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दीपावली पर दीप घर में, दीप कुछ ऐसे जलायें।
विश्व आलोकित हो उठे, दीप कुछ ऐसे जलायें॥
तेरा है ये, मेरा है ये, मेरा है, तेरा नहीं।
क्षुद्र बातों से परे हों, दीप कुछ ऐसे जलायें॥
बदल रहा क्यों, आज मानव दानवों की भीड़ में,
त्यागें मद, पशु-व्रत्तियों को, दीप कुछ ऐसे जलायें॥
-डॉ.दिनेश पाठक ‘शशि’

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