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काफी लंबे अरसे से संयुक्त राष्ट्र संघ में व्यापक सुधार की मांग हो रही है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत को यूएन का स्थायी सदस्य न बनाना और यूएन सुरक्षा परिषद में शामिल न करना संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्यप्रणाली व उसके औचित्य पर ही प्रश्नचिन्ह लगा रहा है तथा अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। इसीके मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ में फ्रांस ने कहा है कि भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान जैसे देशों को समसामयिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों के तौर पर शामिल करने की नितांत जरुरत है। बता दें कि यूएन में व्यापक सुधारों में देरी और योग्य प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण ब्रिक्स जैसे अनेक संगठन अस्तित्व में आए है। जो यूएन को चुनौति दे रहे है और यूएन की कार्यप्रणाली व निष्पक्ष न्याय के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यदि यूएन में जल्द आमूलचूल परिवर्तन नहीं किया गया तो इसका खामियाजा संयुक्त राष्ट्र संघ को भुगतना पड़ेगा और उसकी उपयोगिता धीरे-धीरे खत्म होती चली जाएगी। क्या 1 अरब 30 करोड़ की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत को उसका हक मिलेगा? अपनी बेबाक राय दें…

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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