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गर्मी से तुरंत राहत देने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, आइसक्रीम जैसी उन तमाम चीजों का इस्तेमाल बढ़ जाता है, जो हमारे शरीर के तापमान से ठंडी होती हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इन सब खाद्य पदार्थों से भारीपन-एसिडिटी-डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हम ऐसा खाएं जो सुपाच्य होने के साथ-साथ हमारे शरीर को पोषण भी प्रदान करें।

ग र्मियों के दिन ज्यादातर लोगों के लिए छुट्टियों के दिन होते हैं। वे इस समय घूमना फिरना तथा अपने परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। परंतु इसी समय वे सूरज की हानिकारक किरणों के संपर्क में भी आते हैं। गर्मियों में तपन इतनी तेज होती है कि वह शरीर को अंदर तक झुलसा कर रख देती है। इसलिए गर्मियों को दूर करने के लिए केवल कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम पर ही निर्भर न रहें।

गर्मियां आते ही कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिससे आपके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है और जानलेवा बीमारियों के बढ़ने की आशंका और भी अधिक हो जाती है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के महासचिव डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा कि हीट इग्जॉशन गर्मी की एक साधारण बीमारी है जिसके दौरान शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक होता है। चक्कर आना, अत्यधिक प्यास लगना, कमजोरी, सिर दर्द और बेचैनी इसके मुख्य लक्षण हैं। इसका इलाज तुरंत ठंडक देना और पानी पीकर पानी की कमी दूर करना है। अगर हीट एग्जॉशन का इलाज तुरंत न किया जाए तो हीट-स्ट्रोक हो सकता है, जो कि जानलेवा भी साबित हो सकता है।

हीट-स्ट्रोक में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जो कि अंदरूनी अंगों की कार्यप्रणाली को नष्ट कर सकता है। हीट-स्ट्रोक के मरीजों को शरीर का तापमान बहुत ज्यादा होता है, त्वचा सूखी और गर्म होती है, शरीर में पानी की कमी, कन्फ्यूजन, तेज या कमजोर नब्ज, छोटी-धीमी सांस, बेहोशी तक आ जाने की नौबत आ जाती है। हीट-स्ट्रोक से बचने के लिए दिन के सब से ज्यादा गर्मी वाले समय में घर से बाहर न निकलें। अत्यधिक मात्रा में पानी और जूस पीएं, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। ढीले-ढाले और हल्के रंग के कपड़े पहने।

गर्मियां भी मौसमी बीमारियों के साथ आती हैं। गर्मी में होने वाली गर्मी से थकावट, लू लगना, पानी की कमी, फूड पॉयजनिंग आम बीमारियां हैं। अगर हम कुछ सावधानियां बरतें तो इन बीमारियों से बचा जा सकता है।

आइये जानते हैं कि गर्मियों में क्या खास सावधानियां बरतें-

गर्मियों में क्या खाएं

गर्मियों में मिलने वाली सब्जियां मुलायम, गूदेदार और नमी से भरपूर होती हैं, जो इस मौसम के लिहाज से बिल्कुल उपयुक्त होती हैं। लौकी, करेला, तोरी, कद्दू, खीरा, टिंडा, परवल, भिंडी, चौलाई, खीरा, पुदीना, तरबूज, मौसमी जैसी गर्मियों की सब्जियों का सेवन करें। ये सब्जियां व फल प्यास बुझाने वाले होते हैं, क्योंकि इनमें सोडियम और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और एंटी ऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और विटामिन ए काफी मात्रा में होते हैं। ये सभी सब्जियां ठंडी तासीर वाली, पचने में आसान और उन सभी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो इस गर्म और आर्द्र मौसम से शरीर का तालमेल बैठाने के लिए जरूरी हैं॥ आम और दही भी कूलिंग वाले भोजन हैं। इनमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। तरबूज और खरबूजे में करीब 90 प्रतिशत पानी होता है और ये पचने में भी आसान होते हैं। खाने के साथ सलाद जरूर खाएं। कच्ची सब्जियों से जरूरी एंजाइम मिलते हैं, जो शरीर को भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण करने में मदद करते हैं। शरीर जितने पोषक तत्वों का अवशोषण करेगा, उतना ही स्वस्थ रहेगा। सलाद फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन-तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

गर्मियों में खायें फल

आम- आम को फलों का राजा माना जाता है। गर्मी आते ही बाजार में कई किस्में नजर आती हैं। इसमें कई स्वास्थवर्धक तत्व भी होते हैं। लेकिन ज्यादा आम खाना नुकसानदेह भी हो सकता है। बेल- शरीर की गर्मी को दूर करता है। बेल शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और तमाम बीमारियों जैसे गैस, कब्ज, जलन, भूख न लगना आदि से आराम दिलाता है।

आलूबुखारा- यह मीठा, जूसी और विटामिन सी से परिपूर्ण होता है। यह कैंसर प्रतिरोधी भी होता है। खरबूजा भी तरबूज की तरह विटामिन ए का भी बहुत ही अच्छा श्रोत है। गर्मी के दिनों में पाचन तंत्र का बिगड़ जाना आम बात है। ऐसे में आप गर्मियों के फलों का सेवन करके अपने पाचन तंत्र को ठीक रख सकते हैं।

क्या न खाएं

* कैफीन से दूर रहें। इससे डीहाइड्रेशन बढ़ता है।

* अधिक वसायुक्त और भारी भोजन न खाएं।

* तले हुए और मसालेदार भोजन से दूर रहें।

* बासी और गंदे माहौल में बना खाना न खाएं।

* प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से बचें।

* मिठाइयां कम से कम खाएं।

* बढ़ा दें तरल पदार्थों का सेवन।

गर्मी में हमारे शरीर को काम करने के लिए बहुत कम मात्रा में ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए इस मौसम में हमें खाना कम खाना चाहिए और तरल पदार्थ ज्यादा लेने चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में हमें अपने भोजन को खाना नहीं, पीना चाहिए। रोजाना तीन से चार लीटर पानी पिएं। इसके अलावा जूस, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, नारियल पानी और आम पना का सेवन भी करें। डिब्बाबंद जूस का सेवन करने से बचें।

फलों, सब्जियों, दूध, ग्रीन टी और जूस में भी काफी मात्रा में पानी होता है। जो लोग इन चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, उन्हें ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए अगर आपको बार-बार पानी पीना पसंद नहीं है तो अपने डाइट चार्ट में उन चीजों की मात्रा बढ़ा दें। गर्मियों में खाने में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, इसलिए फूड पॉयजनिंग, डायरिया और उल्टी-दस्त के मामले अत्यधिक बढ़ जाते हैं। अधिकतर लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखी सब्जियां, फल और खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता, जो गलत है। कच्ची सब्जियों और फलों को 2 से 4 दिन से अधिक समय तक न रखें।

डीहाइड्रेशन और संक्रमण से बचाव

गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) हो जाती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। गर्मियों में घर से बाहर धूप में अधिक समय न बिताएं। इससे शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे थकान, रक्तचाप कम होना, कमजोरी महसूस होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, नींबू पानी, बेल के शरबत आदि से भी अपने शरीर में शीतलता बनाये रख सकते हैं। अपने यूरिन के रंग पर नजर रखें। गहरे रंग का यूरिन डीहाइड्रेशन की निशानी है। उसका रंग हल्का रखने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं।

गर्मी के मौसम में दूषित जल पीने व बाहर के कटे-खुले खाद्य पदार्थ खाने के कारण हैजा, टाइफाइड, पीलिया, आंतों में सूजन व अनेक प्रकार के संक्रमणों के मामले बढ़ जाते हैं। कई बार अधिक खाना भी फूड पॉयजनिंग का कारण बन जाता है। घर पर बना सादा और सुपाच्य भोजन ही करें। बाहर खाने से बचें। कभी मजबूरी में बाहर खाना भी पड़े तो ऐसे रेस्तरां से खाएं, जहां ताजा और हाइजनिक खाना मिले।

रहें ऊर्जा से भरपूर

अपने दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करें। कम वसा वाला भोजन खाएं और ताजे फलों का रस पिएं। तले हुए और मसालेदार भोजन से बचें। अल्कोहल व कैफीन का सेवन कम करें, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और आप सुस्ती अनुभव करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

* सब्जियों, फलों और बचे हुए खाने को तुरंत फ्रिज में रख दें।

* फ्रिज का तापमान बहुत महत्वपूर्ण है। यह पांच डिग्री सेल्सियस से कम और फ्रीजर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।

* कच्चे और पके हुए मांस तथा सी फूड को ज्यादा समय तक स्टोर न करें, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।

* यह जांचने के लिए कि भोजन सही है या नहीं, उसे चखना नहीं चाहिए, क्योंकि कई बार यह बेहद नुकसानदेह साबित होता है।

* दूध और दुग्ध उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न रखें।

* बचे हुए खाने को ज्यादा समय तक रेफ्रिजरेटर के बाहर न रखें। दोबारा सेवन करने से पहले उसे ठीक से गर्म कर लें।

* एक्सपाइरी डेट के खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें।

* उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

गर्मी से तुरंत राहत देने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, आइसक्रीम जैसी उन तमाम चीजों का इस्तेमाल बढ़ जाता है, जो हमारे शरीर के तापमान से ठंडी होती हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इन सब खाद्य पदार्थों से भारीपन-एसिडिटी-डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह तय करना है कि इस बार गर्मी में हम ऐसा क्या खाएं जो सुपाच्य होने के साथ-साथ हमारे शरीर को पोषण भी प्रदान करें।

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