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जानेकैसेहोगए,शहर-गलीऔरगांव।
छोटी-छोटीबातपर,लगेदांवपरदांव॥
दिखारहेहैंभविष्यकेवेसपनेअविराम।
भूखमांगतीहैयहां,हरपरएकविराम॥
रोटीतककोहोरहे,यहांरोजसंग्राम।
इंकलाबकेशोरमें,होताजगनीलाम।
सुविधाओंकेलोभमें,बबुआहैफिरमौन।
रमुआफिरभीचीखता,सुनताउसकीकौन॥
मुद्दतसेहमजागते,सारी-सारीरात।
मिलानहींफिरभीहमें,अभीतलकसुप्रभात॥
पनिहारिनसेहोगए,दिवस-माहऔरवर्ष।
चलाचलीकेदौरमें,कोईनहींउत्कर्ष॥
सुलग-सुलगकररहगए,सबकेसबजज्बात।
मिलीनहींलेकिनहमें,कभीकोईसौगात॥
अलसायीसीमोरहै,थकियारीसीसांझ।
कहनेकोकुछहैनहीं,जैसेकिस्मतबांझ।
जानेकितनीबारहम,गएतुम्हारेगांव।
हमेंनहींपरमिलसकी,कभीतुम्हारीछांव॥
आखिरकैसेहोएंगे,हमअमूर्तसेमूर्त।
पासहमारेहैनहीं,मैयाकोईसूत्र॥
जिनपरहमकोथाकभी,बहुतबड़ाअभिमान।
उनकोहमलगनेलगे,जानेक्योंअनजान॥
हुड़क-हुड़ककरतुमहमें,अबभीआतेयाद।
सुनीनहींतुमनेमगर,कभीकोईफरियाद॥
भैयाबड़ेविचित्रहैं,वसुधाकेहालात।
सबकेसबहैंसोचते,लगेकहांकबघात॥
कालचक्रनेवेधदिए,रीति-नीति-व्यवहार।
अर्थहीनसेहोगए,मानक-मूल्य-विचार॥
आखिरभैय्याहोयेंगे,कबतकलोगहलाल।
देश तरक्की कर रहा,मिटते नहीं सवाल॥
खुदगर्जोंकेहाथमें,आयासारातंत्र।
सबकेसबफूंकते,निजउन्नतिकेमंत्र॥
सबकरचुकनेकेबादभी,फेलहुईसरकार।
आखिरकैसेहोयेगा,मेरेभारतकाउद्धार॥
प्रजातंत्रनेखोदिए,अपनेसारेअर्थ।
विद्रूपोंकीभीड़में,कथ्यहुएसबव्यर्थ॥
धीरे-धीरेमिटगए,सबकेसबविश्वास।
हमकलपेथेरोयेभी,कोईनहींथापास॥
पावसनेजबघेरलिया,इंच-इंचआकाश।
साथहमारेहोलिए,दहकेहुएपलाश॥

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