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सिफर से चलकर शिखर तक पहुंचने वाले कुछ उत्तर प्रदेश मूल के मुंबईकर, जिन्होंने मुम्बई की वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक पृष्ठिभूमि तैयार करने में योगदान दिया –

राजनीति
चंद्रकांत त्रिपाठी, कृपाशंकर सिंह, विद्या ठाकुर, आर.एन. सिंह, उद्योगपति, रामजस उपाध्याय, लल्लन तिवारी, नाहर सिंह, शारदा सिंह, धीरज गुप्ता/रीता गुप्ता,

साहित्य
डा. रामजी तिवारी, डा. करुणाशंकर उपाध्याय, पं. नरेंद्र शर्मा, जावेद अख्तर, मनोज मुंतसिर

पत्रकारिता/समाजः
प्रेम शुक्ल, राहुल देव, अमरजीत मिश्र, राजेश विक्रांत, अनुराग त्रिपाठी

मुंबई व उत्तर प्रदेश का बहुत ही प्राचीन संबध रहा है। रामायण व महाभारत काल में भी इसका उल्लेख मिलता है। भगवान श्रीराम, सीता माता व लक्ष्मण वनवास के दौरान मुंबई व उसके आसपास रहे। पंचवटी में अधिक समय तक निवास किए। यहीं पर मारिच ने स्वर्णमृग बन कर उन्हें भ्रमित किया। मारिच का किला मुंबई के मढ़ आईलैंड में है, जिसे पर्यटक आज भी देखने जाते हैं। पंचवटी से ही लंकापति रावण ने सीता का अपहरण किया था। सीता माता की खोज में राम-लक्ष्मण मुंबई भी पधारे थे और यही से होते हुए वे किशकिंधा पर्वत गए, जहां पर उन्हें हनुमान जी की सहायता से सीता माता का पता चला कि सीता माता लंका में है। सुग्रीव एवं हनुमानजी के सहयोग से सेना बना कर लंका पर विजय प्राप्त कर मां सीता को लेकर वे एक बार पुन: मुंबई पधारे व बाण से प्रहार कर धरती से गंगा प्रकट की एवं स्नान कर पवित्र हुए। जो आज बाणगंगा के नाम से विख्यात व दर्शनीय तीर्थस्थान बन गया है।

महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास के दौरान मुंबई में रहे। उन्होंने अनेक गुफाओं का निर्माण किया, जिसमें महाकाली गुफा व मनोरी गुफा वास्तुकला का उत्कृष्ट प्रमाण है। उनके समय की अनेक कहानियां आज भी जनजन में लोकप्रिय हैं। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण भी द्वारिका से मुंबई के क्षेत्र में पधारे थे व यहां दुष्टों का संहार कर शांतिवादियों का उद्धार किया।

इस प्रकार यह परम्परा अनवरत गति से बढ़ती रही। उत्तर प्रदेश से व्यापार व धर्नाजन हेतु लोग मुंबई आते रहे व मुंबई से तीर्थयात्रा हेतु लोग उत्तर प्रदेश जाते रहे। यहां तक कि छत्रपति शिवाजी महाराज के राजतिलक हेतु काशी से गागाभट्ट यहां पधारे व उनका शास्त्रानुकूल विधिवत् राजतिलक किया। छत्रपति शिवाजी का यशोगान करने उत्तर से ही कविभूषण का आगमन हुआ। उन्होंने छत्रपति शिवाजी की कीर्ति सम्पूर्ण देश में प्रचारित की।

इस प्रकार आधुनिक मुंबई के निर्माण में उत्तर भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है। प्रत्येक क्षेत्र में वे शिखर पर रहे। मुंबई के राजनीतिक क्षेत्र में इनका प्रभाव रहा है। यहां चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रहे कोई ना कोई मंत्री उत्तर भारतीय रहता है। इसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में ये अग्रणीय रहे। अनेक विद्यालय, कालेज, तकनीकी संस्थान, मेडिकल कालेज, इंजीनियरिंग कालेज, अनेक शैक्षणिक संस्थान उत्तर भारतीयों द्वारा संचालित हो रहे हैं। मुंबई के नौनिहालों को ये शिक्षित कर उन्हें योग्य बना कर उच्च शिखर पहुंचा रहे हैं। मुंबई के उत्थान में यहां के भवन निर्माताओं का सम्पूर्ण सहयोग रहा। अनेक भवन निर्माता उत्तर भारतीय हैं, जो विभिन्न क्षेत्रो में भवन निर्माण का कार्य सुचारू रूप से कर रहे हैं। अनेक आर्किटेक्ट, इंटिरियर डिजाइनर, इंजीनियर उत्तर भारतीय हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में भी अनेक डॉक्टर उत्तर भारतीय हैं। अनेक दांत, कान, नाक और आंख के विशेषज्ञ उत्तर भारतीय हैं। अनेक लेबोटरीज (प्रयोगशाला) के प्रबंधक उत्तर भारतीय हैं।

कला के क्षेत्र में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। अनेक लेखक, पत्रकार, निर्माता, निर्देशक, संगीतकार, गीतकार, कवि-पटकथा एवं संवाद लेखक उत्तर भारतीय ही हैं। हिंदी फिल्म जगत में व धारावाहिक में इनका एकछत्री राज है। बहुत से अभिनेता व अभिनेत्रियां उत्तर भारत से ही हैं। विश्व के महान अभिनेता उत्तर भारतीय हैं व अनेक विश्व स्तर के पुरस्कार उत्तर भारतीय कलाकारों को प्राप्त हुए हैं, जिनके कारण भारत का नाम विश्व पटल पर अंकित हुआ। सम्पूर्ण जगत में उत्तर भारतीय कलाकारों का डंका बज रहा है।

परिवाहन के क्षेत्र में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अनेक ट्रांसपोर्ट इनके ही हैं। जिसमें ट्रक, बस एवं विशेषकर टैक्सियां तो उत्तर भारतीयों की ही हैं। अधिकतर टैक्सी ड्राइवर उत्तर भारतीय ही हैं। टैक्सी व रिक्शा चालन में इनकी गहरी पैठ है। कई उत्तर भारतीयों की शिपिंग(नौवहन) कम्पनियां हैं। मर्चेंट नेवी में इनका ही प्रभुत्व है। कई उत्तर भारतीयों का जहाजी बेड़ा भी है।

प्रशासन में भी ये सक्रिय हैं। प्रशासनिक कर्मचारियों में ये उच्च पदों पर हैं। प्रतिष्ठित हैं। अनेक आई. ए. एस. एवं आई.पी.एस. अधिकारी उत्तर भारतीय ही हैं। ये ही मुंबई के नीति निर्धारक एवं सुरक्षा कवच हैं। शासन किसी का भी रहे पर इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। मुंबई का दुग्ध व्यवसाय उत्तर भारतीयों ने संभाल रखा है। भोर में घर-घर दूध पहुंचाने का अति महत्वपूर्ण कार्य यही लोग करते हैं। इन्हें आलस्य की परछाई भी स्पर्श नहीं कर पाती। ये मुंबई के बच्चों को पौष्टिक दूध पाशन कराके स्वस्थ रखते हैं। ये कार्य केवल उत्तर भारतीय ही करते हैं, जो प्रसंशनीय है। मुंबई वासियों को उनका आभारी रहना चाहिए। कर्मकांड, पूजापाठ व विवाह उत्तर भारतीयों द्वारा सम्पन्न होते हैं।

फल का संपूर्ण व्यवसाय इन्हीं उत्तर भारतीयों द्वारा होता है। ये मुंबई के रहिवासियों को ताजा व स्वास्थवर्धक फल खिलाते हैं। थोक एवं फुटकर बाजार इन्हीं के कंधों पर है। इसी तरह सब्जी का व्यवसाय पूर्ण रूप से इन्हीं के हाथोंे में है। प्रत्येक सब्जी विक्रेता उत्तर भारतीय ही होता है, जिसे मुंबईवासी प्यार से भईया कह कर बुलाते हैं और वे भी बडे भाई की भूमिका निभाते हुए सब की सेवा करते हैं। उनके भोजन में स्वास्थवर्धक हरी सब्जी व साग की व्यवस्था करते हैं। आटा चक्की व्यवसाय इन्हीं के हाथों में हैं। उत्तर भारतीयों ने कभी अवैधानिक कार्य नहीं किया, ना कभी जुए के अड्डे चलाए, ना ही मटका और ना ही शराब की भट्टियां लगाईं। न शराब बेची, न ही अन्य मादक द्रव्यों के काम में कभी संलग्न रहे। मुंबई के हित एवं विकास में इनका सहयोग अनवरत गति से संचालित रहा है, और रहेगा।

जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण की दो मां थीं। जन्म देने वाली मां देवकी व पालन करने वाली यशोदा मां। उसी प्रकार उत्तर भारतीयों की भी दो मां हैं। एक उनकी मातृभूमि उत्तर भारत एवं दूसरी उनकी कर्मभूमि मुंबई। इन दोनों माताओं का वे आदर एवं सम्मान करते हैं और अपना प्यार न्यौछावर करते हैं।

परन्तु मुंबई में ऐसे अज्ञानी महानुभाव भी हैं, जो उत्तर भारतीयों के योगदान को समझ नहीं पाते और इनका विरोध करते हैं, इन्हें अपमानित करते हैं। ये अल्पज्ञानी मुंबई का विकास नहीं विनाश की भूमिका निभा रहे हैं। जबकि वे जानते हैं कि वे जो रोटी खाते हैं उसका आटा किसी न किसी उत्तर भारतीय के हाथों पीसा होता है। फल, सब्जी व दूध उत्तर भारतीयों के हाथ से इनके घर तक पहुंचा है। इनके बच्चों को स्वस्थ रखना व उसे विद्यालय तक पहुंचाना, उनको उचित शिक्षा प्रदान कर योग्य बनाने में उत्तर भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर इन अज्ञानियों को कब चेतना आएगी मुंबादेवी ही जाने।

अगर उत्तर भारतीय एक दिन की हड़ताल कर दे तो सम्पूर्ण मुंबई में हाहाकार मच जाएगा, जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो जाएगा, सबकुछ लगभग ठप हो जाएगा।
इसीलिए मुंबई के रहिवासियों को उत्तर भारतीयों के महत्व को समझना चाहिए एवं उनको उचित सम्मान देना चाहिए व उन्हे मुंबईकर समझना चाहिए।

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