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मुस्लिम महिलाओं को भी मस्जिद में जाने एवं प्रार्थना करने का अधिकार मिले, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश से रोकना गैरकानूनी एवं गैर संवैधानिक है और यह मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करता है। बता दें कि लंबे समय से मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में जाकर प्रार्थना करने की मांग करती रहीं हैं। बावजूद इसके, मुल्ले-मौलवी ईस्लाम के रीतीरिवाजों का हवाला देकर महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश से रोकते रहे हैं। जिस तरह हिंदू महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में कई विरोधों और बवाल मचाने के पश्चात प्रवेश की अनुमति प्रदान की गई, उसी तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश और प्रार्थना करने का अधिकार दिला पाएगा? क्या मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में प्रवेश कर पाएंगी? क्या उनको उनका अधिकार मिलना चाहिए ? अपनी बेबाक राय दे…

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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