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इस संसार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसका कोई सपना ना हो, जिसकी कोई चाहत ना हो। यदि कोई मुझसे ये कहे कि मेरी कोई चाहत नहीं, तो यह निश्चित ही मज़ाक होगा। या फिर वह व्यक्ति कोई सन्यासी होगा। हाँ-  वाक्य निर्माण में थोड़ा फेर बदल हो सकता है। जैसे कि – “मेरी जीवन में अब कोई चाहत नहीं” या फिर “मेरे बच्चों का सपना ही मेरे लिए महत्वपूर्ण है” या  “घर की जरूरतें ही अब मायने रखती हैं”- और इसी तरह की बहुत सी बातें। ऐसी सभी बातें कहते हुए वे ये सोचते हैं कि सचमुच उनकी ख़ुद की कोई चाहत, कोई सपना नहीं।

लेकिन वे ये नहीं समझ पाते कि दूसरों का सपना पूरा करना भी उनके स्वयं की चाहत है उनके ख़ुद का ही एक सपना है ।

             ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि, कई बार कुछ लोग जीवन में कुछ ऐसे कड़वे अनुभवों से गुज़र चुके होते हैं कि फ़िर किसी एक अच्छी घटना की कल्पना करने का उनका मन नहीं होता। दुःखों में यकीन रह जाता है और खुशियों से विश्वास उठ जाता है, क्योंकि उनके हृदयों में नकारात्मकता पूर्ण रूप से अधिकार जमा चुकी होती है। कोई भी अच्छी बात, सुखद पल, सफ़लता भरा जीवन, उन्हें प्रायः एक इल्यूज़न अर्थात भ्रम सा ही प्रतीत होता है।

उतार – चढ़ाव हर व्यक्ति के जीवन में आते हैं- बस फ़र्क इतना ही है कि किसी के जीवन में कम और किसी के जीवन में अधिक आते हैं। लेकिन इन परिस्थितियों में हार मान कर बैठ जाना एक सफल व्यक्ति के गुणों के विपरीत है। अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर व्यवहारिक दुनिया और परिस्थितियों का सामना करना ही एक सफ़ल व्यक्ति की पहचान है। एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी अंदर की शक्ति से , अपनी सकारात्मक सोच से अपना हर स्वप्न पूरा करने की क्षमता रखता है – फिर चाहे वो सपना अपने लिए हो या अपनों के लिए हो।

अगर कोई कार्य करने से पहले ही, या फिर उस कार्य को करने के दौरान ही हम ये सोचने लगते हैं कि ये कार्य हमारे बस का नहीं तो वो कार्य कभी भी सफ़लता पूर्वक पूरा नहीं हो सकता। दरअसल हमारे भीतर घर कर चुकी नकारात्मकता उसे पूरा नहीं होने देती। जीवन में कुछ भी सरल नहीं होता, चाहे वो रसोई घर में चाय बनाना हो या फ़िर कोई अफ़सर बनकर देश संभालना। लेकिन इसका ये अर्थ तो नहीं कि हम प्रयास ही करना छोड़ दें। जब प्रयास होगा – तब ही सफल या विफल होगा। एक बार हार जाने से या किसी कार्य में विफ़ल हो जाने से सम्पूर्ण जीवन का पर्याय नहीं बदलता। विफलता भी हमें सफ़लता की ओर बढ़ने की ही प्रेरणा देती है। इसलिए इससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि सीख लेकर, अपनी गलतियों को समझकर, हादसों से उबर कर, नकारात्मकता त्याग कर, आगे बढ़ना चाहिए। नकारात्मकता पर विजय प्राप्त करने का सीधा अर्थ है कि सफलता के मार्ग आपके लिए खुले हैं। यदि सकारात्मकता सोच के साथ प्रयास होगा तो सफल ही होगा।

               हार- जीत जीवन के विभिन्न पहलू हैं लेकिन इस हार और जीत दोनों को ही सहजता से लेना सकारात्मकता है। यही सकारात्मकता एक सुखी जीवन का आधार ही है, नहीं बल्कि एक ऐसा अस्त्र है जिससे हम इस संसार में सबकुछ जीत सकते हैं- नाम और शोहरत के साथ-साथ  लोगों के हृदय भी हम जीत सकते हैं।

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