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.डॉ प्रमोद पाठक की हाल में प्रकाशित मराठी किताब ‘इस्लामी धर्मग्रंथांची ओळख’ (इस्लामी धर्मग्रंथों का परिचय) इस्लामी धर्मग्रंथों की जानकारी पाने के लिए उपयोगी प्रतीत होती है। इसमें आरंभ में ही पवित्र कुरान और हदीस (मुहम्मद पैगंबर की जीवनकथा और उनकी यादों का संकलन) में समाहित विविध विषयों का विस्तार से विवेचन, स्पष्टीकरण और विश्लेषण करते समय संदर्भ क्रमांक देने का विशेष ध्यान रखा गया है। इन संदर्भों में पवित्र कुरान के अध्यायों एवं आयतों का क्रमांक तो दिया ही गया है, साथ ही इन ग्रंथों के जानकार विद्वानों, लेखकों एवं उसकी मीमांसा करने वालों की पुस्तकों का संदर्भ भी दिया गया है।

लेखक ने स्वीकार किया है कि उन्हें अरबी भाषा का ज्ञान नहीं है परंतु पुस्तक लिखने हेतु उन्होंने जिन पुस्तकों/ग्रंथों का अध्ययन किया है उनके लेखक विद्वान जानकार मुस्लिम व्यक्ति हैं। उन विद्वानों के भाष्य एवं अनुवाद में अनुभव होने वाले सूक्ष्म अंतर्विरोध और सूक्ष्म अंतर को भी लेखक ने रेखांकित किया है। विशेष महत्वपूर्व बात यह है कि इस्लामी धर्म परंपराओं, रीतिरिवाजों तथा कुछ ऐसी बातों का भी उल्लेख किया है जो हिंदुओं में प्राचीन समय से थीं और मुस्लिम धर्म में भी उसकी स्थापना से चलती रही हैं। इससे उन रीतिरिवाजों का उद्गम एवं तत्कालीन आशय तुरंत समझना और मन में उत्पन्नगलत धारणाओं को दूर करने में आसानी होती है।

ग्रंथ को तीन खंड़ों में बांटा गया है जैसे ‘पवित्र कुरान का परिचय’, ‘हदीस का परिचय’ एवं ‘शरीया का परिचय’। प्रत्येक विभाग में शीर्षकानुसार विषय का विशद विवरण है। ‘पवित्र कुरान का परिचय’ खंड में 15 अध्याय, ‘हदीस का परिचय’ में 13 अध्याय एवं ‘शरिया का परिचय’ में 11 अध्याय हैं। इस पुस्तक के लेख विभिन्न कालखंडों में लिखे गए हैं। अतः उनका तात्कालिक संदर्भ कुछ भिन्न होने के कारण (उदा. तीन तलाक) ग्रंथ रूप में वे वैसे के वैसे ही समाहित किए गए हैं। इसके कारण पुनरुक्ति दोष संभव है। परंतु लेखक द्वारा स्वयं संपादन किए जाने के कारण उपरोक्त दोष की संभावना नगण्य है। पीएच. डी. के प्रबंध जैसा इस पुस्तक का स्वरूप होने के बावजूद भाषा सरल एवं प्रवाही है।

मैं इस पुस्तक की समीक्षा नहीं कर रहा हूं, केवल पुस्तक से रूबरू करा रहा हूं। यह स्पष्ट कर देना उचित होगा कि पुस्तक समीक्षा के लिए आवश्यक विद्वत्ता और ज्ञान मेरे पास नहीं है। परंतु ग्रंथ का प्रत्येक शब्द ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि यह ग्रंथ पठनीय, अध्ययनीय एवं संग्रहणीय है। केवल गैर-मुस्लिम पाठकों को ही नहीं बल्कि मुस्लिम लोगों को भी इस पुस्तक को पढ़ना चाहिए। ऐसा इसलिए भी कि सभी मुस्लिम पाठक अरबी भाषा से परिचित होंगे ही यह जरूरी नहीं है। कुरानकालीन अरबी जानकार ही समझ सकते हैं, जैसे कि वेदकालीन संस्कृत। उन भाषाओं के जानकारों की मदद के बिना इनका आकलन करना मुश्किल होता है। इस्लामी धर्म ग्रंथों का परिचय पाने की दृष्टि से यह ग्रंथ मार्गदर्शक है।

यहां एक और बात का स्पष्ट उल्लेख करना मैं आवश्यक समझता हूं। इस ग्रंथ के तीनों विभागों के प्रत्येक प्रकरण में प्रतिपादित विषय का विस्तार से विवरण मैंने जानबूझकर नहीं किया है। ऐसा इसलिए किया ताकि प्रत्येक व्यक्ति उत्सुकतावश इस ग्रंथ को खरीद कर तन्मयता से पढ़े और उन्हें इस्लाम धर्म के आकलन में मदद मिले। ग्रंथ का मुखपृष्ठ अत्यंत आकर्षक और विषयसूचक है। पृष्ठ क्रमांक आठ पर लेखक द्वारा लिखी गई अन्य पुस्तकों की सूची है। यह लेखक की विभिन्न विषयों पर जानकारी और उनके द्वारा विभिन्न विषयों पर किए गए अध्ययन को दर्शाती है।

पुस्तक का नाम – इस्लामी धर्मग्रंथाची ओलख (मराठी)

(इस्लामी धर्मग्रंथों का परिचय)

लेखक – डॉ. प्रमोद पाठक

प्रकाशक – नचिकेत प्रकाशन, नागपुर

24, योगक्षेम ले-आऊट, स्नेह नगर,

वर्धा रोड, नागपूर-440015

पृष्ठ – 230

मूल्य – रु. 300/-

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