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कहा चला चली पिया मेला देखइ, लगल बा हो अयोध्या नगरिया मा।
मिलि जइहें हो राम लक्ष्मण संघे, माई अञ्जनी के लाला डगरिया मा॥
ढ़ोलक नगाड़ा बजइ मन भावइ, श्रीराम धुन हां जिया हरषावइ।
श्रीराम चरित मानस की रगिया, बाबा तुलसी भोरवै मा गांवइ।
सुना सुनि जाई पिया अमृत वचन, बहइ धारा सुहानी बयरिया मा।
मिलि जइहें हो राम लक्ष्मण संघे, माई अञ्जनी के लाला डगरिया मा॥
बाल-रूप चारो भइयन के, दशरथ अंगनवा बड़ा नीक लागे।
कौशिल्या कैकेई माता सुमित्रा, हर्षित भईं भाग्य रघुकुल के जागे।
घोड़ा बने राजा दशरथ मगन राम, पुलकित हैं घोड़ा सवरिया मा।
मिलि जइहें हो राम लक्ष्मण संघे, माई अञ्जनी के लाला डगरिया मा॥
राघव भरत लक्ष्मण शत्रुघन की, पैजनिया बाजी मधुर ध्वनि आई।
बलिहारी जाए ठुमुकि चाल पे मन, संभलत गिरत फिर उठत मुस्काई।
करधनि पकड़ एक दूजे की खींचत, किलकारी गूंजे महलिया मा।
मिलि जइहें हो राम लक्ष्मण संघे, माई अञ्जनी के लाला डगरिया मा॥
शिव जी मदारी हैं बजरंग बानर, डमरू की डम-डम पे ठुमके लगाते।
गावत महादेव हरि बाल-लीला, भक्ती फली आज भगवन रिझा के।
श्रीराम अवदान बजरंग बली संग, खेलत हैं सजना दुवरिया मा।
मिलि जइहें हो राम लक्ष्मण संघे, माई अञ्जनी के लाला डगरिया मा॥
-अवदान शिवगढ़ी

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