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लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में ही चुनाव में धांधली, बुथ कॅप्चरिंग का मामला प्रकाश में आया है। देश के कई हिस्सों में चुनाव को प्रभावित करने हेतु पद,पावर,पैसा,प्रभाव,हिंसा,हमला,धमकी,दबाव,आंदोलन और अन्य कई प्रकार के हथकंडे राजनीतिक पार्टिया अपना रही है। पहले चरण के चुनाव के दौरान युपी के कैराना में लोगों की भीड़ बिना वैध पहचान पत्र के जर्बदस्ती वोट करने मतदान केंद्र में जा रही थी, उन्हे रोकने के लिए बीएसएफ जवानों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंसा और मतदाताओं की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरे चरण के चुनाव के दौरान एक न्युज चैनल ने बंगाल के रायगंज जिला स्थित एक गांव में कट्टर मुस्लमानों द्वारा हिंदुओं को मतदान से रोकने का मामला प्रकाश में लाया है।कुछ लोगों ने बताया कि जब हम वोट करने मतदान केंद्र गए तब पता चला कि उनके नाम पर किसी और ने पहले ही मतदान कर दिया है। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इस तरह के अपराधिक कृत्य सबसे अधिक पाए जा रहे है। बुर्के की आड़ में फर्जी मतदान करने की खबरे भी सामने आई है। बुर्का पहनकर आए पुरुषों को भी मतदान केंद्रों से पकड़ा गया है । कहीं किसी ने एवीएम मशीन तोड़ दी तो कहीं किसी ने हिंसा,आतंक के सहारे मतदाताओं को डराकर अपने पक्ष में वोट डलवाने का प्रयास किया। राष्ट्रीय स्तर से एकस्वर में यह मांग उठ रही है कि स्वतंत्र,निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान कराने हेतु चुनाव आयोग सभी संवेदनशील क्षेत्रों के मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करे। स्थानीय राज्य पुलिस की मिलीभगत से चुनाव को प्रभावित करने का अंदेशा जताया जा रहा है, इसलिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती में निष्पक्ष चुनाव कराया जाए। क्या चुनाव आयोग सुरक्षित माहौल में निष्पक्ष चुनाव करा पायेंगा? क्या बुथ कॅप्चरिंग रोकने और मतदाताओं की सुरक्षा करने में सक्षम है चुनाव आयोग? क्या बुथ कॅप्चरिंग हुए क्षेत्रों में फिर से चुनाव कराया जाना चाहिए? अपनी बेबाक राय दे …

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