हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम।
धर्मसंस्थापनाथार्य सम्भवामि युगे युगे।। 
एक समय भारत में घोर निराशा -उदासी, भय-आतंक,भ्रष्टाचार, गुंडाराज, का वातावरण था और धर्म की हानि होने लगी थी तथा पापियों का अत्याचार बढ़ता ही जा रहा था।देश के कोने-कोने में आतंकवादी हमले,बॉम्ब ब्लास्ट हो रहे थे, जिसमें सज्जन लोग मारे जा रहें थे।राजनीति में सभी की दिलचस्पी खत्म सी हो गई थी। ऐसे समय में अचानक एक चमत्कारिक व्यक्ति का राष्ट्रीय राजनीति में उदय होता है और वह घोर अंधेरे को चीर कर पूरे देश में प्रकाश फैला देता है। जिससे विस्मित होकर जनता उसे बहुमतों से विजयी बनाकर देश का प्रधानमंत्री बना देती है। इसके बाद देखते ही देखते आतंकवादी हमले और बोम्ब ब्लास्ट,दंगे-फसाद की घटनाएं रुक जाती है।देश सुरक्षित महसूस करता है।हजारों की संख्या में आतंकवादी-माओवादी का खात्मा किया जाता है और देश सुख चैन की नींद लेने लगता है।इतने बड़े परिवर्तन को देख कर जनता जागरूक हो गई और इस बार के आम चुनावों में फिर से उस विराट व्यक्तिमत्व को बहुमतों से विजयी बनाकर प्रधानमंत्री का दायित्व सौप दिया है। नरेंद्र मोदी के कार्यो को देखकर महाभारत का यह श्लोक ‘ यतो धर्मस्ततो जय: ‘ अर्थात ‘ जहां धर्म है वहां जीत निश्चित है।’ उन पर पूरी तरह से फिट बैठता है। यह श्लोक सुप्रीम कोर्ट का ध्येय वाक्य भी है। संघ का एक गीत है –
विश्व विजय का स्वप्न धारकर,कठिन परिश्रम करना है।
माया,ममता,समरसता का भाव जगत में भरना है।।
मन में दृढ़ संकल्प लिए फिर अमर पुत्र ललकार उठा।
युग से सोए सुप्त ह्रदय में राष्ट्र भक्ति का ज्वार उठा।।
हिन्दू ह्रदय ललकार उठा…
देश की जनता ने इसी मंशा से मोदी सरकार को सिंघासन पर विराजमान किया है।बहरहाल यह विराट विजय राष्ट्र चेतना की है।
क्या राष्ट्रधर्म का पूरी निष्ठा से पालन करने के कारण मोदी सरकार को भारी जीत मिली है ? अपनी बेबाक राय दे 

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu
%d bloggers like this: