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आए दिन माओवादी हमले सुरक्षा बलों को निशाना बना कर किए जाते रहे हैं। बीते कई दशकों से यह सिलसिला लगातार जारी है। जिसमें हमारे सैकड़ों जवान शहीद हो चुके है। महाराष्ट्र दिवस के दिन एक बार फिर घात लगाकर किए गए माओवादी हमले में 16 कमांडो शहीद हो गए। हर बार की तरह बारुदी सुरंग से विस्फोट कर वाहन को उडा दिया गया। बार-बार एक ही पैर्टन के माओवादी हमले होने के बावजूद उससे बचने और आक्रमण करने की रणनीति में सुधार व व्यापक बदलाव क्यों नहीं किया जाता? माओवादियों को हल्के में क्यों लिया जाता रहा है? आखिर क्या कारण है कि हिंसक माओवादियों के प्रति नरम रुख अपनाया जा रहा है। गृह मंत्रालय और सेना के रणनीतिकारों को इस पर मंथन करना होगा। अब समय आ गया है कि भारत अपनी शक्ति का परिचय दे और हिंसक माओवादियों का सर्मथन करने वाले अर्बन नक्सलियों सहित जड़-मूल से सफाया करें। क्या नए भारत की बात करने वाले प्रधानमंत्री मोदी का अगला टार्गेट माओवादी होंगे? अपनी बेबाक राय दें…

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