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भारत मां के आभूषणों में
 
कई विराजे हैं रतन
लेकिन सब में तुम ‘अटल’ हो
बहू-पटल अनमोल रतन.
 
भारत मां को है समर्पित
तुम्हारा तन-मन और ये धन
जीवन भर है किया आपने
चरित निर्मल है जतन.
वक्तृत्व आपका वज्र और है
काव्य प्रतिभा की धारा,
जन-जन के मन पर छाया है
प्रभाव हर पल है नूतन.
 
राष्ट्रभक्ति और विश्वबंधुता
ध्येयमंत्र से खिला चमन,
तुम से सम्मानित
लोकतंत्र और राजसदन
दीपस्तंभ हो तुम हमारे
शतायुषी हो तुम्हरा जीवन
आदर्शों का तेज साथ ले
बने हमारा पथ संजीवन.
 
भारत वर्ष के तुम अटलजी
तेजोमय हो ‘भारत रतन’
नाज करता रहा तुम पर
 
भारतवासी और ये वतन.
 
               – गौतम सूर्यवंशी

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