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पश्चिम बंगाल में तीसरे चरण के चुनाव के दोैरान फिर से हिंसा द्वारा मतदाताओं को डराया धमकाया गया और चुनाव  को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। इसके पूर्व पहले व दूसरे चरण के चुनाव के दौरान भी इसी तरह  का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया था। ममता बनर्जी के राज में उनके ही टीएमसी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता सबसे अधिक हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं। चुनाव आयोग अब तक वहां की कुछ संवेदनशील सीटों पर सुरक्षित माहौल में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने में विफल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मुस्लिम बहुल एवं अन्य संवेदनशील सीटों पर कुछ लोगों द्वारा हिंदुओं को मतदान करने से रोका गया और जो कोई मतदान केंद्र पहुंच पाया,उसके नाम पर पहले ही मतदान हो चुका था। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियों वायरल हुए हैं, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे मतदान केंद्र के अंदर मौजूद रहकर नेताओं द्वारा अपने पक्ष में मतदान कराया जा रहा था। हिंसा,धमकी और डर के साए में हो रहे बंगाल चुनाव में चुनाव आयोग भी लाचार दिखाई दे रहा है तथा सुरक्षा हेतु तैनात सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर बाजी हो रही है। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आतंकवादियों के हथियार आयइडी से अधिक ताकतवर वोटर आयडी है। इसका सदुपयोग करे और निर्णायक सरकार बनाने में अपना महत्वपुर्ण योगदान दें।बहरहाल प.बंगाल में हिंसा से प्रभावित हुए कुछ सीटों पर क्या फिर से मतदान (चुनाव) कराया जाना चाहिए ?अपनी बेबाक राय दे 

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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