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जीने का जितना अधिकार मानव को है, उतना ही तमाम जीवों को है। हमें इस बात को ध्यान में रखकर जीवरक्षा करनी है। भारतमाता को बचाने के लिए हमें जीवमात्र की रक्षा करनी ही होगी। उक्त बातें केंद्रीय परिवहन, शिपिंग, केमिकल – फर्टिलाइजर मंत्री मनसुखभाई मांडविया ने समस्त महाजन द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय जीवदया प्रेमी सम्मेलन के समापन समारोह में जीवदया के कार्य करने वाली अनेक संस्थाओं, पांजरापोल, तथा अन्य संस्थाओं के सम्मान एवं अनुदान दिए जाने के दौरान कही।
 

सनद रहे २२ दिसम्बर से २४ दिसम्बर तक चलने वाले कार्यक्रम के की शुरुआत मणिलक्ष्मी तीर्थ से हुई। वहां से सभी सदस्य जीवदया संस्था द्वारा किए गए मेहनत के कारण बंजर जमीन से हरित व श्यामला बन चुके धर्मज गांव पहुंचे जहां पर गांव के राजेशभाई पटेल ने पिछले चार दशकों में गांव की कायापलट के लम्बे सफर का ब्यौरा दिया। गौसेवा, जीवदया प्रकृति सेवा से धर्मज आर्थिक प्रगति, प्रदूषण और अपराधों से मुक्ति पा चुका है। उसी दिन उत्तारार्ध में धोलेरा के पीपली गांव स्थित गोकुलधाम की भी जानकारी ली गई।

 

कार्यक्रम के दूसरे दिन अहमदाबाद के ओगणज में आए जैन तीर्थ पर परिसंवाद हुआ। दोपहर के पश् ‍ चात सभी लोग अहमदाबाद की बंशी गोर गौशाला में गए जो कि केंद्र सरकार द्वारा सर्वोत्कृष्ट गौशाला के रूप में सम्मानित है। सम्मेलन के अंतिम दिन भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्रसिंह चूड़ासमा बालवीर फेम देव जोशी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत मे ंसंस्था के अध्यक्ष गिरीशभाई शहा ने आयोजन की सफलता और उपयोगिता के बारे में संतोष जताया।

 

कार्यक्रम में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के चेयरमैन एस . पी . गुप्ता, उनकी धर्मपत्नी शशि गुप्ता, गुजरात गौसेवा और गौचर विकास बोर्ड के चेयरमैन वल्लभभाई कथीरिया, सेबी के सलाहकार सुनीलभाई शर्मा, उत्तर प्रदेश गौसेवा और गौचर आयोग के महासचिव प्रतीक सिंह सहित ४०० से अधिक संस्थाओं के ६६५ प्रतिनिधियों के अलावा तमाम जीवदया प्रेमी उपस्थित रहे।

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