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२०१४ के चुनाव की तुलना में इस चुनाव में लगभग 8 करोड़ ४३ लाख मतदाता बढ़े हैं। इस वर्ष कोई ९० करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें १८ से १९ वर्ष के दो करोड़ युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। चुनाव और लोकतंत्र एक ही सिक्के के दो पहलू माने जाते हैं। इन्हीं पर प्रकाश डालनेवाला अप्रैल २०१९ का अंक हिंदी विवेक मासिक पत्रिका ने प्रकाशित किया है। साथ ही इस अंक में आप पढ़ सकते हैं,

*स्व.मनोहर पर्रीकर जी की कुछ यादें,

*हिंदी विवेक के दशकपूर्ती वर्ष पर आलेख और

*समसामयिक विषय मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक पर मा. इन्द्रेश कुमारजी का साक्षात्कार।

निश्चित ही। हिंदी विवेक द्वारा प्रकाशित यह अंक पठनीय एवं संग्रहणीय है।

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

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