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कुछ समय पूर्व बीबीसी द्वारा अपने लोनलीनेस एक्सपेरिमेंट के तहत किये गये एक सर्वे में यह बात सामने आयी है कि अन्य उम्र के मुकाबले 16  से 24 वर्ष के बीच के बच्चे सबसे ज्यादा अकेलापन फील करते हैं. इस सर्वे में करीब 55 हजार से अधिक लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें से 16 से 24 आयुवर्ग के करीब 40 फीसदी लोगों ने बताया कि वे अक्सर ही खुद को अकेला महसूस करते हैं. इससे पहले वर्ष 2015  और 2017 में क्रमश: इडेन प्रोजेक्ट और ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के तहत किये गये राष्ट्रीय सर्वे में भी लगभग समान परिणाम पाये गये थे.

आमतौर से अकेलेपन की समस्या बुजुर्गों को झेलनी पड़ती है, जिसकी कई वजहें हो सकती हैं, जैसे कि- जीवनसाथी का बिछुड़ना, शारीरिक असमर्थता, अपने से छोटों से मिली उपेक्षा, सामाजिक कटाव आदि.

लेकिन युवाओं के जीवन में ऐसी कोई वजह नहीं होती है. वे घर-परिवार, दोस्तों और तमाम तरह के मनोरंजक साधनों से घिरे होने के बावजूद खुद को अकेला महसूस कर सकते हैं. इससे पता चलता है कि युवाओं में अकेलापन महसूस करने की मुख्य वजह उनके द्वारा दूसरों के साथ खुद को कनेक्ट न कर पाना होता है. वे उम्र के जिस पड़ाव में होते हैं, उन्हें आये दिन नयी-नयी अनुभूतियों से दो-चार होना पड़ता है. उन सबको लेकर उनके मन में तमाम तरह की जिज्ञासाएं होती हैं. 

हालांकि पूर्व की तुलना में आज के युवाओं के पास सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग, ऑनलाइन गेमिंग आदि कई सारे माध्यम हैं लोगों से कनेक्ट होने के, जिनका उपयोग करके वे मीलों दूर बैठे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के संपर्क में रह सकते हैं. एक सर्वे में यह भी पता चला है कि दुनिया भर में सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा उपयोग युवा ही करते हैं. इसके बावजूद वे अकेलेपन से जूझ रहे हैं, यह आश्चर्य की बात है.

 मनोवैज्ञानिकों की राय में, आज के दौर के युवा लोगों से फेस-टू-फेस बातचीत करने के बजाय आधुनिक तकनीकों के जरिये संपर्क में रहते हैं. यहां तक कि एक ही घर में रहनेवाले चार लोग में आपस में फोन या टेक्स्ट मैसेज के जरिये बातचीत करते हैं. इस ऑनलाइन संचार में वह लगाव, आत्मीयता या भावनात्मक अनुभूति शामिल नहीं होती, जो कि आमने-सामने के संचार में महसूस होती है.

अत: जितना हो सके, लोगों से आमने-सामने का संचार करने का प्रयास करें. इंटरनेट या सोशल मीडिया का उपयोग मात्र उन संबंधों को बनाये रखने या उनमें कुछ नयी जान डालने के लिए किया जाना चाहिए, जैसे कभी कोई भाई-बहन या दोस्त बचपन की पुरानी तस्वीर शेयर सकते हैं और बाकी लोग उन्हें याद करने के क्रम में अपने बचपन की गलियारों में भी घूम सकें.

 

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