हिंदी विवेक : we work for better world...
मुंबई – विगत १० दिसम्बर को मुंबई के यशवंत भवन में हिंदी विवेक की दो सत्रीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसमें महाराष्ट्र राज्य के विभिन्न तहसीलों के साथ ही देश के तमाम शहरों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
 
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विपणन विभाग के प्रमुख प्रशांत मानकुमरे ने प्रतिनिधियों के समक्ष संस्था के सभी विभागों के सदस्यों का परिचय दिया जबकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर ने हिंदी विवेक के अब तक के प्रशासनिक प्रयासों तथा चुनौतियों और उपलब्धियों की चर्चा की. कार्यकारी संपादक पल्लवी अनवेकर ने पत्रिका के अब तक के प्रमुख विशेषांकों का विस्तार से परिचय दिया तथा आगामी फरवरी और मार्च माह में प्रकाशित होने जा रहे ‘पर्यावरण विशेषांक’ एवं ‘सेवा विशेषांक’ की प्रकाशन सामग्री पर प्रकाश डाला. सत्र के अंतिम चरण में मुंबई, महाराष्ट्र की ग्रामीण तहसीलों, मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से पधारे प्रतिनिधियों ने अपने परिचय के साथ ही अपने मंतव्य भी रखे. कई प्रतिनिधियों ने तमाम सकारात्मक सुझाव दिए जिस पर उन्हें संस्था की ओर से आश्वस्त किया गया कि हिंदी विवेक कोर कमेटी उन सारे मुद्दों पर अवश्य विचार कर सकारात्मक प्रयास करेगी.
 
द्वितीय सत्र में पत्रिका की भविष्य की योजनाओं तथा विज्ञापन जैसे मुद्दों पर खुली चर्चा हुई. प्रतिनिधियों को पंजीकरण बढ़ाने तथा विज्ञापन प्राप्त करने के सहज-सरल तरीके बताए तथा उन्हें अनुप्रेरित किया कि वे ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन सहयोग देकर पत्रिका की अनवरत यात्रा को और सुगम बनाने में सहयोग करें. अंत में लेखा विभाग के प्रमुख दत्तात्रेय शेडगे ने प्रतिनिधियों को दिए जाने वाले किट की जानकारी दी. कार्यक्रम में गुरुराज कुलकर्णी (रायगड़), राजेश अग्रवाल (रांची), देबू दास (कोलकाता), क्षेमचंद यदुवंशी (मथुरा), जगन्नाथ म्हात्रे (भाईंदर), विलास मिस्त्री (नालासोपारा), अमोल दामले (इंदौर), दत्तात्रय ताम्हणकर (सोलापुर), नरोत्तम पटेल (नंदुरबार), शिरीष सोनवणे (मालेगांव) सहित सभी प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए.
 
श्री वनमाली सप्रे जी का प्रेरणादायी कार्य
 
मुंबई : ‘हिंदी विवेक’ द्वारा आलोकित राष्ट्रवादी प्रखरता को धार देने में सहयोग करने हेतु हमारे जबलपुर के शुभचिंतक श्री वनमाली दा. सप्रेजी ने दस हजार रुपए का चेक प्रेषित किया है. संस्था उस चेक से प्राप्त धन का उपयोग विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा सार्वजनिक वाचनालयों के पंजीकरण के रूप में करेगी. आप सभी सुधी पाठकों से आग्रह है कि ‘हिंदी विवेक’ के आर्थिक सुदृढ़ीकरण हेतु मुक्त हस्त से अपना योगदान दें तथा पत्रिका की सफलता के मार्ग को और सुगम बनाएं. आप अपना धनादेश ’हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था- हिंदी विवेक‘ के नाम से प्रेषित कर सहयोग दे सकते हैं.

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