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तितलियां शराबियों की तरह लड़खड़ाते हुए उड़ती हैं। कभी आपने गौर किया है। उड़ती हैं तो लगता है एक पैर इधर पड़ रहा है तो दूसरा उधर, लड़खड़ाते-झूमते। जैसे कभी भी किसी से टकरा जाएंगी या शराबियों की तरह भहराकर गिर पड़ेंगी। लेकिन, असली हैरानी यह है कि इसी तरह लड़खड़ाते हुए पंखों से उड़ती हुई वे हजारों मील दूर तक की यात्रा कर लेती हैं। जी हां, तीन हजार मील दूर की भी।
किसी छोटे से कीट के लिए जिसकी उम्र मुश्किल से महीने-दो महीने की हो, उसके लिए तीन हजार किलोमीटर की यात्रा असंभव जैसी ही   मानी जाएगी। लेकिन, तितलियां ऐसा कर दिखाती हैं। अपने माइग्रेशन पैटर्न को लेकर मोनार्क तितलियां दुनिया भर में प्रसिद्ध रही हैं। वे मैक्सिको से लेकर कनाडा तक का सफर करती हैं। लेकिन, विशेषज्ञों ने एक ऐसी तितली का पता लगाया है, जिसने मोनार्क का रिकार्ड भी तोड़ दिया है।
कई अलग-अलग देशों के विशेषज्ञों ने 2014 से 2017 के दौरान जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर दावा किया है कि पेंटेड लेडी नाम की तितली अपने जीवन काल में सबसे ज्यादा दूरी तय   करती है। अफ्रीका के वर्षा वनों में इल्ली से प्यूपा और प्यूपा से तितली बनने के बाद वह तीन हजार मील की यात्रा तय करते हुए भूमध्यसागर के आसपास के देशों तक पहुंच जाती है। खास बात यह है कि इस दौरान यह तितली सहारा रेगिस्तान को भी पार करती है। यह दूरी तीन हजार मील से भी ज्यादा की है।
तिलती के माइग्रेशन पैटर्न का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों ने खास हाईड्रोजन आईसोटोप का सहारा लिया है। तितलियों के पंख पर उन जगहों की भूमि के चिह्न मौजूद होते हैं जहां पर उसने जन्म लिया है। वहां के पानी के भी चिह्न मौजूद होते हैं। इसी आधार पर विशेषज्ञ पता करते हैं कि उस तितली का जन्म कहां पर हुआ है।
तितलियां इतनी लंबी यात्रा करती कैसे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वे आकाश में मौजूद विंड करेंट के साथ-साथ तैरती हुई हजारों किलोमीटर दूर पहुंच जाती हैं। अफ्रीका से निकलकर वे महासागरों को भी पार कर लेती हैं। लेडी पेंटेड तितली भारत में भी तमाम जगहों पर पाई जाती है। लेकिन, वे कहां से आई हैं, इस पर अभी कोई खास शोध हुआ नहीं है।
लेडी पेटेंड आपने भी देखी जरूर होगी।

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