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दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवाद अपने चरम पर पहुंच गया है और पूरी दुनिया आज आतंकवाद के भस्मासुर की चपेट में है। चीन के मुस्लिम बहुसंख्यक शिनजियांग प्रांत में कुछ समय पूर्व तक दंगे-फसाद होना आम बात हो चली थी। चीन को यह डर सताता है कि कहीं इस क्षेत्र के मुसलमान कट्टर इस्लामिक जिहाद के नाम पर देशद्रोही बनकर आतंकवाद की राह पर न चल पड़े। इसके लिए चीन हर संभव प्रयास कर रहा है कि किसी भी तरह से मुसलमानों को इस्लामिक विचारधारा से बाहर निकालकर चीनी राष्ट्रवाद की मुख्य विचारधारा में लाया जाए और उन्हें देशभक्त चीनी नागरिक बनाया जाए। इसलिए चीन ने मुसलमानों के रोजा रखने पर भी पाबंदी लगा दी है। मुसलमानों की पहचान खत्म करने के लिए कड़े से कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे है। हजारों की संख्या में मुसलमानों को ट्रेनिंग कैंपों में रखा जा रहा है और उन्हें राष्ट्रवाद की शिक्षा दी जा रही है। सुरक्षा की दृष्टी से शिनजियांग प्रांत में रहनेवाले सभी मुसलमानों की निगरानी तक की जाती है। दशकों से चीन अपनी सुरक्षा के लिए शिनजियांग प्रांत के मुसलमानों पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मसुद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ में उसे हर बार बचाता भी आ रहा था। यह चीन का दोगलापन नहीं तो क्या है? सुरक्षा अभियान के नाम पर मुसलमान के धार्मिक अधिकारों का हनन करना और अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाने जैसे चीनी कार्रवाई को क्या जायज ठहराया जा सकता है? अपनों बेबाक राय दे 

This Post Has One Comment

  1. It is a right step to put restrictions on Muslim and ongoing surveillance on them as they can’t be trusted. China’s stand on Masood is a diplomatic move… Enemy’s enemy is friend

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