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देश में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहनेवाली कांग्रेस पार्टी के भावी प्रधानमंत्री प्रत्याशी राहुल गांधी की बचकानी मजाकिया हरकत से पूरा देश हतप्रभ है।राहुल गांधी ने बिना किसी सबूत के ही ‘चौकीदार चोर है’ का झूठा शोर मचाया हुआ था।जिसकी देखादेखी करते हुए सारे कांग्रेसियों ने भी राहुल गांधी के स्वर में स्वर मिलाकर झूठ का डंका पूरे देश में पीटना शुरू कर दिया।इस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जवाब तलब करने पर राहुल गांधी ने लिखित रूप से कहा कि राजनैतिक प्रचार के आवेश में आकर मैंने उक्त बातें कहीं है।जिसका मुझे खेद है और इसके लिए मैं माफी मांगता हूं।बहुमत से सरकार बनाने वाले लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ऐसे बिना तथ्य के झूठे आरोप लगाना और उन्हें बदनाम करना क्या विपक्षी पार्टी कांग्रेस को शोभा देता है ? क्या इससे कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा और राहुल गांधी के राजनीतिक परिपक्वता पर प्रश्नचिन्ह नहीं खड़े होते ? राहुल गांधी का अपने ही बयान से पलट जाना जनता के साथ धोखा नही तो और क्या है ? भोलीभाली गरीब जनता को हर वर्ष 72 हजार रुपये देने की घोषणा करनेवाले राहुल गांधी कल अपने इसी बात से फिर मुकर जाए तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। क्या देश की जनता सरेआम झूठ बोलने वाले नेताओं पर विश्वास करेंगी ? अब जनता को तय करना है कि गुमराह करने वाले राजनैतिक पार्टियों को कैसे सबक सिखाना है।राफेल मुद्दे को विवादित बनाना और चौकीदार चोर है, इस झूठ पर माफी मांग कर इतिश्री कर देना क्या राहुल गांधी के मानसिक दिवालियापन का द्योतक है ? खबर आई है कि माफी मांगने के बाद अमेठी में फिर एक बार ‘चौकीदार चोर है’ के नारे राहुल गांधी ने लगवाए है।बारम्बार सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने वाले राहुल गांधी के खिलाफ क्या सुप्रीम कोर्ट सख्त रुख अख्तियार करेगा ? अपनी बेबाक राय दे 

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