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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चुनौती देते हुए वामपंथी कम्युनिस्ट पार्टी एवं अन्य राजनैतिक पार्टियों के संरक्षण में सरेआम नक्सलवादी हिंसक गतिविधियां चला रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भाजपा के काफिले पर नक्सलियों ने जोरदार हमला किया, जिसमें भाजपा विधायक सहित 5 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। आए दिन नक्सलवादी हमलों का लाल आतंक खून की होली खेल रहा है। बावजूद इसके इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाए राज्य सरकार का नरम रूख अपनाना(किसका?) कई प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। समय आ गया है कि आतंरिक सुरक्षा मामले में गृह मंत्रालय नए सिरे से ठोस रणनीति के साथ एक्शन प्लान तैयार करे और उसके अनुरूप कड़ी कार्रवाई करे। कश्मीर में आतंकवादियों का सहयोग करनेवाले अलगाववादी नेताओं के खिलाफ जिस तरह केंद्र सरकार कार्रवाई कर रही है, उसी तर्ज पर लाल आतंक को शह देने वाली वामपंथी कम्युनिस्ट पार्टी के विरुद्ध सरकार सख्त कार्रवाई करेगी? क्या लाल आतंक का खात्मा करने की इच्छाशक्ति राजनीतिक पार्टियों में है? अपनी बेबाक राय दे ……

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