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बाबा बाबा बचाओ की चीख सुनकर मैं कम्प्यूटर पर काम करना छोड़कर नीचे दौड़ पड़ा. सीढ़ियां उतरते उतरते मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई थी. नीचे जाकर मैं सक्षम के पास पहुंचा तो मुझे देखते ही वह दौड़कर मुझसे चिपक गया, “बाबा बाबा मुझे बचा लो.” उसकी आंखों में भय मिश्रित निरीहता टपक रही थी और वह थर थर कांपते हुए मुझसे चिपका जा रहा था. सामने रौद्ररूप धारण किए निशा हाथ में पकड़ी डण्डी को लपलपा रही थी.
क्या हुआ बेटी इस बच्चे को इस तरह क्यों पीट रही हो? क्या गलती कर दी इसने? मैंने सक्षम की मम्मी निशा की ओर देखा तो उसने हाथ की डण्डी को सक्षम की ओर लहराते हुए क्रोध से फुंकारते हुए कहा, “इसी से पूछ लो पापा जी क्या गलती की है”
अब मैंने सक्षम को अपने आप से लिपटाते हुए और अपने सीधे हाथ से उसके सिर को सहलाते हुए उसके चेहरे की ओर देखा, “हाँ बेटू आप ही बताओ क्या गलती की है आपने.”
आंखों से आंसू बहाते हुए सक्षम ने ऊपर को नजर उठाई, ‘’बाबा मैं क्लास वर्क करके नहीं ला पाया.’’
“अरे रे! क्लास वर्क करके क्यों नहीं लाया मेरा बेटा. ये तो बहुत बुरी बात हो गई क्यों.” सक्षम के सिर पर हाथ फेरते हुए मैंने पूछा तो सक्षम ने कोई उत्तर नहीं दिया तो मैंने एक बार फिर से अपना प्रश्न दोहराया सक्षम फिर भी मौन रहा तो उसकी मम्मी चीख पड़ी. “अब आप ही देख लीजिए पापाजी इसने मुझे परेशान करके रख दिया है. एक भी दिन स्कूल का काम पूरा करके नहीं लाता. पूछो तो कोई न कोई बहाना बना देता है, अब मैं कब तक दूसरे बच्चों की कापियां मांग मांग कर इसका क्लास वर्क पूरा कराऊं. इसने तो मेरी नाक में दम करके रख दिया है.” निशा लगातार बोले जा रही थी और सक्षम सहमा सा निरीहता से मेरे चेहरे की ओर देखे जा रहा था जिसे देखकर मेरा हृदय पसीज रहा था
मैं ऐसे में अपने आप को बड़ी दुविधा की स्थिति में पा रहा था. सक्षम के साथ निशा कितनी मेहनत करती है, मुझे सब पता था. सुबह जागने से लेकर रात सोने तक वह सक्षम को एक मेधावी छात्र बनाने की पुरजोर कोशिश में लगी रहती है फिर भी सक्षम को अपने अनुरूप चलता न देखकर वह खीज उठती है. खीज जब सीमा से पार हो जाती है तो फिर वह थप्पड़ घूंसा और डण्डी से बेरहमी के साथ सक्षम की पिटाई करना शुरू कर देती है, आज भी वही हुआ. आज उसका ये रौद्ररूप देखकर मैं भी सहम गया .
मैंने शान्तिपूर्वक उससे कहा, “देख बेटी तेरी इतनी मेहनत करने और बार बार कहने के बावजूद सक्षम तेरे अनुरूप नहीं चल पा रहा तो कुछ तो गड़बड़ जरूर है.” “कुछ गड़बड़ नहीं है पापाजी. ये पढ़ाई में ध्यान ही नहीं लगाता. दुनियाभर की बातें बनाने में तो सबसे आगे रहता है पर क्लास में क्या पढ़ाया लिखाया जा रहा है इसकी ओर ध्यान ही नहीं देता . सभी टीचर्स के शिकायत भरे फोन सुन सुन कर मैं तो अब थक चुकी हूं पापाजी. आप छोड़ दीजिए इसे. मैं आज इसकी हड्डी पसली तोड़कर ही मानूंगी,” कहकर निशा ने हाथ में पकड़ी डण्डी को सक्षम की ओर लहराया तो वह डरकर मेरे शरीर से और ज्यादा सट गया.
सक्षम की कुशाग्रबुद्धि और वाक्पटुता से भी मैं खूब अच्छी तरह परिचित हूं आठ वर्ष का बच्चा जिस कुशलता से कम्प्यूटर लैपटाप एवं मोबाइल के सारे फंक्शन्स जानता है और उनपर काम भी कर लेता है इतना ही नहीं कैसिओ गिटार और हारमोनियम बजा लेने के साथ साथ अपनी मम्मी के साथ मधुर आवाज में फिल्मी गीतों को भी गाकर मुझे आश्चर्य चकित कर देता है पर क्लास वर्क के लिए इस तरह राज रोज अपनी मम्मी से मार खाना, उसका ये व्यवहार मुझे सोचने पर विवश कर देता है
मैंने निशा को समझाया, “बेटी सक्षम का स्कूल वर्क आदि करके न लाना मेरी भी समझ में नहीं आ रहा है. इतना होशियार बच्चा क्यों ऐसा कर रहा है? कोई बात तो जरूर है इसके साथ. क्यों न कल इसके स्कूल जाकर पता किया जाय. शायद कुछ हल निकले.”
“कोई बात नहीं है पापाजी! ये दुनियाभर की बातों में लगा रहता है, पढ़ाई में ध्यान केन्द्रित नहीं करता. पढ़ते समय इसके दिमाग में दुनियाभर की बात घूमती रहती है.”
“यही तो मैं भी कह रहा हूं बेटी कि पढ़ाई में इसका ध्यान केन्द्रित क्यों नहीं होता, इसका पता लगाना जरूरी है. अच्छा ऐसा करो दो दिन बाद इतवार को मुरादाबाद से मेरे मित्र डाण्राकेश चक्र आ रहे हैं. वे योग व एक्यूप्रेशर के विषेशज्ञ हैं. बहुत सारे स्कूलों में जाकर वे विद्यार्थियों की अनेक समस्याओं को हल कर चुके हैं. क्यों न हम उनसे सक्षम के बारे में सलाह लें.”
“ठीक है पापाजी, मैं तो अब चीखते चीखते थक चुकी हूं,” कहकर निशा ने जैसे अपनी हार मान ली.
डाण्राकेश चक्र के आते ही सक्षम उनसे लिपट गया जैसे उन्हें बहुत वर्षों से जानता हो. निशा ने चाय सर्व करते हुए डाण्राकेश चक्र से सक्षम द्वारा स्कूल वर्क आदि करके न लाने व पढ़ाई में ध्यान केन्द्रित न करने के सम्बन्ध में शिकायत की तो उन्होंने अपने बैग से एक्यूपै्रशर जिमी निकाली और सक्षम के हाथ पैर के कुछ बिन्दुओं पर दबा दबा कर देखने लगे दोनों हथेलियों व दोनों पैरों के तलबों के बीचोबीच ऊर्जा केन्द्रों पर जिमी से दबाते ही सक्षम दर्द से उछल पड़ा साथ ही चारों हाथ पैर के अंगूठों के अग्रभाग में यानि मस्तिष्क बिन्दुओं पर दबाने पर भी उसने दर्द महसूस किया तो डाण्राकेश चक्र समझ गये कि समस्या कहां है और क्या है. उन्होंने समझाया कि जब भी किसी का ऊर्जा केन्द्र शिथिल हो जाता है, वजन बढ़ने लगता है और मस्तिष्क में विकार उत्पन्न होने लगते हैं तो ऐसी स्थिति में बच्चे का ध्यान एक जगह केन्द्रित नहीं हो पाता है. वह आलतू फालतू बातों में भटकना शुरू हो जाता है. ऐसा ही सक्षम के साथ हो रहा है. बच्चा बहुत होशियार है ऐसे बच्चों की मारने पीटने से समस्या बिल्कुल भी हल नहीं होती.
डाण्राकेश चक्र की बात सुनकर निशा तो घबरा ही गई, “ क्या कह रहे हैं अंकल, फिर क्या उपाय है इसका ?”
“इसका और इसके जैसे अनेक बच्चों का भी एकमात्र उपाय ये है कि इन्हें मारने पीटने व इन पर चीखने चिल्लाने की बजाय हथेलियों व पैर के तलवों के बीचोबीच स्थिति इनके ऊर्जा केन्द्रों व हाथ पैर के चारों अंगूठों के अग्रभाग में स्थित मस्तिष्क केन्द्रों के बिन्दुओं को नियमित १५ से २० दिन तक सहानुभूतिपूर्वक धैर्य के साथ ऐक्यूप्रेशर यंत्र जिमी से या हाथ के अंगूठे से धीरे धीरे दबाया जाय. एक महीने में ही इसका ध्यान पढ़ाई में इतना केन्द्रित हो जायेगा कि फिर किसी शिकायत का मौका ही नहीं मिलेगा.”
“देखती हूं अंकल,” कहते हुए निशा किचिन में घुस गई और दोपहर का भोजन बनाने लगी. डायनिंग टेबिल पर सभी का भोजन लगाने के बाद उसने सबसे भोजन करने का आग्रह किया तो सक्षम अपने भोजन की प्लेट उठाकर बैडरूम में चला गया और भोजन करते करते टीवी पर कार्टून देखने लगा. डाण्राकेश चक्र ने देखा तो आवाज लगाई, “बेटा भोजन करते समय टीवी नहीं देखते.”
“लेकिन बाबा, मम्मी तो भोजन करते समय रोजाना ही टीवी सीरियल देखती हैं.” सक्षम की बात सुनकर निशा ने उसकी ओर आंख तरेरी तो डाण्राकेश चक्र बीच में ही बोल पड़े, “बेटी, बच्चा वही करता है जो वह बड़ों से सीखता है. उन्हें करते देखता है इसलिए बच्चों वाले घरों में बड़ों को भी अपना व्यवहार सौम्य शालीन और सही रखना जरूरी है तभी वे बच्चे की शिकायत के हकदार हैं.”
सॉरी अंकल आगे से ध्यान रखूंगी निशा ने माफी मांगते हुए कहा तो सक्षम भी बोल पड़ाए ठीक है मम्मी आगे से मैं भी ध्यान रखूंगा कहते हुए टीवी बन्द करके अपने भोजन की थाली उठाकर वह भी सबके बीच डायनिंग टेबिल पर आ बैठा .

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