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राधा के मनमीत सुनाकर गीत मधुर मुस्काये।
वो मीरा के कृष्ण दीवाने श्याम बहुत मनभाये।
वो मोहन घनश्याम पुकारु नाम नैन मेरे छाये।
शोभित तेरे अंग हैं खिलते रंग बहुत मनभाये।
वो जमुना के तीर बहकते नीर राग में अपने गाये।
गोपी के संग रास,मृदुल उपहास बहुत मनभाये।
गौ ग्वालों के संग बजे मृदंग श्याम को बड़े सुहाये।
ग्वाल बाल के संग राग में रंग बहुत मनभाये।
मुरली की स्वर तान पड़े हैं कान राधिका आये।
राधे संग गोपाल मिले जब ताल बहुत मनभाये।
घुंघराले हैं केश पीत है वेश श्याम छवि भाये।
देख अनोखा ढंग सांवला रंग बहुत मन भाये।
-प्रज्ञा तिवारी

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