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लोकसभा 2019 का चुनाव संपन्न होने के बाद सभी एग्जिट पोल में भाजपा को पुर्ण बहुमत तथा एनडीए को सर्वाधिक सीटें मिलने का अंदाज लगाया गया है और विपक्षी दलों का सुपड़ा साफ होता दिखाई दे रहा है। जिसके बाद से ही सभी विपक्षी दलों ने गड़बड़ी के नाम पर अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की तैयारी अभी से शुरु कर दी है। 22 विपक्षी दलों ने मिलकर चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखी है और ज्ञापन देकर मांग की है कि जिन 5 ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों की गणना करके मिलान किया जाना है, उसमें यदि गड़बड़ी पाई जाती है, तो फिर 100 फीसदी ईवीएम की पर्चियों की गिनती की जानी चाहिए। गौरतलब है कि जमीनी सच्चाई से दूर विपक्षी दलों की राजनीति नकारात्मक होती जा रही है। जनता अब वंशवाद,परिवारवाद,एकाधिकारवादी क्षेत्रिय दलों की भ्रष्ट राजनीति से तंग आ चुकी है। जिसके चलते जनता का इनसे मोहभंग हो गया है। भाजपा की अगुवाई में एनडीए के बढ़ते जनाधार से इन राजनीतिक दलों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। अपनी-अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए सभी विपक्षी दल एकजुट होकर ईवीएम पर हो हल्ला मचा रहे है। क्या विपक्षी दल अपनी हार पचा नहीं पा रहे है इसलिए ईवीएम पर रार-तकरार कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे है?अपनी बेबाक राय दें

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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