विशेष लेख

असाधारण राष्ट्रपतिआलोक शर्मा

श्री रामनाथ कोविंद एक असाधारण राष्ट्रपति होंगे और गरीबों, दलितों तथा वंचितों के लिए लगातार एक मजबूत आवाज बने रहेंगे; इसका मुझे पूरा विश्वास है। ...उनकी विधि क्षेत्र की उत्कृष्ट जानकारी से राष्ट्र को लाभ होगा। किसान पुत्र श्री कोविन्द साधारण पृष्ठभूमि से ह..

व्रत त्यौहार और सामाजिक समरसताडॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी

‘‘व्रत -त्यौहारों के दिन हम देवताओं का स्मरण करते हैं, व्रत, दान तथा कथा श्रवण करते हैं, जिससे व्यक्तिगत उन्नति के साथ सामाजिक समरसता का संदेश भी समाज में पहुंचता है। इसमें ही भारतीय संस्कृति के बीज छिपे हैं। ’’   हमारे सम..

ट्रंप का सामंजस्य और ड्रेगन कीप्रवीण गुगनानी

भारतीय अप्रवासियों के विरोध में अमेरिका में बढ़ते माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वहां जाना व इस बात को स्थापित करना कि भारत व भारतीय सदैव अमेरिका के विकास में सहायक ही रहे हैं व भविष्य में भी सहायक ही रहेंगे; एक बड़ी व ऐतिहासिक उपलब्धि रही है। ..

रिश्ते की डोरराजेंद्र परदेसी

सौरभ और गीता की बातें सुन शांति की आंखों में आंसू आ गए। दिल बोल उठा, जिनका खून का कोई रिश्ता नहीं, वह भी आज राखी के ‘रिश्ते की डोर’ से एक हो गए। ’’ प्रवासी पिता हीरामन अपने देश की माटी और संस्कृति की याद को अब तक भूल नहीं पाए थे..

जातिवाद पे सब बलिहारीविजय कुमार

लीजिए साहब, राष्ट्रपति चुनाव फिर आ गए। हमारे प्रिय शर्मा जी राष्ट्रपति को भारतीय लोकतंत्र की आन, बान और शान मानते हैं। इसलिए वे बड़ी उत्सुकता से इसकी प्रतीक्षा करते हैं। यद्यपि उन्हें इस चुनाव में वोट का अधिकार नहीं है, फिर भी वे इसके प्रचार में पीछे नहीं ..

प्राचीन ओडिशापूजा बापट

ओडिशा राज्य धार्मिकता, पर्यटन और औद्योगिकरण का त्रिवेणी संगम है। हर भारतवासी को जीवन में एक बार ओडिशा अवश्य घूमना चाहिए। ओडिशा राज्य का इतिहास कहता है कि ऐतिहासिक काल में इस राज्य पर कलिंग साम्राज्य का आधिपत्य था। ईसा पूर्व २६१ में सम्राट अशोक ने ओरछा..

पधारो म्हारे राजस्थानपूजा बापट

पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान सदैव अग्रसर रहा है। भौगोलिक विविधता, रोमांचकारी- अद्भुत इतिहास, ऐतिहासिक स्थल, प्राकृतिक सुंदरता, वैविध्यपूर्ण संस्कृति के कारण यह पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण केन्द्र रहा है। राजा महाराजाओं का स्थान राजस्थान है। कई युगों स..

जनसंख्या वृद्धि एक हाइड्रोजन बमअमोल पेडणेकर

भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर इतनी अधिक है कि अगले कुछ सालों में हम चीन को भी मात दे देंगे। मुस्लिम आबादी तो भारत समेत विश्वभर में बेहिसाब बढ़ रही है। इससे सम्पूर्ण देश के विकास और खुशहाली को ग्रहण लग गया है। अतः जनसंख्या नियंत्रण के लिए कड़े और कानूनी कदम..

बरसात में फैलती बीमारियांसोनाली जाधव

बारिश का मौसम सुहाना तो होता है; लेकिन साथ में वह कई तरह की बीमारियां भी लाता है। अतः जरूरी है कि हम कुछ सावधानियां बरतें; ताकि प्रकृति का हम पूरा लुत्फ उठा सके। वर्षा लगभग सभी लोगों की पसंदीदा ॠतु होती है; क्योंकि झुलसा देने वाली गर्मी के बाद वह राहत..

ऋतुओं की रानी बारिशडॉ. सुषमा श्रीराव

  सूर्यदेवता के कोप से धरती जली जा रही थी। सूर्यदेवता आसमान में चढ़ते ही जा रहे थे। घरों और सड़कों पर मानो आग बरस रही थी। बिजली भी चली गई थी। पंखा झलने वाले हाथ थकने लगे थे। दोपहर की झपकी आखों से कोसों दूर थी। लू चल रही थीं। सडकें तवे के समान तप रही..

एनडीटीवी का मकड़जालधर्मेन्द्र पाण्डेय

दूरदर्शन पर एक छोटे से स्लॉट से शुरू हुआ एनडीटीवी कुछ ही वर्षों में देश का ख्यातिनाम मीडिया ग्रुप बन चुका है। ...मालिक प्रणव व राधिका रॉय दम्पति ने ऐसा मकड़जाल बुनना शुरू किया और डेढ़ साल के भीतर खुद ही फंसते चले गए। बिकने वाले तमाम शेयरों को खरीदने के क्रम..

खाड़ी में एक और गंभीर संकटगंगाधर ढोबले

  सऊदी अरब के नेतृत्व में कई अरब देशों ने कतर के साथ राजनीतिक सम्बंध तोड़ दिए हैं। ये पूरे देश अमेरिकी समर्थक रहे हैं। अतः इसे अमेरिकी लॉबी में फूट माना जा रहा है। इससे मध्यपूर्व में नए समीकरण बनेंगे। इसके परिणाम घातक ही होंगे। अप्रवासी भारतीयों के..

कृषि को भी समुचित महत्व देंरज्जू श्रॉफ

सम्पूर्ण व्यावसायिक निर्यात की वैश्विक रैंकिंग में बुरी तरह से पिछड़ते हुए भारत का १९ वां स्थान है वहीं कृषि उत्पाद के निर्यात के मामले में आश्चर्यजनक रूप से छठा स्थान है। वित्तीय साक्षरता की ही भांति हर भारतीय के लिए कृषि का ज्ञान होना भी आवश्यक है।विगत व..

कृषि विकास दर ४.१% रहने का अनुमान- राधामोहन सिंहअनमोल

२०१६ में अच्छे मानसून और सरकार की नीतिगत पहल के कारण देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। वर्ष २०१६-१७ के लिए दूसरे अग्रिम आकलन के अनुसार देश में कुल २७१.९८ मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। केंद्र की भाजपानीत राजग सरकार पांच ..

कृषि क्षेत्र वृद्धि की ओरदत्तात्रेय शेडगे

बेहतर सड़क निर्माण, २००० किलोमीटर की तटीय संपर्क सड़क और भारत नेट के अंतर्गत १३०,००० पंचायतों को उच्च गति के ब्राडबैंड प्राप्त होने से निश्चित रूप से कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में सुधार और बेहतर कीमतें मिलेंगी।   राज्य सरकार का कृषि क्षेत्र पर नए..

गाड़ी बुला रही है...सुरभि

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु के नेतृत्व में रेल मंत्रालय में तीन वर्ष की अल्पावधि में इतने सुधार किए हैं कि एक सुखद आश्चर्य होता है। इससे रेल सेवा कितनी लोकाभिमुख बन चुकी है, इस बात का भरोसा हो जाता है। देश तभी तरक्की कर सकता है जब वहां की जीवन रेखाएं-..

युवा राष्ट्र विकास की नींवपल्लवी अनवेकर

सेना के जवानों पर पत्थर फेंकने की क्रिया से लेकर उसका समर्थन करने की मानसिकता तक सभी बातें खतरे की घंटी हैं। दो जानिब बंट रहा है मेरे देश का नौजवानएक शहीद हो रहा है, एक पत्थर फेंक रहा है!! कॉलेज के कैन्टीन में लगभग सभी विद्यार्थी एक साथ खड़े होने और अं..

स्वच्छ भारत अभियान का सिपाहीहिंदी विवेक

ओरेक्स प्रणाली के द्वारा गोवा ‘स्वच्छ भारत मिशन‘ की राह पर कचरे को कंपोस्ट खाद और बिजली के अलावा बिजली और सीमेंट उद्योग के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रोजेक्ट की संकल्पना गोवा राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर..

सामूहिक वृद्धि के गुणात्मक प्रयत्न - रिजवान आड़तिया फाउंडेशनविनीत कुमार

उन्होंने समाज की सामान्य आवश्यकताओं अर्थात् भरण-पोषण और विकास दोनों में सहयोग हेतु प्रदाता के तौर पर कार्य किया । रिजवान आड़तिया फाउंडेशन गठन के साथ ही समाज की क्षमता बढ़ाने जैसे और योग्य बनाने की दिशा में परिश्रम करना शुरू किया । वैश्विक स्तर पर सर्व समभाव..

जी.एन.आई.इन्फ्रास्ट्रक्चर का सुयशप्रशांत मानकुमरे

महाराष्ट्र की पुण्य भूमि देश भर के कर्मशील प्रवृत्ति के लोगों को अपनी ओर आकर्षित ही नहीं करती अपितु उनकी महत्वाकांक्षा का भरपूर पोषण भी करती है। यहां की व्यावसायिक उर्वरा प्रवृत्ति से आकर्षित होकर तत्कालीन पंजाब के रावलपिंडी से आकर संभाजीनगर में बसने वाले..

समस्त महाजन संस्था के कदम महाराष्ट्र से उ.प्र. की ओरनम्रता महाडिक

समस्त महाजन संस्था गांवों में स्वावलंबन लाने की दिशा में कार्य कर देश की प्रगति में अपना बहुमूल्य योगदान देने की इच्छा रखती है। स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से यह कार्य सरलतापूर्वक किया जा सकता है। देश का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक अथवा व्यवसायिक विश्लेषण क..

नौपरिवहन का प्रतिनिधि जे.एन.पी.टी.प्रशांत मानकुमरे

देश की नौ परिवहन क्षमता के ४६ प्रतिशत का संवहन करने वाला जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट भी अपने अपको प्रधानमंत्री जी की राष्ट्र विकास की संकल्पना के अनुसार ढाल रहा है। जेएनपीटी के चेयरमैन अनिल डिग्गिकर ने हिंदी विवेक से अपनी राय साझा की: जेएनपीटी का चेयर..

पूर्वोत्तर की प्राकृतिक छटापूजा बापट

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्य सप्तभगिनी कहलाते हैं। ये राज्य प्राकृतिक आभा से मनोरम तो हैं ही, अपनी लोक संस्कृति के लिए भी विख्यात हैं। खानपान से लेकर पहनावा तक भिन्नता के कारण पर्यटक बेहद आकर्षित होते हैं। उत्तर पूर्व के राज्य भारत का अविभाज्य हिस्सा ह..

श्री स्वामी समर्थ महाराज की जीवनी "बखर"हिंदी विवेक

महाराष्ट्र की पावन भूमि को अपनी चरण-धूलि से पवित्र करने वाले श्री स्वामी समर्थ महाराज की कृपा मराठी और गैरमराठी भक्तों पर समान रूप से बरसती रही है। परंतु देश भर में फैले उनके लाखों भक्तों के उनका जीवन-चरित्र पढ़ने और समझने में काफी कठिनाइयों का सामना करन..

खोया बचपन लौटाने की मुहिम सपनों से अपनों तकओमप्रकाश तिवारी

बच्चों का खोया बचपन लौटाना, उनके माता-पिता से उनका पुनर्मिलन करवाना एक ईश्वरीय कार्य है। ‘माय होम इंडिया’ ने सन् २०२० के अंत तक देश के सभी बालगृहों में रह रहे करीब सवा लाख बच्चों को उनके घर पहुंचाने का संकल्प ‘माय होम इंडिया’ के ..

त्रिपुरा में भी कमल खिलने की आसडॉ. अशोक सिन्हा

भाजपा त्रिपुरा के लिए नवप्रवेशी है परंतु कुछ महीने के भीतर ही इस दल ने यहां की राजनीति में सुनामी ला दी है। चुनाव पूर्व के अभियान के दौरान मोदी जी की सभा के लिए भाजपा कार्यकर्ता एक छोटा सा स्टेडियम भी नहीं भर सके थे, लेकिन वहीं अब एक भाजपा कार्यकर्ता की..

मोदी की लुक ईस्ट विदेश नीति व बौद्ध दर्शनप्रवीण गुगनानी

आज भारत अपने अतीत के अनुरूप विश्व का नेता नहीं बल्कि विश्वगुरु या जगतगुरु बनना चाह रहा है। इन परिस्थितियों में भारत भूमि या हिन्दू जनित बौद्ध धर्म के विश्व भर में फैले अनुयायी, ग्रंथ, संस्थान और विचार संपदा भारत को गुरुतर स्थान पर विराजित करते दृष्टिगत ..

मजदूर आंदोलन में बदलावअविनाश कोल्हे

हमारे देश के मजदूर आंदोलन में थकावट आ गई है। १९९० के दशक में भारत द्वारा स्वीकारी गई नई आर्थिक नीति का स्वाभाविक परिणाम मजदूर आंदोलन को आज की स्थिति को दर्शाता है। नई आर्थिक नीति में खुली बाजार अथर्र्व्यवस्था इ. को महत्व प्राप्त है। बाजार से सरकार की दख..

आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य की ऐतिहासिकताप्रो. त्रिलोकी नाथ सिन्हा

भारत विश्व का प्राचीनतम देश है, जहां की संस्कृति एवं इतिहास का उल्लेख संस्कृत वाङ्मय में आज भी उपलब्ध है, उसे दुर्भाग्यवश बर्बर विदेशी आक्रमणकारी आततायियों ने सदियों तक लूटा, उसका रूप -रंग, आकार -प्रकार , भाषा-साहित्य व भूगोल तक को बिगाड़ा, यहां तक कि इत..

छत्तीसगढ में शिक्षा की बहती बयारडॉ.मनोज चतुर्वेदी

शिक्षा का अर्थ व्यक्ति के संपूर्ण विकास का नाम है। यानि कि      शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। जो राज्य या देश के संपूर्ण नागरिकों के लिए अपेक्षित होता है। भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। एक आकलन के अनुसार, कुल जनसंख्या का ७..

भाजपा का सेक्युलर मार्ग से साम्प्रदायिक कार्ड

साम्प्रदायिक कार्ड का अर्थ है, मतदाता की जातिगत पहचान के आधार पर वोट मांगना। यह पहचान जातिगत अथवा धार्मिक भी हो सकती है। इस आलेख में मैं जाति और मोटे तौर पर धर्म के आधार की चर्चा करूंगा।   स्वतंत्रता के बाद के भारत के बहुचर्चित समाजशास्त्री प..

भाजपा की सफलता का रहस्यअविनाश कोल्हे

मुंबई मनपा के चुनावों के साथ राज्य में अनेक स्थानों पर हुए चुनावों के परिणाम आ चुके हैं और किसी भी पैमाने से देखें तो भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली है। इसे समझने के लिए आंकड़ों के विवरण पर गौर करें तो इसके पीछे का रहस्य स्वयंमेव उजागर हो जाता है। मुंबई म..

माणिक प्रभु सकलमत संप्रदाय प्रभु अग्रहारकर

माणिक प्रभु का जीवनकाल सन १८१७ से सन १८६५ तक का है। दत्त संप्रदाय में माणिक प्रभु का अनन्य साधारण महत्व है। माणिक प्रभु की माताजी को भगवान ने दृष्टांत दिया एवं मार्गशीर्ष शुद्ध पूर्णिमा अर्थात दत्त जंयती के दिन माणिक प्रभु का अवतार हुआ। इसी कारण माणिक प..

मोदी लहर की सुनामी कृष्णमोहन झा

हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों में मिली सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह बहुमत हासिल किया है उससे कहीं न कहीं पार्टी का मनोबल भी बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश में तो परिणामों ने भाजपा के लिए चमत्कारिक काम किया है। इससे सबसे अधिक ..

स्त्रियों के प्रति स्वामी विवेकानंद की भूमिकामंगला ओक

देखते-देखते २१ वीं सदी के १२ साल गुजर गये। आज स्त्री शिक्षा और अर्थाजन के क्षेत्र में पुरुषों के बराबर किंबहुना आगे ही नजर आती है। व्यक्ति स्वतंत्रता की पहचान, पुरुषों के कन्धे से कन्धा मिलाकर स्वत: का स्थान निर्माण करने की सिद्धता, समाज में सहज और स्वत..

महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरणश्रुति

सब से बड़ी बात यह है कि महिलाएं अपनी लड़कियों को शिक्षित कर, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर अपनी सहायता खुद ही कर सकती हैं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया में सक्रिय एवं स्वस्थ भागीदार बन सके। महिलाओं को अपनी मानसिकता भी बदलनी चाहिए और राजनीतिक एवं..

भारत की वीरांगनाएंसुलभा देशपांडे

भारत की विरांगनाओं को भी समय-समय पर अपनी प्रजारूपी संतानों की रक्षा हेतु हमने चण्डिका रूप धारण करते देखा है। किसी ने अपनी कायर पुरुष संतानों को वाक्बाणों से प्रताड़ित कर युध्द के लिए प्रेरित किया तो किसी ने सीधे खड्ग धारण कर युध्दभूमि पर अपना रणकौशल दिखा..

पूर्वांचल की मातृ सत्ताकअविनाश बिनीवाले

दि. ८ मार्च २०१४ को विश्व महिला दिन संपन्न हुआ। हम सभी उससे आनंदित हैं।फिर मां की महिमा क्या उस एक दिन तक ही सीमित होती है? बालक का व्यक्तित्व गढने में माता का हिस्सा कितना होता है? उसमें उसका अपना अधिकार कितना होता है? बालक को वास्तव में जन्म देते, उस..

किराये की कोखसुरभि

भारतीय संस्कृति में दान की संकल्पना अति प्राचीन है। समाज व्यवस्था में इसे आदरणीय दृष्टि से देखा जाता है। दान चाहे धन का हो, वस्तुओं का हो या संतान का हर रूप में सम्माननीय है। संतान का दान? अचानक माथे पर बल पड़ गये और दिमाग में विचार कौंधने लगे? जी हां! आ..

भारत की विदुषी महिलाएंशुभदा पटवारी

विश्व ने इस बात को प्रखरता से स्वीकार किया है कि भारत वंदनीय तथा पवित्र देश है। भारत देश धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक दृश्यों से परिपूर्ण है। इस देश को पारंपरिक महत्व भी प्राप्त है। विश्व महिला दिवस के संदर्भ में विचार करने पर भारतीय तेजस्वी स्त्रियों ..

राष्ट्रसंघ के कागजी शेरगंगाधर ढोबले

जम्मू-कश्मीर संघर्ष को लेकर राष्ट्रसंघ के प्रस्ताव पर हमेशा बहस होती है। इस प्रस्ताव पर पिछले ७० वर्षों से युद्धविराम के अलावा और कोई अमल नहीं हो पाया। ऐसा क्या है कि प्रस्ताव महज कागजी दस्तावेज बन कर रह गया? वर्तमान परिस्थितियों में इसका क्या कोई औचित्..

विस्थापन, विस्थापन, विस्थापन! डॉ. देवेन्द्र दीपक

जरूरी है कि विस्थापन की पीड़ा को समझा जाए। विडंबना यह है कि अपने विस्थापन की पीड़ा को तो लोग समझते हैं, लेकिन दूसरों के विस्थापन के लिए अंधे, गूंगे और बहरे बन जाते हैं। नौकरी में तबादले आम बात है। एक शहर से दूसरे शहर की बात तो दूर, एक ही शहर में एक कार्या..

संघ के प्रयासों से रियासत कश्मीर का विलयपल्लवी अनवेकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रारंभ से ही यह प्रयास किया कि जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत में यथाशीघ्र विलय हो। संघ ने सबसे पहले तो स्वतंत्र कश्मीर का सपना संजाने हेतु महाराजा को प्रेरित करने वाले वहां के प्रधान मंत्री रामचन्द्र काक का खुलेआम पर्दाफाश किया..

कश्मीर जो कभी शारदा देश थाडॉ. भवानीलाल भारतीय

कश्मीर जो कभी शारदा देश थाजम्मू एवं कश्मीर राज्य की राजभाषा उर्दू है। इस स्थिति में वहां हिंदी तथा संस्कृत की क्या स्थिति होगी, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है, तथापि विगत युग में यही प्रदेश संस्कृत, काव्य, दर्शन तथा इतिहास के प्रकाण्ड पण्डितों की क..

कश्मीर में पनपा आतंकवाद और पाकिस्तानडॉ. दत्तात्रय शेकटकर

  राष्ट्रजीवन तथा राजनैतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है ‘यदि आपने जहरीली जड़ों को सींचा तो आपको अच्छे फल कैसे मिलेंगे’? कश्मीर में फैले आतंकवाद का अध्ययन तथा विश्लेषण करने पर यह कटु सत्य सामने आता है। १९६५ के पाकिस्तान-भारत युद्ध ..

जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति एवं अनुच्छेद ३५ (ए)चंदन आनंद

१५ अगस्त १९४७ को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के साथ ही अंग्रेजों और कुछ स्वार्थी राजनेताओं ने पंथ के नाम पर देश को दो हिस्सों में बांट दिया। एक हिस्से को मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर पाकिस्तान बना दिया गया। स्वतंत्रता के समय भारत में कुल ५६५ से भी अधिक रि..

प्रदूषण : नियंत्रण व उपायप्रा. डॉ. मनोहर

आज विश्व में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता एवं बहस की जा रही है। पर्यावरणविदों के मन में प्रदूषित होते शहरों के बारे में गहरी चिंता उभर रही है। प्रदूषण एक प्रकार का अत्यंत धीमा जहर है जो हवा, पानी, धूल आदि के माध्यम से न केवल मनुष्य के शरीर में प..

पहले प्रदूषण नियंत्रण, फिर स्मार्ट सिटीचंद्रशेखर बुरांडे

रोटी, कपड़ा, मकान ये मानव की तीन मूलभूत आवश्यकताएं हैं। पहली दो आवश्यकताएं प्रकृति से बड़े पैमाने पर उपलब्ध होती हैं। तीसरी याने निवास, इसकी पूर्ति मानव को स्वत: करनी पड़ती है। इस तीसरी आवश्यकता की पूर्ति हेतु मानव द्वारा प्रकृति का दोहन प्रचुर मात्रा में ..

अमेरिका से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ासरोज त्रिपाठी

ग्लोबल वार्मिंग से मौसम का बदलता मिजाज पृथ्वी पर मानव सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है। वैज्ञानिकों में यह मान्यता मजबूत हो चुकी है कि जलवायु बदलाव व इससे जुड़े कई अन्य गंभीर संकट (जैसे जल संकट, जैव विविधता का हाल और समुद्रों का अम्लीकरण) अब धरती की जीवनदाय..

ग्लोबल वार्मिंग के खतरेडॉ. ओंकारलाल श्रीवास्तव

विश्व के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि दो वस्तुएं असीमित हैं- पहला ब्रह्मांड और दूसरा मानव द्वारा की जाने वाली मूर्खताएं। भूमंडलीय ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) भी मानव के भौतिक विकास की अंधी दौड़रूपी मूर्खता का ही परिणाम है। भूमंडलीय ऊष्मीकरण का अर्..

धुंध का राक्षसअन्नपूर्णा बाजपाई

पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है। पृथ्वी के नजदीक लगभग ५० ज्ञा पर स्ट्रेटोस्फीयर है जिसमें ओजोन स्तर होता है। यह स्तर सूर्यप्रकाश की पराबैंगनी (uv) किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है। आज ओजोन स्तर का तेजी से विघटन हो रहा है, वातावरण में स्थ..

कूड़ा ढोने का मार्ग बन गई हैं नदियांपंकज चतुर्वेदी

सुनने में आया है कि लखनऊ में शामे अवध की शान गोमती नदी को लंदन की टेम्स नदी की तरह संवारा जाएगा। महानगर में आठ किलो मीटर के बहाव मार्ग को घाघरा और शारदा नहर से जोड़ कर नदी को सदानीरा बनाया जाएगा। साथ ही इसके सभी घाट व तटों को चमकाया जाएगा। इस पर खर्च आएग..

क्योंकि खूबसूरत घर खुशियों की निशानी हैहिंदी विवेक

घर एक ऐसी जगह है, जहां, हम रह सकते हैं। जहां रहने, बोलने, खाने या पहनने से पहले कुछ सोचना नहीं पड़ता। अपना घर तो आखिर अपना घर ही होता है। जब हम काम से थक कर घर आते हैं, तो जो सुकून हमें हमारा घर देता है, वह और कोई नहीं दे सकता। इसीलिए घर की सुंदरता भी बह..

आंचल में अंगार सहेजने वाली सुलभारमेश पतंगे

हमने ही आपात्कालीन परिस्थिति समाप्त कराई’ ऐसी डींग कइयों ने हांकी होगी, प्रशंसा बटोरी होंगी। जो आपात्काल के विरोध में खड़े हुए, भूमिगत हुए, जेल गए उन्हें यह पता है कि आपात्काल के विरोध में लड़ाई जीती गई इसका कारण है सुलभा शांताराम भालेराव जैसी साहसी..

अभिनव गुप्त का साहित्य को योगदान

जिन आचार्यों ने विभिन्न ग्रंथ-रत्नों का प्रणयन कर न केवल संस्कृत-वाङ्मय अपितु समस्त भारतीय वाङ्मय का श्रीवर्धन किया, उन लब्ध-प्रतिष्ठ आचार्यों में आचार्य अभिनव गुप्तपाद मूर्धन्य हैं। इस महान आचार्य ने एक ओर ‘ध्वन्यालोक’ पर ‘लोचन’..

युवा भारत हेतु प्रेरणास्त्रोत शिकागो संभाषणप्रवीण गुगनानी

सम्पूर्ण विश्व भर की अपेक्षा हम भारतीय युवाओं हेतु ईश्वर कितना कृपालु है यह केवल इस बात से समझा जा सकता है कि ईश्वर ने हमें प्रेरणा देने हेतु भारत भू पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को जन्म दिया! आज जबकि ऐतिहासिक दृष्टि से और वैश्विक दृष्टि से देखने प..

यादें बीते हुए साल की....पल्लवी अनवेकर

जनवरी माह से शुरू होने वाले नए वर्ष में सब से पहले आनेवाला त्यौहार होता है मकर संक्रमण। संक्रमण शब्द का अर्थ है परिवर्तन, आगे बढ़ना या अपनी स्थिति बदलना। और अगर साल की शुरुआत ही परिवर्तन से हो तो स्वाभाविक है कि यह दौर साल के अंत तक चलता है। विगत वर्ष अर..

राजनीति की नायिका कृष्णमोहन झा

दक्षिण भारत की राजनीति व फिल्मों में आए कुछ चर्चित चेहरे जनता के दिलों में ऐसे बैठ गए कि वह उनको कभी भुला न पाई यहां तक कि उनके नाम की ही हर जगह जयजयकार होने लगी। हाल ही में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की खबर जैसे ही जनता को लगी तो कानून व व्..

अम्मा का यूं चले जाना...सुरेश बाबू

अम्मा याने मां। तमिलनाडु की जनता के लिए वह मां ही थीं। मां के गुजरने पर बच्चों के दिल पर जो बितती है, वही तमिलनाडु की जनता पर बीती। बाहर के लोगों को यह पागलपन लगता है; मगर यह पागलपन नहीं उन लोगों का दर्द है जो अम्मा उनको देकर चली गई। इतिहास उन्ही लोगों..

शिक्षा स्वावलंबन तथा आत्मसन्मान के लिए हो: रमेश पतंगेपल्लवी अनवेकर

सिद्ध विचारक तथा लेखक मा. रमेश पतंगे जी को उनकी पुस्तक ‘सामाजिक समरसता तथा डॉ. बाबासाहब आंबेडकर’ के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार का पुरस्कार प्रदान किया गया है| इस अवसर पर प्रस्तुत पुस्तक तथा समसामयिक विषयों पर उनसे हुए संवाद के कुछ अंश..

खेल फिल्मों का जमानादिलीप ठाकुर

         याद है आपको हम खेलों पर आधारित फिल्मों को गंभीरता से कब से लेने लगे? ठीक से विचार करें तो २००१ में आई ‘लगान’ के बाद से| इस बार खेल आधारित फिल्मों के विषय में बात करने का विशेष अवसर है|   ..

लो आ गई स्टाइलिश ठंडनिहारिका पोल

      ठंड आते ही धूप सुनहरी लगने लगती है| कुनकुना पानी नहाते समय आरामदायक लगता है, और रात को सोते वक्त रजाई हमारी सबसे अच्छी सहेली बन जाती है| लेकिन इन सब के अलावा ठंड में सुंदर दिखने के लिए हमारे पास ढेरों तरीके भी उपलब्ध हो जा..

हिलरी का जुझारूपन विश्वास जगाने वालाअनमोल

अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव हाल ही में हो चुका हैं| दुनिया पर राज करने वाले ‘व्हाईट हाऊस’ के स्वर्णिम सिंहासन पर अमेरिकी जनता ने रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रम्प नामक एक विवादित व्यक्ति को आरूढ़ क..

मीडिया चौपाल में विकास और सरोकारों पर मंथनआशीष अंशू

        विज्ञान-विकास और मीडिया पर हरिद्वार के निष्काम सेवा ट्रस्ट     में दो दिवसीय ‘मीडिया चौपाल’ सम्पन्न हुआ| विज्ञान, विकास और सामाजिक सरोकार के विषयों को केन्द्र में रख कर ‘मीडिया चौपाल&..

लगन और निष्ठा की मिसाल - जयवंतीबेनहिंदी विवेक

गाँधीजी ने कहा था-जब कोई स्त्री किसी काम में जी-जान से लग जाती है तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं होता| इसी हकीकत को बयां करता है जयवंतीबेन मेहता का जीवन| उन्होंने जो ठाना वह करके ही दम लिया| सीमित साधनों और सामाजिक बाध्यताओं के बावजूद राजनीति के क्षेत..

ऑर्गनायजर के सफल प्रकाशन के ७० वर्षदत्तात्रेय आंबुलकर

अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनायजर’ ने ७० वर्ष की सफल और चुनौतीभरी पत्रकारिता यात्रा पूरी की है| इसमें उसे अपनी सहयोगी पत्रिका एवं भारत प्रकाशन (दिल्ली) के प्रतिष्ठित प्रकाशन हिंदी साप्ताहिक ‘पांचजन्य’ का भी पूरा सहयोग मिलता गया| इन दोनों पत्रिकाओं ने वैचारिक पत्रकारिता का अपना राष्ट्रीय दायित्व पूरी निष्ठा के साथ निभाया|..

राष्ट्र सेविका समिति का प्रेरणा शिविररूपा रावल

राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना के ८० वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिल्ली में आयोजित प्रेरणा शिविर में भारत के कोने-कोने से आईं २००० से अधिक दायित्वयुक्त सेविकाओं ने हिस्सा लिया| ..

परिक्रमा यात्रा में दिखा आत्मीय 'भारत'प्रमोद कुमार सैनी

‘भारत परिक्रमा यात्रा’ विश्वमंगल गो ग्राम यात्रा का अनुवर्तन है जिसके माध्यम से गाय, ग्राम और प्रकृति संरक्षण को लेकर जनजागरण करने का काम किया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय सेवा प्रमुख एवं वरिष्ठ प्रचारक सीताराम केदिलाय ..

लक्ष्मी आई मेरे द्वारहरमन चौहान

पिछले पचास बरसों से मैं लक्ष्मी का इंतजार ही करता रहा। लेकिन वह कभी मेरे द्वार आना तो दूर झाकी तक नहीं। पता नहीं मेरे सपनों में इस बार कैसे आ गई? उसने कहा-जागो कलमघिसू जागो? और मांगो कोई वरदान? मैंने जाग कर देखा और मेरी आंखें मसल कर मैंने कहा- ‘&l..

विकसित देशों के विकसित गांव...!प्रशांत पोल

अपने देश के बाहर का पहला गांव देखने का सौभाग्य मुझे मिला था, आज से लगभग तीस वर्ष पूर्व। मैं जापान में ‘स्वीचिंगसिस्टम’ के प्रशिक्षण के लिए गया था। कुछ महीने जापान में रहने का अवसर मिला था। मेरा अधिकतम समय बीता था, टोकियो में। लेकिन लगभग दो स..

ऊर्जा के प्रति जागरूकताडॉ. रामेन्द्र सिंह

अहमदाबाद के श्रमिक क्षेत्रों की चाल के छप्परनुमा घरों में ’उजाला’ ने दस्तक दे दी है। दरअसल छप्परनुमा खपरैल के एक हिस्से को खोल कर उसमें फाइबर-प्लास्टिक का सोलर स्ट्रक्चर बैठाया गया है। उसकी खिड़कियां खोलीं और बंद की जा सकती हैं। इसकी डिजाइन ऐ..

गांव की बेटी, सबकी बेटीमृदुला सिन्हा

दादी अपने जीवन में छुआछूत का विषेश व्यवहार करती थीं। दरवाजे और आंगन, खेत-खलिहान में काम करने वाली महिला-पुरुषों को कभी अपना शरीर नहीं छूने देतीं। पर उनसे मुहब्बत भी बहुत करती थीं। गांव में किसी जाति की बेटी का ब्याह हो, वे हम बहनों को लेकर पहुंच जातीं। ..

समर्थ ग्राम, समर्थ भारतडॉ. दत्तात्रय शेकटकर

२१ वीं सदी में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। स्मार्ट सिटी, स्मार्ट शहर की कल्पना जोर पकड़ रही है। शहरों का व्यवस्थापन, शासन व्यवस्था, राष्ट्रीय प्रगति, उन्नति का मार्ग बन रही है। यह तर्क संगत नहीं लगता है। भारत की सम्वन्नता, उद्योजकता यद्यप..

तोहफाशीला मिश्रा

समय को कौन रोक सकता है? वह अपनी रफ्तार में आगे बढ़ता जाता है। हम लाख उसे पकड़ कर रखना चाहें पर वह रेत की मानिंद हाथ से फिसल ही जाता है। और पीछे छूट जाती है यादें। ऐसी ही एक याद जब-तब मुझे सताती थी। गांव का वह घर, चूल्हे में चढ़ी बटलोई की दाल, भुने आलू का भ..

गिरीशभाई शाहअनमोल

समस्त महाजन संस्था का उद्देश्य क्या है? समस्त महाजन संस्था का मुख्य उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा करना है। ग्राम रचना की प्रमुख आधारशिला जल, जमीन, जानवर, जंगल है। इन चारों के आधार पर अपनी ग्राम संस्कृति बची हैै। आप किसी गांव की कल्पना बिना पानी, बिना जंगल, ..

अरुणाचल में‘गांव बूढ़ा’की भूमिका श्रृति सिन्हा

पूरे विश्व में सामाजिक संरचना का विकास एक सरल रूप से उच्चतम रूप में हुआ है। जब तक एक समाज एकाकी रूप में रहता है, तब तक उसकी संरचना सरल बनी रहती है। जैसे ही यह बाहरी सम्पर्क में आता है, उसमें विकटता आने लगती है और वह अपना वास्तविक रूप खोने लगता है। इस दृ..

ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरणडॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी

ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के मंत्रालयों में से एक है। यह मंत्रालय व्यापक कार्यक्रमों का कार्यान्वयन करके ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव लाने के उद्देश्य से एक उत्प्रेरक मंत्रालय का कार्य करता आ रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य गरीबी उन्मू्लन, रोज..

मेक इन विलेजडॉ. ओंकारलाल श्रीवास्तव

ब्रीटिश शासन के पहले भारत वर्ष एक समृद्ध राष्ट्र था, भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि एवं ग्रामीण लधु उद्योगों पर आधारित थी। अधिकांश जनसंख्या की जीविका का साधन कृषि व्यवस्था थी जो कि पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर एवं परस्पर आश्रित थी। भारतीय कृषि मुख्यत: खाद्य ..

फैशन की शुरुआत गांवों से...निहारिका पोल

गांव की मिट्टी की खुशबू कौन भूल सकता है भला? गांवों की बात ही निराली होती है। चाहे वह मिट्टी की सौंधी खुशबू हो, या फिर गांव की बोली, या वहां का पहनावा। वैसे भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गांवों की संख्या भी अधिक है। हर गांव का रंग एक दूसरे से अलग और निर..

तबादलासुशीलकुमार फुल्ल

मंत्री बांके बिहारी का दरबार सजा हुआ था। दरअसल जब भी मंत्री जी अपने घर आते, तो इलाके के सब अफसरान उनकी अर्दल में हाजिर होते। और जो अनुपस्थित होते, उनका बाकायदा नोटिस लिया जाता। उनका निजी सहायक तुरन्त फोन करता और मंत्री जी खरी-खोटी सुना देते। इसलिए ज्या..

भारत की प्राचीन सभ्यता मिलिंद ओक

ऐसा कहते हैं कि अतीत की परछाई बड़ी लंबी होती है| कहावत      तो मूल विदेशी है जहां अतीत और वर्तमान में स्पष्ट विभेद दिखाई देता है, जहां अतीत संग्रहालयों में बंद है और वर्तमान का अतीत से रिश्ता टूटा हुआ सा है| परन्तु भारत एक ऐसा अद्भुत ..

भारत के संस्कृत संपन्न गांवसपना मांगलिक

संस्कृत भारत की वैदिक भाषा है। यह वही भाषा है जिससे संसार की समस्त भाषाओं का जन्म हुआ है। संक्षेप में संस्कृत दुनिया की समस्त भाषाओं की जननी है, मगर जैसा कि आधुनिक समाज का रिवाज है कि बच्चे जिन मां-बाप की गोद में खेलते और उनके संरक्षण में जीने की कला सी..

ब्रिटिशकालीन मुंबई के गांवविकास पाटील

वैश्वीकरण के आधुनिक युग में रहने वाले मुंबईवासियों को शनिवार-रविवार की लगातार दो दिन की छुट्टियों में बरसात के मौसम में हरी चादर ओढ़े पर्वतों और उनमें कलकल बहते जलप्रवाहों और प्रपातों में विचरण करने की इच्छा होती है। शहरी वातावरण से परेशान जीवन ग्रामीण म..

नरेंद्र तोमरअमोल पेडणेकर

आपकी दृष्टि से सुशासन का सही अर्थ क्या है? शासन एक समाज व्यवस्था की प्रणाली है। सुशासन का अर्थ यह है कि लोग हर क्षेत्र में अपने आपको सुरक्षित महसूस करें। इसी दृष्टि से शासन की कार्यप्रणाली का मार्गक्रमण हो, समाज के हर व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार र..

चौपाल की चहल-पहल और सूनापनडॉ. एम. एल. खर

मैं बुन्देलखण्ड के एक गांव की चौपाल हूं। यहां की स्थानीय बोली में चौपाल को ‘अथाई’ कहते हैं जो शायद ‘अस्थायी’ का अपभ्रंश है, क्योंकि यहां की चहल-पहल अस्थायी और अनियमित रहती है। यहां कुछ भी पहले से निश्चित नहीं होता। लोग अनायास एक ..

चित्र फलक पर गांवमनमोहन सरल

महात्मा गांधी का यह कथन तो प्रसिद्ध है कि भारत का भविष्य गांवों में बसता है। महान कवि सुमित्रानंदन पंत ने पूरी कविता ही लिखी थी और भारतमाता को ग्रामवासिनी माना था। महाकवि पं.सूर्यकांत निराला यद्यपि रहते तो प्रयाग में थे किन्तु उनकी रचनाओं में भी गांव झल..

ग्राम देवता और ग्राम्य जीवनमल्हार कृष्ण गोखले

भारतीय जीवन रचना के अनुसार हर ग्राम की एक देवता होती है। ग्राम का जो निर्धारित क्षेत्र है, उस पर इस देवता का अधिकार चलता है। यह देवता स्त्री या पुरुष दोनों हो सकती है। भारतीय परंपरा कहती है कि, हमारे देश का सबसे प्राचीन ग्राम या नगर है वाराणसी। अब इस वा..

गांव का सफरपल्लवी अनवेकर

बदल रहा गांव अब कर लो यकीन इस खबर पर चलो ले चलूं आज तुम्हें अपने ही सफर पर.... नमस्कार! मैं भारत का एक गांव हूं। आप मुझे कोई भी नाम दे सकते हैं। मुझे पहचानने वाले लोग अपनी उम्र के हिसाब से मुझे याद करते हैं। याने कि जिस उम्र में उन्होंने मुझे देखा है ..

कीनुश्रुति

ईश्वर की अजब लीला है। चौरासी लाख योनियों में से केवल मनुष्य ही ऐसी योनी है जिसमें विवेक तत्व है। लेकिन इस तत्व का उसने सदैव गलत प्रयोग ही किया है। चुनिंदा लोग ही इस धरती पर वास्तव में मनुष्य कहलाने योग्य हैं। मेरी इस धारणा के पीछे जीवन का कटु यथार्थ है,..

डॉ. दिनेशप्रमोद कुमार सैनी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने देशभर में युगानुकूल ग्रामीण पुनर्रचना के सराहनीय प्रयोग किए हैं जिनका असर एक हजार से अधिक गांवों में अब साफ देखा जा सकता है। ग्रामवासियों को साथ लेकर स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों को समझने के लिए ..

स्वादिष्ट ग्रामीण पकवानगार्गी सिंह

धरातल पर भारत भूमि की स्थिति शीतोष्ण कटिबंध में है। अर्थात यहां पर शीत और उष्ण दोनों वातावरण पाया जाता है। तीन ऋतुएं होती हैं। इसलिए जीवन-यापन के साधनों का निर्धारण एवं भोजन भी मौसम के अनुकुल ही पकाया और खाया जाता है। खाद्य पदार्थों को आयुर्वेद के निर्द..

साहित्य में गांवॠषि कुमार मिश्र

गांव मनुष्य जाति की प्रथम विश्रामस्थली है। मानव सभ्यता का अभ्युदय और विकास गांवों में ही हुआ है। गांव में रहते हुए ही मनुष्य ने प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का जीवन यापन की सामग्री के रूप में उपयोग करना सीखा। भूख- प्यास की व्याकुलता, जंगलों-बीहड़ों की वीरानी..

वास्तुशास्त्र और खेती-बाड़ीआर. के. सुतार

आप जाने अनजाने में वास्तुशास्त्र का पूर्णरुपेण पालन चाहे भी कर पाए परन्तु यदि भूखंड चौरस हो और बसावट ग्रिड पैटर्न पर हो तो वास्तुशास्त्र के एक मूलभूत सिद्धांत का पालन स्वतः ही हो जाता है। वो बात अलग है कि वास्तुशास्त्र के अन्यान्य नियमों का पालन करके आप..

राजस्थान के सीमावर्ती गांवभागीरथ चौधरी

सीमावर्ती गांवों को खाली करवाया जाना, सीमावर्ती गांवों से लोगों का पलायन करना यह समाचार आपने कई बार सुना होगा। और लोगों के गांव खाली करने के दृश्य भी टी.वी. चैनलों पर देखे होंगे। करोड़ों देश-वासियों के लिए यह एक न्यूज होती है। लेकिन अचानक ही अपना गांव घर..

भारतीय परिदृश्य और आंचलिक रंगकर्मसुनील मिश्र

भारतीय संस्कृति प्रसन्नता और मनोरंजन से सदैव परिपूर्ण रही है। उत्सव-प्रियता और खेल में आनंद यहां की मनोभावना की प्रमुख विशेषता रही है। यही कारण है कि वातावरण एवं परिस्थिति के अनुकूल खेलों का सृजन और विकास हुआ। भारत को गांवों का देश माना जाता है। ग्रामीण..

भारत में पारंपारिक ग्रामीण खेल शैलेंद्र सिंह

भारतीय संस्कृति प्रसन्नता और मनोरंजन से सदैव परिपूर्ण रही है। उत्सव-प्रियता और खेल में आनंद यहां की मनोभावना की प्रमुख विशेषता रही है। यही कारण है कि वातावरण एवं परिस्थिति के अनुकूल खेलों का सृजन और विकास हुआ। भारत को गांवों का देश माना जाता है। ग्रामीण..

नर्मदा के किनारे बसे गांवपूजा बापट

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के अमरकंटक के मैकल पर्वत से उद्गमित नर्मदा गुजरात के भरूच के पास मिठीतलाई में अरब सागर में विलीन होती है। नर्मदा की घाटी विंध्य और सतपुड़ा पर्वत तक फैली है। इसका कुल क्षेत्रफल ९८७६ वर्ग किमी है। घाटी का ८६% भूभाग मध्यप्रदेश में ह..

त्योहार तथा उत्सव की परम्परादिनेश प्रताप सिंह

भारतीय संस्कृति आरण्यक है! यह ऋषि-मुनियों के आश्रमों से निकल कर जन सामान्य तक पहुंची है। यही कारण है कि हजारों वर्षों की परम्परा त्योहार तथा उत्सव के रूप में ग्राम, वन तथा गिरि प्रदेशों में आज भी विद्यमान है। इस उत्सवों एवं त्योहारों का महत्व अनन्त काल ..

जित गांव तित मुहावरागंगाधर ढोबले

मुहावरा तो वैयाकरणों का विषय है। वैयाकरण का अर्थ सरल भाषा में व्याकरण का आचार्य है; लेकिन विज्ञान के इस युग ने इस शब्द को भाषा-विज्ञानी के अर्थ तक पहुंचा दिया है। वर्तमान बोली या लिखित हिंदी से वैयाकरण या व्याकरणाचार्य शब्द तिरोहित होते जा रहे हैं। बहुत..

ग्रामीण विपणन एवं बैकिंग का करीबी रिश्तारजनीश यादव

भारत गांवों का देश है। अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं। भारत की आत्मा गावों में बसती है। हमारे गावों में विभिन्न धर्म, जाति और संप्रदाय के लोग मिलजुलकर रहते हैं। गांवों के विकास के बिना देश का विकास अधूरा है। ’’ - महात्मा गांधी ग्रामीण विपण..