संपादकीय

सामाजिक लोकतंत्र स्थापित करने वाली राजनीति होहिंदी विवेक

राष्ट्रपति पद के लिए श्री रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा होते ही उनके दलित होने का बार-बार जिक्र किया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने मित्र दलों के साथ मिल कर अपना उम्मीदवार तय करते समय जन्म से दलित उम्मीदवार चुनने की भी राजनीतिक चाल चली। फलस्वरूप, देश में..

किसानों के आक्रोश को समझेंहिंदी विवेक

कृषि हमारा जीवन-मार्ग है, लेकिन वर्तमान में यह मानने के लिए कोई तैयार नहीं है। इसी कारण सबसे खराब दौर से यदि देश का कोई क्षेत्र गुजर रहा है तो वह कृषि है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में हुए किसान आंदोलनों ने देश में गरमाहट निर्माण की थी। फिलहाल किसान आंदोलन..

एक भारत, श्रेष्ठ भारत, विकसित भारतहिंदी विवेक

‘राष्ट्र महज जमीन का टुकड़ा या भौगोलिक सीमा का नाम नहीं है, ‘राष्ट्र’ तो एक सशक्त भावना है। इस भावना का ‘राष्ट्र विकास’ से सीधा सम्बंध है। यदि देश में सुशासन होगा तो राष्ट्र भावना प्रबल होगी और इसी राष्ट्रभाव से अपेक्षित विक..

मर्यादा भंग न हो...!हिंदी विवेक

सम्पूर्ण देश में अप्रैल के पहले सप्ताह में एक अलग ही मुद्दे पर गहमागहमी थी। इस गर्मागर्म बहस का मुद्दा था महामार्गों पर स्थित शराब की दुकानें। उच्चतम न्यायालय के फैसले के कारण इन दुकानों को अब ५०० मीटर के दायरे से आगे ले जाना होगा। फैसला तो स्वागतार्ह औ..

२०१९ के लोकसभा चुनावों का शंखनादसंपादक

पांच राज्यों के चुनाओं के नतीजे आ गए हैं। भले ही ये चुनाव पांच राज्यों में हुए है लेकिन इन चुनावों की आवाज पूरे देश में सुनाई देगी। ये चुनाव देश की राजनीति की दशा और दिशा तय करने वाले थे। अत: इन चुनावों को २०१९ के लोकसभा चुनावों की जमीन तैयार करने वाला ..

नंदनवन की मालीहिंदी विवेक

आज कॉलेज के कुछ छात्र-छात्राओं के एक ग्रुप के संवाद सुने। एक लडके ने अपने ग्रुप की लडकियों से पूछा ‘वुमेन्स डे आ रहा है....क्या प्लान है?’ एक लडकी ने तुरंत जवाब दिया ‘मॉल में सभी जगह सेल चल रही है खूब शॉपिंग करेंगे। एक दिन कॉलेज बंक और..

कश्मीर पर वक्रदृष्टी असह्यसंपादक

कश्मीर भारत का सब से संवेदनशील क्षेत्र होने से आए दिन हिंसा और राजनीति को लेकर चर्चाओं में रहता है। अशांति जम्मू एवं कश्मीर के लिए नई बात नहीं है। सम्पूर्ण मानव सृष्टि के आदि महर्षि कश्यप की कर्मस्थली, इस देश की मूल आर्य-वैदिक संस्कृति का प्रारंभ बिंदु,..

कहीं पर्यावरण अभियान को ट्रम्प नकारात्मक दिशा तो नहीं देंगे?हिंदी विवेक

विज्ञान से मानव की प्रगति होती है? इस प्रश्न का उत्तर खोजें तो पता चलेगा कि ‘विज्ञान की गति के साथ मानव मन की प्रगति नहीं हो रही है और यही सब से बड़ा रोड़ा है। ’ स्थिति क्या वाकई वैसी ही है? उसमें सुधार हुआ है या अधोगति हुई है? यह प्रश्न हम स्..

बलि चढ़ती संसद

८ नवम्बर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ५०० और १०००रु. के नोटों को प्रचलन से रद्द कर दिया। इस विमुद्रीकरण से देश भर में बड़ा हो-हल्ला हो गया। स्वाभाविक रूप से विपक्ष को संसद में हंगामा करने का एक नया मुद्दा हाथ लग गया। इससे संसद चलने न देने का पारम्परि..

आर्थिक क्रांति का प्रारंभ

ऐसा लग रहा है कि स्वाधीनता के ६९ वर्ष बाद भारत के इतिहास में वास्तविक अर्थ में आर्थिक सुधारों और क्रांति का पर्व आरंभ हो चुका है। इसकी साक्ष्य है मोदी सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम। ५०० और १००० रु. के नोटों का निर्मौद्रिकरण कर के उन्हें रद्द कर देना।..

ग्रामोदय के प्रकाश से भारत आलोकित हो!

भारत ने स्वतंत्रता की ७०वीं वर्षगांठ हाल में मनाई। आगे अमृत महोत्सवी वर्ष आना है, तब भारत कैसा होगा? स्वतंत्रता प्राप्ति के समय स्वतंत्र भारत के सम्बंध में हमारे सपने क्या थे? यह सच है कि अनेक बातें हमने हासिल कीं हैं। इसी कारण वैश्विक महासत्ता बनने का ..

सीना तान कर जीने का संदेशदिलीप करंबेलकर

"मैं धरती पर विकंलाग के रूप में पैदा हुआ, परंतु मैं असमर्थ नहीं हूं। मैं आगे बढ़ सकता हूं। मुझे सहयोग चाहिए, दया की भीख नहीं। मुझे मार्गदर्शन चाहिए, अवरोध नहीं। मैं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा सकता हूं; पर उसके लिए परिवेश चाहिए, निराशा नहीं।" किसी विक..

विकास के नये युग का सूत्रपात....दिलीप करंबेलकर

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि २१ वी शताब्दी भारत की होगी| आजादी के सात दशक पूरे हो चुके हैं| २०१४ के चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को राजनैतिक अस्पृश्यता से मुक्ति मिली थी और भारतीय जनता ने कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त कर दिया था| १० साल क..

उमर अब्दुल्ला की बेमानी

कश्मीर भारत का सबसे संवेदनशील क्षेत्र होने के साथ ही आए दिन हिंसा और राजनीति को लेकर चर्चाओं में रहता है। अशांति जम्मू एवं कश्मीर के लिए नई बात नहीं है, लेकिन जुलाई के दूसरे सप्ताह में वहां हिंसाचार हुआ, घाटी में हालात तनावपूर्ण बने यह बात अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने अपने जिस कमांडर पर अमरनाथ यात्रा में खूनखराबे की जिम्मेदारी सौंपी थी, वह आतंकी बुरहान वानी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में ढेर हो चुका है। उस पर दस लाख रुपये का ईनाम था।..