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विकास और राष्ट्रवाद के विजयी रथ पर आरूढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर से एक बार मोदी सरकार की संकल्पना साकार होती दिखाई दे रही है। शुरुआती रुझान में एनडीए 353 सीट और यूपीए 72पर बढ़त बनाये हुए है और अन्य के खाते में 117सीट जाती हुई दिखाई दे रहीं है। हालांकि फाइनल नतीजे आने में देर हो सकती है। नतीजे जो भी आये पर इस बार चुनाव में सिर्फ एक ही मुद्दा रहा और वह है ‘मोदी’। लोकसभा चुनाव में तो सैकड़ो दल उतरे परन्तु प्रमुख रूप से दो ही खेमें दिखे, एक मोदी समर्थक और दूसरा मोदी विरोधी। मोदी लहर में तबाह हुए विपक्षी दल अपना अस्तित्व बचाने और किसी भी हाल में मोदी को हटाने के लिए महागठबंधन बना डाला बावजूद इसके अकेले मोदी का विराट व्यक्तित्व सभी पर भारी पड़ा। क्या मोदी विरोध में अंधी हो चुकी विपक्षी दलों को देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होना महंगा पड़ा ? क्या यह मान लिया जाए कि नरेंद्र मोदी के चमत्कारिक विराट व्यक्तिमत्व के सामने विपक्षी दल बौने साबित हुए ? अपनी बेबाक राय दें

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