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खूबसूरत दिखने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन जब यह चाहत दीवानगी की हद पार करने लगे यानी कि दिन भर आप अपने बाकी के कामकाज छोड़ कर सिर्फ और सिर्फ अपनी खूबसूरती के बारे में ही सोचने लगे,  तो समझ लीजिए कि आप बीडीडी या बॉडी डिस्मॉर्फिक डिस्ऑर्डर अर्थात शारीरिक कुरूपता विकार से पीड़ित हैं.

इस समस्या से पीड़ित लोगों में खूबसूरत दिखने की चाह इतनी प्रबल होती है कि वे इसके लिए कुछ भी करने का तैयार रहते हैं. दिन भर में जाने कई बार वे आईने में अपना चेहरा निहारते हैं. अपनी हेयर स्टाइल, अपने ड्रेसिंग, अपनी शक्लोसूरत में आये दिन नये-नये बदलाव करते रहते हैं, ताकि वे खूबसूरत दिख सकें. कहने का तात्पर्य यह कि उन्हें दिन भर बस एक ही बात की फिक्र लगी रहती है कि वे खूबसूरत दिख रहे हैं या नहीं. वे दूसरों से हमेशा यह उम्मीद करते हैं कि वे जब भी उनसे मिले, उनकी खूबसूरती का ही बखान करें. अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें लगता है कि जरूर ‘उसमें’ कोई समस्या है. ये सारे लक्षण बॉडी डिसमॉर्फिक डिसऑर्डर यानि शारीरिक कुरूपता विकार के हैं.

ऐसे लोगों के मन-मस्तिष्क पर उनकी यह चाह इस कदर हावी होती है कि इससे उनके दिन-प्रतिदिन का जीवन और कार्य भी कुप्रभावित होने लगता है.

क्या हैं लक्षण? 

– हमेशा यह महसूस करना कि ‘मैं खूबसूरत नहीं हूं.’

– अपनी बनावट की लगातार दूसरों से तुलना करना। 

– लोगों से हमेशा अपनी खूबसूरती के बारे में राय लेते रहना. 

– हमेशा इस आशंका से ग्रसित रहना कि लोग आपकी शारीरिक बनावटत एवं रंग-रूप के बारे में ही बात कर रहे हैं. 

– बार – बार शीशा देखना या कई बार शीशा देखने से बचना. 

– खुद को खूबसूरत दिखाने के लिए अधिक से अधिक कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल करना. 

– सामाजिक अवसरों अथवा लोगों के मेलजोल से दूर भागना. 

–  बार-बार कपड़े बदलना आदि. 

 

क्या है कारण? 

– दिमागी संरचना में असामान्यता.

– न्यूरोकेमिस्ट्री की अहम भूमिका

– कुछ शोधों में बीडीडी के लिए आनुवांशिक कारकों को भी जिम्मेदार माना गया है. 

– वातावरणीय कारक.

– व्यक्तिगत अनुभव

– सांस्कृतिक प्रभाव 

– कई बार बचपन में किसी तरह का दुव्यर्वहार या शोषण भी किशोरावस्था में इस बीमारी को पैदा कर देता है.

प्रभाव
इस बीमारी को नज़रअंदाज करने से व्यक्ति अवसाद में जा सकता है. कई बार वह आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेता है. इसके अलावा बीडीडी की समस्या से जूझ रहे लोगों में ओसीडी, ईटिंग डिसऑर्डर हो सकता है, ड्रग एडिक्शन जैसी बीमारियों के लक्षण भी विकसित हो सकते हैं.

उपचार

बीडीडी के उपचार में introspective Cognitive Behavioural Therapy  (सीबीटी) बेहद प्रभावशाली है. कई बार समस्या के गंभीर होने की स्थिति में दवाओं का भी उपयोग भी किया जाता है, जबकि आरंभिक स्तर पर ही ऐसे मरीजों को अगर उनके परिवार और करीबियों का सहयोग मिले, तो समस्या को गंभीर होने से बचाया जा सकता है.

This Post Has 3 Comments

  1. ज्ञान वर्धक लेख है । उपचार कुछ और बताए होते तो लेख अधिक प्रभावशाली होता।

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