं की ओर नई विदेश नीतिधर्मेन्द्र पाण्डेय

  मोदी सरकार की व्यापक नीतियों, विश्व का राजनीतिक माहौल, वाशिंगटन की वर्तमान नीतिगत अस्पष्टता और बीजिंग के बढ़ते कद के बीच नई दिल्ली ने अपनी क्षेत्रीय और वैश्विक ताकत को भरपूर धार दी है। समान सोच वाले देशों की सहयोगी भावना भारत को विश्वसनीय क्षेत्र..

सुमन की सुश्रुषासोनाली जाधव

  श्रीमती सुमन तुलसियानी जैसा व्यक्तित्व समाज में एक मिसाल के रूप में देखा जा सकता है। उम्र के सात दशक के पड़ाव पर भी उनका उत्साह कायम है। मुंबई के उपनगर दादर में सुश्रुषा नामक अस्पताल विगत ४७ सालों से रोगियों की सेवा के लिए समर्पित है। उपचार की अ..

धूएं से आजादीडॉ.मनोज चतुर्वेदी

हर घर को एलपीजी कनेक्शन देने वाली उज्ज्वला योजना महिलाओं को स्वच्छ तथा स्वस्थ पहचान देने के साथ ही धुआं रहित वातावरण, प्रदूषण में कमी और स्वच्छ जीवन देने में भी मील का पत्थर साबित हो रही है।     धुआं- धुआं होती रही जिंदगी.धुआं-धुआं उड़ती रह..

पांच साल में राष्ट्रीय राजमार्ग दो लाख किमी होंगेराकेश शुक्ला

एक्सप्रेस-वे बनने से देश का आर्थिक विकास गतिशील होगा। क्योंकि इन एक्सप्रेस-वे के कारण दूर का सफर जल्द तय होगा, इससे ईंधन और समय की बचत होगी। केन्द्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने तीन साल में सड़क को एक नई दिशा दी है। २०१४ मे..

रोशन हो उत्तर प्रदेशडॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश में अभी-अभी भाजपा की सरकार आयी है। प्रदेश शासन ने अपने अल्पकालीन शासन में ही विद्युत वितरण, उत्पादन तथा प्रबन्धन हेतु कारगर कदम उठाया है। जो बिजली की रोशनी से घर-घर जगमगाने की ओर बढ़ रही है। वर्तमान समय में हर क्षेत्र का कार्य बिजली पर आश्..

‘उज्ज्वल भारत’ की ओर एक और कदमसंदीप सिंह

भारत ने विद्युत क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। राष्ट्र गर्वित है कि पहली बार विद्युत और कोयले की कमी खत्म हुई है और ये पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। नागरिकों को चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराना और वह भी उचित दामों पर यह केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय का ..

निःशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक, २०१६ पारितमुरलीधर कचरे

  दिव्यांग जनों के साथ भेदभाव को दंडनीय बनाने और संयुक्त राष्ट्र समझौते के अनुरूप ‘निःशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक, २०१६’ को संसद ने १६ दिसंबर को पारित कर दिया। इससे दिव्यांग जनों के लिए समाज में सम्माननीय स्थान बनाने में मदद मिलेगी। यही..

विश्वगुरु हो भारतअपनाप्रमिला मेंढे

भारत ईश्वर की प्रिय भारतभूमि है । इसलिए भारत का जीवितकार्य संभ्रमित विश्व का मार्गदर्शक अर्थात् गुरुहै। जहां स्वार्थ, स्पर्धा एवं लोभ का निर्माण होता है, अति भौतिकता प्रभावी होती है तो वहां ईश्वर प्रकट नहीं होता है। वर्तमान विश्व का परिदृश्य ऐसा है कि..

राष्ट्रीय विकास और मां गंगास्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती

मां गंगा और भारतीय संस्कृति भारत की आत्मा के ऐसे अंश हैं कि जैसे गंगा विभिन्न कोणों से, विभिन्न मोड़ों से गुजरने के बाद भी अपनी पवित्रता को नष्ट नहीं होने देती, वहीं भारतीय संस्कृति भी विभिन्न उतराव-चढ़ाव के दौर में अपनी पवित्रता को नष्ट नहीं होने दिया। इसल..

दो नावों पर सवारडॉ. सुषमा श्रीराव

महिलाओं को सुपर वुमन बनने में और खुद को नजरअंदाज करने में महानता का अहसास होता है। यह सोच बदलनी होगी। कामकाजी महिला हो तो घर के सभी की मिलजुलकर काम करने की जिम्मेदारी बढ़ती है। इस नए परिवेश को अपनाए बगैर और कोई चारा नहीं है। प्रिया की सुबह की गहमागहमी, अफ..

बंधनडॉ.मनोज चतुर्वेदी

दीवाली से दो दिन पहले धनतेरस की सुबह लगभग दस बजे तक ही डॉ रविकान्त सहाय के घर पर अच्छी खासी भीड़ जमा हो चुकी थी। अगल-बगल के पड़ोसी डॉ सहाय के हॉस्पिटल के साथी डॉक्टर और रिश्तेदार आ चुके थे।दीवाली जैसा त्यौहार जो सबके लिए प्रकाश और खुशी लेकर आता है। ऐसे दिन ..

उ़फ! ये गर्मी....धर्मेन्द्र पाण्डेय

गर्मी का मौसम शुरू होते ही बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। अगर आपने थोड़ी सी लापरवाही कर दी तो लू, हीट स्ट्रोक, पेट की समस्या, अतिसार आदि कई बीमारियों की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि गर्मी के मौसम में इन बीमारियों से बचने के तरीके आजमाए ..

कीजिए बस एक क्लिकपल्लवी अनवेकर

अगर आप भी मनोरंजन और नए संदेशों को देखने और सुनने के लिए उत्सुक हैं तो जुड़िए सोशल मीडिया से और कीजिए बस एक क्लिक.... कुछ दिन से व्हाट्सएप पर एक वीडियो बहुत वायरल है, जिसके ३डी इफेक्ट देखने के लिए आपको अपनी एक आंख बंद करनी होती है। दोनों आंखों से देखने ..

आद्य प्रचारक मोरुभाऊहिंदी विवेक

संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार द्वारा महाराष्ट्र के बाहर भेजे गए तीन प्रचारकों में से मोरुभाऊ मुंजे एक थे। उन्होंने संघ में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। उनका कार्य आज भी स्वयंसेवकों के लिए एक मिसाल है। मोरेश्वर राघव उपाख्य मोरुभाऊ मुंजे को पूजनीय डॉ. ..

नवयुग का सूत्रपातगंगाधर ढोबले

भाजपा हाल के चुनावों में एक संगठित राष्ट्रीय शक्ति व कर्मठ नेतृत्व के साथ उभरी है, जबकि कांग्रेस नेतृत्वविहीन एवं असंगठित दिखाई दे रही है। अखिलेश की सपा एवं मायावती की बसपा तथा केजरीवाल की आप महज क्षेत्रीय पार्टियां ही बन कर रह गई हैं। उनके राष्ट्रीय मा..

अंततः योगी अंततः हिंदुत्वप्रवीण गुगनानी

उत्तरप्रदेश के चुनाव में एक भी मुस्लिम को भाजपा प्रत्याशी न बनाना अपने आप में एक चौकाने वाली व राजनीति में एक नई लकीर को खींचनें के संकल्प वाली घटना थी और योगी के मुख्यमंत्री बनने की बिसात वहीं बिछ गई थी. वर्तमान राजनीति के दौर में जबकि मुस्लिम तुष्टिकर..

मनमोहक.... केरल व तमिलनाडुपूजा बापट

दक्षिणी राज्य केरल और तमिलनाडु अपने मनमोहक प्राकृतिक नजारों एवं धार्मिक स्थलों के कारण प्रसिद्ध हैं। वन्य जीवन की विविधता, पहाड़ों की शीतल बयारें और बैक वाटर की सैर को कौन भूल सकता है! भारतकी दक्षिण दिशा में बसे केरल एवं तमिलनाडु इन दो राज्यों को भारत म..

हिंदी पर मंडराता भीषण संकट डॉ. करूणाशंकर उपाध्याय

हिंदी की बोलियों को स्वतंत्र भाषाओं का दर्जा देने की क्षुद्र राजनीतिक साजिश इस समय चल रही है। यदि ये बोलियां भाषाएं बन गईं तो हिंदी कमजोर होगी और देश को एक भाषासूत्र में बांधने के प्रयास भी विफल हो जाएंगे। हिंदी कमजोर हुई तो ये बोलियां भी कहीं की नहीं र..

अनजान रिश्तेराजेंद्र परदेसी

सीमा और प्रकाश का परिवार बरसों से शहर के एक ही मोहल्ले में रह रहा था। पर उन दोनों का एक दूसरे से सामना कभी नहीं हुआ। प्रकाश ने विश्वविद्यालय में जब उसी की कक्षा में प्रवेश लिया और ऐसे ही औपचारिक परिचय में अपने मोहल्ले का नाम बताया तो सीमा को आश्चर्य हुआ..

जम्बू ने माफी मांगी राजकुमार जैन ‘राजन’

जम्बू भालू के पिता सर्कस में काम करते थे। जब वह सर्कस से सेवानिवृत हुए तो उन्हें एक मोटर साइकिल ईनाम में मिली। मोटर साइकिल देख जम्बू बहुत खुश हुआ। दो-चार दिन में ही उसने मोटर साइकिल चलानी सीख ली। फिर क्या था, वह सारे जंगल में मोटर साइकिल चलाने लगा। वह..

चहुंओर राम ही रामवीरेन्द्र याज्ञिक

विगत पांच सहस्त्राब्दियों में भारत के राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक जीवन को जितना श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्रों ने प्रभावित और अनुप्रणित किया है, उतना अन्य किसी चरित्र ने नहीं किया है। राम के बिना सनातन भारत की संस्कृति और संस्कार की कल..

भारतीय सांस्कृतिक विरासत और दूरदर्शनडॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी

विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति भारतीय संस्कृति है। भारत की भूमि में मूर्त-अमूर्त संस्कृति की स्पष्ट छाप है जो सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है। पहले पाठन-श्रवण द्वारा भावी पीढ़ी को सांस्कृतिक विचारधारा से परिचित कराया जाता था।..

कश्मीरी पंडित : कश्मीर के आदि निवासी डॉ. सतीश गंजू

कश्मीर की मनोरम घाटी इस समय तन्हा हो गई है; मानो अच्छाइयां वहां से विदा हो चुकी हो। बर्बर आतंकवादियों ने पौराणिक काल से यहां बसे कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से भगा दिया है, हजारों लोगों का क्रूरता से संहार किया है और कश्मीर के ५००० साल पुराने इतिहास और..

करें स्वरोजगार का दर्शनरवींद्र सिंह भड़वाल

आज देश की करीब ६५ फीसदी कार्यशील युवा आबादी है और यही जनसांख्यिकी लाभांश भारत की मौजूदा समय में सब से बड़ी पूंजी है। इसी कार्यबल का यदि सदुपयोग हो जाए, तो कोई वजह नहीं बचती कि भारत विश्व शक्ति न बन पाए। इसके लिए पहली शर्त तो यही मानी जाएगी कि देश का हर ह..

कश्मीर की व्यथा कथा रामसिंह शेखावत

यह तय हो गया कि भारत विभाजन होगा। लार्ड वेवेल विदा हो गए और लार्ड माउंटबेटन ने भारत के वायसराय का पद मार्च के अंत में संभाला। २ मई १९४७ को नए वायसराय ने अपने प्रस्ताव इंग्लैंड भेजे और १० मई १९४७ को उन्हें ब्रिटिश सरकार की स्वीकृती मिल गई। योजना केवल लाड..

अब कैसे हो कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास?प्रवीण गुगनानी

कश्मीर में १९ जनवरी १९९० को हुए बर्बर जनसंहार के बाद सत्ताईस वर्षों का लम्बा अंतराल बीत गया है जिसमें दिल्ली और श्रीनगर की असंवेदनशीलता के सिवा कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं मिला है। अब तो यह भी विचारणीय प्रश्न है कि कश्मीर से निष्कासित कश्मीरी पंडित वह..

कश्मीरघाटी की जनसांख्यिकी और उसका राजनैतिक प्रभावप्रो. कुलदीप चन्द्र अग्निहोत्री

कश्मीर घाटी जम्मू-कश्मीर प्रदेश का भौगोलिक लिहाज़ से सब से छोटा संभाग है। लेकिन जनसांख्यिकी के लिहाज़ से इस घाटी में बसे लोगों में बहुत विविधताएं हैं। यही कारण है कि इसका जनसांख्यिकी अध्ययन अत्यंत रुचिकर कहा जाता है। मोटे तौर पर कश्मीर घाटी में रहने वाले ..

मुश्किल हालात में कुछ ठोस करने की चुनौती प्रशांत बाजपेई

महीनों से कश्मीर घाटी में पत्थर चल रहे थे। विद्यालय जलाए जा रहे थे। पाकिस्तान घाटी की मीडिया फुटेज को लेकर आसमान सर पर उठाने की कोशिश कर रहा था। आतंकी बुरहान बानी के लिए मर्सिया गाया जा रहा था। फिर नोटबंदी का फैसला आया और घाटी में अचानक पत्थर चलने बंद ह..

मीडिया के मंच पर मानवाधिकार का मुखौटा डॉ. जयप्रकाश सिंह

पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के प्रश्न को राष्ट्रीय से अधिक सभ्यता से जुड़ा प्रश्न मानता रहा है। इसी मान्यता के आधार पर वह इस्लामी दुनिया को यह समझाने में एक हद तक सफल भी रहा है कि गजवा-ए-हिंद अथवा खिलाफत के इस्लामी स्वप्न का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पड़ाव जम्मू-कश्..

पर्यावरण और वनवासी: सहजीवन की मिसालडॉ. प्रसन्न सप्रे

पर्यावरण की व्याख्या व्यापक है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि हम अपनी सभी इंद्रियों- तात्पर्य ज्ञानेंद्रियों, कर्मेद्रियों और अंत:करण (मन, बुध्दि, चित्त, अहंकार) - से जो भी अनुभव, अनुभूति लेते हैं वह सभी पर्यावरण का ही घटक है। कान से सुनते हैं- तो जहां ..

मानवीय अतिक्रमण से जंगलों को हानिरश्मि नायर

जो ‘जंगलधन’ चला गया है उस पर अफसोस करने से कोई लाभ नहीं होगा। नया जंगल पनपे इसलिए अपनी ओर से पौंधे लगाना शुरू कर दें। इससे फिर जंगल पनपेंगे। हमें ‘पौधा लगाओ, हरियाली बचाओ’ नारे पर अमल करना होगा। पर्यावरण की रक्षा में यह अहम् भूमि..

पेड़-पौधे सुंदर घर की पहचाननिहारिका पोल

वैसे तो हर कोई चाहता है कि, उसका घर सुंदर लगे, और आने जाने वालों के लिए मिसाल बने। लेकिन घर को सुंदर सजा संवार कर रखना कोई आसान बात तो नहीं। आजकल कोई फेंगशुई के सामान से घर को सजाता है, तो कोई चायनीज सजावटी सामान से। कोई मिट्टी के बर्तनों से तो कोई विवि..

ई-कचरा निर्मूलन तथा पुनर्प्रयोगराजेश मानेरीकर

हम सभी जानते हैं कि २१ वीं सदी सूचना एवं प्रसारण तंत्र की सदी है। मानव ने आज विज्ञान में बहुत प्रगति कर ली है। इस प्रगति के कारण जीवन निर्वाह सुलभ हो गया है। परिवहन के साधनों के कारण यात्रा करना और टेलीफोन व इंटरनेट के कारण संवाद साधना आसान हो गया है। दूर..

अधिकतम अक्षय ऊर्जा निर्माण करने वाले राज्यअच्युत राइलकर

आजकल तेल से तैयार की हुई ऊर्जा का ऑटो चलाने के लिए और कोयले से निर्माण की हुई ऊर्जा का अन्य कामों में इस्तेमाल हो रहा है। तेल और कोयला दोनों का उगम अहरित है और ये पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ते हैं। इसीलिए दुनिया में हरित ऊर्जा देने वाले उगमों की बहुत आवश्य..

विकास और पर्यावरण में टकराव न होअमोल पेडणेकर

मुझे लगता है पर्यावरण प्राण जैसा है। जैसे शरीर में प्राण अनिवार्य है; प्राणों के बगैर शरीर संभव नहीं है और प्राण की उपस्थिति सामान्यतः लोगों को अनुभव इसलिए नहीं आती क्योंकि वह सहज प्राप्त होता है। लेकिन प्राण की शुद्धता, प्राण की उपलब्धता, अनुभव, ये सब महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है पर्यावरण उसी प्रकार है।..

अधकचरी अवधारणाओं से आगे के हरि सिंह डॉ. जयप्रकाश सिंह

भारतीय अकादमिक जगत स्थापित मान्यताओं और छवियों के चहुंओर चक्कर लगाने की अक्षमता से पीड़ित रहा है। इस क्षेत्र में नवीनता और नवाचार के लिए आवश्यक दृष्टि तथा स्थापित मान्यताओं को चुनौती देने के लिए जरूरी साहस की कमी को भारी-भरकम शब्दों के जरिए ढांपने का चलन..

भारतीय चित्रपट संगीतडॉ. मेघा राव

भारतीय संगीत न केवल हमारी संस्कृति की अमूल्य निधि है वरन वह संगीत विश्व के इन सांगीतिक संस्कृतियों व कला संस्कृतियों की पोषक है; जिसने अपनी संवेदनाओं और मनोभावों को विभिन्न आयामों में प्रस्तुत किया। भारतीय संगीत बहुत व्यापक विषय है जिसने कई सांगतिक शैल..

मेहनत की कमाईडॉ. अनामिका प्रकाश श्रीवास्तव

दुनिया भर का कूड़ा-कर कट संजो कर पता नहीं क्यों रख लेते हैं? इनकी यह बीमारी पता नहीं कब जाएगी ? अरे सुनते हो.....जरा इधर तो आना। निर्मल बड़बड़ाई। .....कुछ इसी अंदाज में हमारे सन्डे की शुरूआत होती है। घर की साफ-सफाई का यह दौरा, वैसे तो उन्हें प्रतिदिन पड़ता..

स्वावलम्बी श्रृति सिन्हा

पति के रोज -रोज के तानों से शाश्वती तंग आ चुकी है। वाकई वैवाहिक जीवन दोधारी तलवार की तरह है। कहां पिता के राज में अमन- चैन भरी जिंदगी और कहां यहा बात-बात पर ताने-उलाहनें, अपमान, तिरस्कार। क्या हर ‘हाऊस वाईफ’ के जीवन में ‘अर्थ’ को..

युवा भारत हेतु प्रेरणास्त्रोत शिकागो संभाषणप्रवीण गुगनानी

सम्पूर्ण विश्व भर की अपेक्षा हम भारतीय युवाओं हेतु ईश्वर कितना कृपालु है यह केवल इस बात से समझा जा सकता है कि ईश्वर ने हमें प्रेरणा देने हेतु भारत भू पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को जन्म दिया! आज जबकि ऐतिहासिक दृष्टि से और वैश्विक दृष्टि से देखने प..

शिक्षा स्वावलंबन तथा आत्मसन्मान के लिए हो: रमेश पतंगेपल्लवी अनवेकर

सिद्ध विचारक तथा लेखक मा. रमेश पतंगे जी को उनकी पुस्तक ‘सामाजिक समरसता तथा डॉ. बाबासाहब आंबेडकर’ के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार का पुरस्कार प्रदान किया गया है| इस अवसर पर प्रस्तुत पुस्तक तथा समसामयिक विषयों पर उनसे हुए संवाद के कुछ अंश..

भारतीय संस्कृति का वाहक भगवा ध्वजब्रजकिशोर रस्तोगी

भारत की सनातन संस्कृति की धरोहर का सांस्कृतिक दूत है परम पवित्र भगवा ध्वज! धर्म ध्वजा केसरिया, भगवा या नारंगी रंग की होती है| संस्कृति की समग्रता, राष्ट्रीय एकता जिसमें समाहित है| आदि काल से वैदिक संस्कृति, सनातन संस्कृति, हिंदू संस्कृति, आर्य संस्कृति,..

गीता-विश्व को भारत का वरदानवीरेन्द्र याज्ञिक

वर्ष २०१६ के पूर्वार्ध में समाचार पत्रों में एक समाचार ने सभी देशप्रेमियों को आनंदित किया था कि अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय (फेडरल कोर्ट) के न्यायाधीश के रूप में डी.सी.अपील्स कोर्ट के न्यायमूर्ति भारतीय मूल के श्रीयुत श्रीनिवासन की नियुर्क्ति ओबामा प्र..

खोया हुआ धनराजेंद्र परदेसी

गोपाल के पिता की आर्थिक स्थिति ठीक न थी, फिर भी उसके पिता की इच्छा थी कि उसे पढ़ा-लिखा कर एक अच्छा इंसान बनाए| इसीलिए मां के स्वर्गवास के बाद भी उसके पिता ने उसकी कमी महसूस न होने दिया था| पर दुर्भाग्य से गोपाल के ऊपर मुसीबत का पडाड़ टूट पड़ा| उसकी पढ़ाई अभी ..

काले धन का कुचला फनॠषभ कृष्ण सक्सेना

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ८ नवम्बर की रात को ५०० और १,००० रुपये के नोट बंद करने का जो ऐलान किया, वह पी. वी. नरसिंह राव के समय भारत की अर्थव्यवस्था को खोलने के निर्णय के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक निर्णय था| जिस देश में आधी से अधिक अर्थव्यवस्था अब भी नकदी ..

आर्थिक सुनामी, जनता, और मीडियासुरभि

पिछले माह देश ने एक भयंकर सुनामी का सामना किया| यह सुनामी प्राकृतिक नहीं वरन् मानव निर्मित थी| काला धन रखने वालों के होश उड़ाने वाली थी| जी हां! यह सुनामी आर्थिक सुनामी थी| ८ नवम्बर की रात प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पत्रकार परिषद में कड़े शब्दों में..

अबकी बार ट्रंप सरकारसरोज त्रिपाठी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों के लोगों को अमेरिका में रोजगार देने का जो विरोध किया है उससे भारतीयों की नौकरियों पर कुछ असर पड़ने की आशंका है| फिर भी यह बहुत बड़ा असर नहीं होगा| जानकारों का कहना है कि सिलिकॉन वैली की इमेज इतनी अच्छी है कि भारत ज्यादा प्रभावित नहीं होगा; क्योंकि अमेरिका को भी विशेषज्ञों की जरूरत है|..

अपंग कल्याणकारी शिक्षण संस्था का हीरक महोत्सवहिंदी विवेक

अपंग कल्याणकारी शिक्षण संस्था व संशोधन केंद्र वानवडी, पुणे का ६०वां स्थापना दिवस हाल ही में मनाया गया| संस्था ने नवम्बर २०१६ से दिसम्बर २०१७ यह वर्ष हीरक महोत्सव वर्ष के रूप में मनाने का निश्‍चय किया है| इस स्थापना दिवस के अवसर पर संस्था से आत्मविश्&z..

रोशनी की तलाशरश्मि नायर

उत्तम मातृभक्त तो था ही, भगवान के प्रति भी उसकी बहुत आस्था थी| वह हर वर्ष गणेश चतुर्थी के समय अपने गांव गणपतीपुले के पुश्तैनी घर में पूरे विधि-विधान के साथ श्रीगणेशजी की स्थापना करता और दस दिन तक श्री गणेशजी की पूजा, आरती, भजन- कीर्तन, और सेवा में लगा रहत..

नोटबंदी और उत्तरप्रदेश चुनावकृष्ण्मोहन झा

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनावों से पहले केन्द्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है और कई राजनीतिक दल इसे चुनावी फायदे के लिए उठाया गया कदम बताने में जुट गए हैं| हालांकि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी इसे देशहित म..

सिंधी एवं भोजपुरी कहावतों में नारी-चित्रणरविप्रकाश टेकचंदानी

कहावतें मानव जीवन की चिर-संचित अनुभव-राशि तथा ज्ञान-गरिमा का सार समुच्चय होती हैं| कहावतें ‘गागर में सागर’ अथवा उससे भी अधिक ‘बिंदु में सिंधु’ होती हैं| भाषाएं इनमें बाधा नहीं डाल सकतीं- सिंधी हो या भोजपुरी या हो कोई अन्य भाषा- उनमें समान लक्ष्यार्थ वाली कई कहावतें मिलती हैं| नारी जीवन के पक्ष-विपक्ष में व्यक्त कहावतें भी इससे जुदा नहीं हैं|..

श्री दत्तदैवत-अवतार विशेषसुरेश तोफखानेवाले

सुरेश तोफखानेवाले भारतीयों को विशेषत: महाराष्ट्रीयन समाज में श्री दत्त उपासना का बड़ा महत्व है| प्राय: सभी घरों में श्री दत्तात्रेय भगवान का भजन-पूजन हर गुरुवार को होता है| ‘तीन सिर तथा छ: हाथ वाले’ श्री दत्तात्रेय की मूर्ति घरों में दिखाई द..

मीडिया चौपाल में विकास और सरोकारों पर मंथनआशीष अंशू

        विज्ञान-विकास और मीडिया पर हरिद्वार के निष्काम सेवा ट्रस्ट     में दो दिवसीय ‘मीडिया चौपाल’ सम्पन्न हुआ| विज्ञान, विकास और सामाजिक सरोकार के विषयों को केन्द्र में रख कर ‘मीडिया चौपाल&..

ग्रामीण बा़जाररश्मि नायर

उत्तम मातृभक्त तो था ही, भगवान के प्रति भी उसकी बहुत आस्था थी। वह हर वर्ष गणेश चतुर्थी के समय अपने गांव गणपतीपुले के पुश्तैनी घर में पूरे विधि-विधान के साथ श्रीगणेशजी की स्थापना करता और दस दिन तक श्री गणेशजी की पूजा, आरती, भजन- कीर्तन, और सेवा में लगा र..

ग्रामोदय के अनोखे प्रयोगदीपक जेवणे

यह वही भारत है दोस्तों, जहां गुजरात का एक चायवाला आज देश का प्रधान मंत्री बना है। लेकिन यह कहानी उसकी नहीं बल्कि गुजरात की एक चायवाली की है, जिसका नाम है सुमित्राबेन। वह गुजरात के वापी गांव में एक चायनाश्ते का ठेला चलाती है। एक साधारण गृहिणी के लिए यह क..

पूर्वोत्तर में ग्राम विकासदयानंद सावंत

दुनिया के किसी भी देश के विकास का आधार उसके ग्रामों के विकास पर निर्भर होता है। वर्षों से चले आ रहे परंपरागत ग्रामीण रोजगार बहुत हद तक अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रहे हैं। यांत्रिक क्रान्ति ने तो इसे मरनासन्न अवस्था में पहुंचा दिया है। अनेक नई-नई रचना..

ग्रामीण रोजगारॠषभ कृष्ण सक्सेना

जब हम गांवों की बात करते हैं तो दिमाग में लहलहाते हुए हरे- भरे खेत कौंधते हैं और सरकारी विज्ञापनों या पुरानी हिंदी फिल्मों में हंसते-गाते दिखने वाले किसान और ग्रामीण याद आ जाते हैं। लेकिन उन्हीं गांवों-खेतों की दूसरी तस्वीर यह भी है कि साल २०१४ में ..

ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता की संभावनाएंडॉ. रहीस सिंह

सरहेनरी मेनियो मैकॉफ ने ग्राम समुदाय को ‘लघु गणतंत्र’ के समान बताते हुए कहा है कि यह बाह्य संबंधों से बिल्कुल पृथक और विभिन्न राजनीतिक फेरबदल के बावजूद अपरिवर्तित रहा। उनका यह भी कहना है कि ग्रामीण समुदाय के लोगों का जीवन एक-दूसरे पर निर्भर ..

अपनी जड़ों से उखड़नाअमोल पेडणेकर

भिन्न कारणों से अपना घर, गांव, प्रदेश और यहां तक कि अपना देश छोड़ कर विदेश में बसने की प्रक्रिया मनुष्यों में इतिहास काल से चल रही है। शासकीय परिभाषा में इसे ‘स्थलांतर’ कहा जाता है। मानवीय स्थलांतर का अध्ययन करना अत्यंत उद्बोेधक है। इस तरह के..

पित्रे फाउंडेशन की ग्राम सेवासंदेश सप्रे

बदलाव मानव का स्थायी भाव है। ग्रामीण कहा जाने वाला भारत धीरे-धीरे बदल रहा है। कोंकण सरीखे भाग में भी पिछले कुछ वर्षों में यह बदलाव महसूस किया जा रहा है। गांव के लिए पानी की व्यवस्था, अवागमन की सुविधा, शैक्षणिक सुविधा, सामूहिक खेती, कचरामुक्ति, स्वास्थ्य..

पर्यावरण की रक्षा हेतु अक्षय ऊर्जाअच्युत राइलकर

ज्ञवल्क स्मृति ५वीं शताब्दि के पूर्व का भारत का एक प्रसिध्द प्राचीन ग्रंथ है। उसमें वृक्ष को न काटने तथा काटने वाले को कड़ा दण्ड दिया जाने का नियम बनाया गया था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र, जो मौर्यकालीन ग्रंथ है, में भी वनों के रखरखाव की व्यवस्था की सलाह दी ..

जगमग होगा हर एक गांवसविता कुमारी

दी नदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) पूरे ग्रामीण भारत को निरंतर बिजली की आपूर्ति प्रदान करने के लिए बनाई गई है। यह योजना नवम्बर, २०१४ में प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस घोषणा के साथ शुरू की गई थी कि ‘‘१००..

ग्रामीण विकास, कृषि और मोदी सरकारमनोज चतुर्वेदी

भारत गांवों का देश है। यहां की लगभग ७० प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है, जिसकी अर्थव्यवस्था कृषि एवं कुटीर उद्योगों पर आधारित है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् नीति-निर्माताओं की यह प्रमुख चिंता थी कि किस प्रकार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृ..

गांवों में बदलाव की पहलचंद्रशेखर बुरांडे

ग्राम विकास का कागज पर लेखाजोखा करना सरल है, परन्तु वर्तमान गांवों में बदलाव लाना कठिन है। कुछ वर्ष पहले रालेगण सिद्धि तथा हिवरे बाजार जैसे देहातों में दो अलग-अलग विचारों से आया परिवर्तन हमें ज्ञात है। इस परिवर्तन का स्वरूप वहां के लिए ही ठीक था। इन दोन..

गांवों की समृद्धि हेतु व्यावहारिक सुझावनरेशचंद्र सक्सेना

भारत में तेजी से आर्थिक प्रगति के चलते निश्चित तौर पर ग्रामीण गरीबों की संख्या कम हुई है। वर्ष १९९३-९४ में ग्रामीण गरीबों की संख्या कुल ग्रामीण जनसंख्या का ५० प्रतिशत थी, जोकि वर्ष २०११-१२ में घट कर २८ प्रतिशत हो गई है। इसके बावजूद हम ग्रामीण और शहरी क्..

साम्प्रदायिक राजनीति की विभीषिकाडॉ. आनंद सिंह राणा

साप्रदायिक राजनीति की विभीषिका पर शोधोपरांत प्रोफेसर डॉ. अलकेश चतुर्वेदी द्वारा लिखित एवं इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत द्वारा प्रकाशित पुस्तक ''सांप्रदायिक राजनीति का इतिहास'', वर्तमान बदलते परिदृश्य में जनमानस के लिए अमूल्य निधि के रूप में उपलब्ध ..

बात कुछ भी नहीं थी मगर...!हरमन चौहान

  बात तो कुछ भी नहीं थी मगर....| रोज-रोज फालतू की बातें बाहर-घर में होती रहती हैं, इसलिए मैंने निर्णय लिया कि आज इतवार के दिन बागवानी करूंगा और घर में किसी से बात नहीं करूंगा| घर में सभी को हिदायत भी दे दी कि आज छुट्टी के दिन कोई मुझ से बात नहीं करेग..

विपरीत दिशाएंराजेंद्र परदेसी

गाँव बचपन में ही छूट गया था लेकिन भइया भाभी के कारण रिश्ता नहीं टूटा था। कुछ वर्षों तक तो वहां आना-जाना नियमित रूप से होता रहा, परन्तु पत्नी और बच्चों की अनिच्छा के कारण इधर कुछ वर्षों से बिल्कुल समाप्त हो गया था। बच्चे सभी महानगर में पले बढ़े; यहां के म..

यूरोप के समक्ष अधार्मिक संकटप्रमोद पाठक

साल डेढ़ साल पहले इसिस ने बाकायदा खिलाफत स्थापन कर सीरिया और इराक पर हमले करना शुरू किया। तब पहली बार यहूदी, ईसाई जैसे गैरमुस्लिम समाज को जान हथेली पर रख कर सुरक्षित जगहों पर विस्थापित होना पड़ा। उन्हें दक्षिण में अरब देशों में अथवा पूर्व में ईरान, तुर्कम..

अखिलेश यादव की बगावत के मायनेकृष्ण्मोहन झा

उत्तरप्रदेश विधानसभा के आगामी चुनावों के लिए भले ही चन्द महीने शेष रह गए हों परन्तु राज्य में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के अन्दर इस समय जो यादवी संघर्ष की स्थिति दिखाई दे रही है उसे देखकर यह अनुमान तो कतई नहीं लगाया जा सकता कि पार्टी को अगले चुनावों में अप..

८० वर्षों की साधनारूपा रावल

संगठित हो नारी शक्ति देश अब आधार मांगे, राष्ट्र की तन्द्रा मिटाने शक्ति का अवतार जागे। राष्ट्र सेविका समिति- विश्व का यह सबसे बड़ा हिन्दू महिलाओं का संगठन आगामी विजयादशमी को अपनी स्थापना के ८० वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। अपने क्रियाकलापों से राष्ट्रजीवन के..

सराहनीय स्वास्थ्य सेवाएंविशेष प्रतिनिधि

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले दो वर्षों में महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए भरसक कदम तो उठाए ही हैं, आम जनों को स्वास्थ्य सुविधाएं एवं रियाती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कई कदम उठाए हैं| कैंसर, हृदयरोग, मधुमेह, काल..

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नई पहलविशेष प्रतिनिधि

मोदी शासन की दो वर्ष की अल्पावधि में ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जनसंचार माध्यमों को आधुनिक बनाने, जनउपयोग की सूचनाओं को प्रसारित करने, फिल्मों एवं दूरदर्शन व आकाशवाणी के क्षेत्र में नई पहल आदि उल्लेखनीय कार्य किए हैं| इन कार्यों का संक्षिप्त विवरण..

सबके लिए अविरत बिजलीविशेष प्रतिनिधि

देश की जनता के लिए चौबीसों घंटे अविरत बिजली की अनोखी योजना विद्युत, कोयला एवं नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने आरंभ की है| इस योजना का नाम उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) है| इस योजना का विवरण आगे है ही, इसके पूर्व मंत्रालय की अन्य उपलब्धियों ..

सड़कों के विकास में तेजीविशेष प्रतिनिधि

सड़कों के देशव्यापी संजाल के निर्माण एवं उनकी रक्षा के लिए केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष २०१५-१६ में प्रभावी कदम उठाए, ताकि सड़कें तकनीकी दृष्टि से मजबूत और यात्रियों के लिए सुरक्षित हो और वे सक्षम एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे सके| तुलनात्म..

पिछडे वर्ग के लिए उम्मीद की किरणरिजवान आड़तिया

व्यक्तिगत सम्पन्नता के शिखर पर पहुंचने के बाद अक्सर लोग अपना सामाजिक उत्तरदायित्व भूल जाते हैं| परंतु जब कुछ लोग इस उत्तरदायित्व को पूरा करने के लिये प्रयत्नशील दिखाई देते हैं तो लगता है कि समाज में मानवता अभी भी जिंदा है|रिजवान आडतिया फाउंडेशन के संस्थ..

नौवहन क्षेत्र में असाधारण प्रगतिसंजय पराशर

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शिपिंग व्यवसाय में भारत की पैठ को मजबूत दावेदारी के साथ एक आम भारतीय के समक्ष प्रस्तुत किया है| मैंने स्वयं इसकी अनुभूति की है| शिपिंगव्यवसाय में मेरा भारत के बंदरगाहों से लेकर दुनिया के दूसरे किनारों पर खड़े समुद्री जहाजों प..

दुर्बलों को सामाजिक न्यायरिजवान आड़तिया

मोदी सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बहुत तेजी से प्रगति की है और कमजोर तबकों को सामाजिक न्याय दिलाने एवं उन्हें सबल बनाने में एक नए अध्याय की शुरूआत की है| महज आंकड़ों के मायाजाल में फंसने के बजाए उसके पीछे जो ठो..

‘सुशासन संस्कृति’ वकसित हो रही है..अमोल पेडणेकर

तुलसीदास ने रामचरित मानस में रामराज्य के रूप में आदर्श राज्य का वर्णन किया है| आदर्श राज्य का अर्थ है सुशासन| आदर्श राज्य की सुशासन व्यवस्था में राज्य का नागरिक अभाव और अन्याय से मुक्त होकर सुखी जीवन जीता है| यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज भारत की आज़ादी के ..

दिव्यांगों के लिए अच्छे दिनमुरलीधर कचरे

समाज के दिव्यांग समूह की ओर कई वर्षों से शासन एवं प्रशासन का उतना ध्यान नहीं रहा है| लेकिन विकलांग समूह के सक्षमीकरण और विकास के लिए वर्तमान केन्द्र सरकार कई नई योजनाएंं कार्यान्वित कर रही हैं| इसके अलावा पहले से कार्यरत कई योजनाओं की पुनर्रचना भी शासन ..

जनभागीदारी से ही संभव सुशासनपल्लवी अनवेकर

भारत में सुशासन की कल्पना रामराज्य, शिवाजी महाराज का शासन, चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन आदि स्वरूप में की जाती है| इन सभी शासकों ने अपनी प्रजा का पालक के रूप में भरण-पोषण किया| उनकी सुविधा, विकास, सुरक्षा और उत्कर्ष के लिए अपना जीवन न्यौछावर किया| इनकी छत्..

किसानों के भविष्य की चिंता करती सरकारगिरीश उपाध्याय

मई २०१४ में जब नरेंद्र मोदी सरकार का गठन हुआ था उस समय यह आरोप लगाया गया था कि यह कार्पोरेट और उद्योगपतियों की सरकार है| हालांकि खुद प्रधान मंत्री ने और भारतीय जनता पार्टी ने इस बात को गलत बताते हुए यह स्पष्ट किया था कि सरकार देश के कृषि क्षेत्र को बढ़ाव..

एकात्म मानवदर्शन में विकास और सुशासन की सुरभिभारतचद्र नायक

भौतिक विकास के साथ आज पग-पग पर नियमों को दरकाने अथवा उन्हें शिथिल करने की परिपाटी बन चुकी है, लेकिन पं. दीनदयाल को यह कतई बर्दाश्त नहीं था| विकास के लिए सुशासन को पहली शर्त मान कर स्वयं सिद्धांतों को जी कर दिखाने के लिए वे कृतसंकल्प थे| भारतीय जनसंघ के ..

आर्थिक सुधारों में अव्वलविशेष प्रतिनिधि

मोदी सरकार ने कई क्षेत्रों में आर्थिक सुधारों के लिए कदम उठाए हैं| इसका परिणाम यह हुआ कि भारत तेजी से बढ़ने वाली विशाल अर्थव्यवस्था बन गया है| वर्ष २०१४-१५ में जीडीपी विकास दर ७.२% थी, जो वर्ष २०१५-१६ में ७.६% को पार कर रही है| अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष न..

प्रश्न पुराने....दिशा नईदिलीप करंबेलकर

मोदीजी की विदेश नीति विविधता में भी एकात्मभाव निर्माण करने की भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा का व्यावहारिक आविष्कार है| जिन मोदी पर प्रसार माध्यमों ने आरोपों की झड़ी लगा दी थी, विध्वसंक तथा हिंसक के रूप में उनकी छवि निर्माण की थी, वे मोदी प्रत्यक्ष में कैसे हैं इसका अनुभव अब विश्व नेताओं को हुआ होगा| इससे भारत की भी नई छवि विश्व नेताओं के मन में निर्माण हुई होगी|..

कुरु प्रदेश से मुगल भी नहीं टकरा सकेडॉ. श्रीप्रकाश मिश्रा

आजादी के पूर्व और बाद का हरियाणा का इतिहास युद्ध, शौर्य और बलिदान से भरा हुआ है| आजादी के पूर्व के काल पर गौर करें तो सतलुज के इस पार यही भारत का प्रवेश द्वार था और इस कुरु प्रदेश ने हर बाह्य आक्रमणकारियों से लोहा लिया| इस तरह भारत की रक्षा में इस क्षेत्र का अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक योगदान रहा है|..

औद्योगिक विकास में हरियाणा अव्वलजीतेंद्र भारद्वाज

हरियाणा राज्य बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, बड़े व्यापारिक घरानों, विदेशी निवेशकों, अनिवासी भारतीयों तथा लघु-स्तरीय उद्यमियों से पर्याप्त निवेश आकर्षित कर पाने में सफल रहा है| यह एक निवेशक मित्र राज्य के रूप में उभरा है तथा कुशल, प्रेरित तथा अपेक्षाकृत सस्ती मानवश्रमशक्ति प्रदान करता है|..

हरियाणा का जातिगत समन्वय में योगदानडॉ. विजय कायत

बीसवीं सदी में आधुनिक शिक्षा, सरकारी नौकरियों के कारण हरियाणा में जातिगत दूरियां और कम हुई हैं| इनके अतिरिक्त आर्य समाज, सनातन धर्म सभा एवम् पिछले कई दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आदि सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों से जातिवाद बहुत कम हुआ है और समन्वयता बढ़ी है|..

हरियाणा की राजनीतिडॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

हरियाणा के इतिहास में पहली बार ऐसी पार्टी (भाजपा) ने सभी समूहों/जातियों के समर्थन से सत्ता प्राप्त की है, जिसके पास भारत को लेकर एक विशिष्ट दृष्टि है| भाजपा के एक वरिष्ठ विधायक घनश्याम मानिकटाहला के अनुसार प्रदेश की राजनीति में भाजपा के केन्द्र बिन्दु में आ जाने से निश्चय ही प्रदेश की राजनीति स्थायी रूप से बदलेगी|..