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सीजेआई रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद से पूरी कानूनी प्रक्रिया ही कटघरे में आ गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब कानून सबके लिए समान होता हैं तब सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए विशेष सुविधा क्यों दी जा रहीं हैं ? यौन शोषण का आरोप लगते ही सर्वप्रथम मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया जाता हैं फिर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती हैं ना कि शिकायतकर्ता के आरोपों की जांच की जाती हैं। एक कहावत मशहूर हैं कि “कानून से बड़ा कोई नही होता” लेकिन इस मामले से स्पष्ट होता हैं कि कानून से बड़ा भी होता हैं। कानून सभी के लिए समान नही हैं, कानून के साथ भेदभाव भी होता हैं और आम आदमी के लिए बहुत ही सख्त तथा विशिष्ट लोगों के लिए कानून लचीला होता हैं। आखिर क्या कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के जज इस मामले में काफी हो-हल्ला मचा रहे हैं और आग बबूला हो रहे हैं।कहीं चोर के दाढ़ी में तिनका तो नहीं ? यदि आरोप लगे हैं तो निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच होने दीजिए, इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी एक महिला ने सीजेआई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया हैं।गौरतलब हैं कि बेंच फिक्सिंग, भ्रष्टाचार आदि आरोप न्यायालयों पर लगते रहें हैं।क्या सीजेआई रंजन गोगोई पर लगें आरोपों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए ? अपनी बेबाक राय दे 

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