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सारी चमक हमारे पसीने की है जनाब
बिरसे में हमको कोई भी जेवर नहीं मिला
घर से हमारी आंख-मिचौली रही सदा
आंगन नहीं मिला तो कभी दर नही मिला।
हम लड़ रहे हैं रात से, लेकिन उजालों पर
होगा तुम्हारा नाम ये मालूम है मुझे
जब तक हरा भरा हूं उसी रोज तक हैं बस
सारे दुआ सलाम ये मालूम है मुझे।
शायरी है सरमाया खुशनसीब लोगों का
बांस की हरेक टहनी बांसुरी नहीं होती
 
-हस्तीमल हस्ती
 

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