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इंट्रो : भूलने की बीमारी का कारण हर बार बुढ़ापा ही नहीं होता, कभी-कभी व्यायाम की कमी से भी ऐसा हो सकता है. अगर आपको भी भूलने की बीमारी डीमेंसिआ की शिकायत है तो रचना प्रियदर्शनी का यह आलेख अवश्य पढ़ें ……

हाल में न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार जो महिलाएं फिट होती हैं, उन्हें डिमेंशिया अर्थात भूलने की बीमारी से प्रभावित होने की संभावना काफी कम होती है .  इस शोध अध्ययन में करीब 50 वर्ष की 191 महिलाओं को उस समय तक बाइ – साइकिल व्यायाम करने के लिए कहा गया, जब तक कि वे पूरी तरह से थक कर चूर न हो जायें . इसके बाद उनके कार्डियो वास्क्यूलर गतिविधि  को मापा गया .

पता चला कि जो महिलाएं अपने इस उम्र में भी शारीरिक रूप से चुस्त और तंदरुस्त थीं, उनमें डिमेंशिया के डेवलप होने की संभावना उन महिलाओं की तुलना में 90% से भी कम थी, जो पूरी तरह फिट नहीं थी . इस अध्ययन के तहत महिलाओं को समान प्रयोग करवा कर छह बार उनका परीक्षण किया गया . परिणाम में पाया गया कि पूरी तरह से स्वस्थ महिलाओं में डिमेंशिया के लक्षणों के उभरने की संभावना मात्र 5 फीसदी होती है, जबकि कम स्वस्थ महिलाओं में इसकी संभावना 25 फीसदी और बीमार या कमजोर महिलाओं में यह संभावना 32 फीसदी के करीब होती है .

इसके अलावा पूरी तरह से स्वस्थ जिन महिलाओं ने किसी कारणवश व्यायाम का टेस्ट देना बीच में ही छोड़ दिया, उनमें से 45 फीसदी महिलाएं आगे के दशकों में चल कर तुलनात्मक रूप से जल्दी ही डिमेंशिया की शिकार हो गयीं .

इससे पता चलता है कि नकारात्मक कार्डियो वॉस्क्युलर प्रक्रिया जीवन की मध्यावस्था में भी प्रारंभ हो सकती है .

शोध के आधार पर यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि शारीरिक रूप से स्वस्थ महिलाओं के डिमेंशिया का विकास आम महिलाओं की तुलना में 11 साल देरी से होता है अर्थात एक साधारण महिला अगर 60 साल की उम्र में डिमेंशिया से ग्रस्त हो गयी हो, तो शारीरिक रूप से एक स्वस्थ महिला में इसके लक्षण 71 वर्ष में परिलक्षित होंगे .

यह परिणाम इस लिहाज से रोचक और महत्वपूर्ण माना जा सकता है कि यह जीवन की मध्यावस्था में लोगों को अपने कार्डियो वॉस्क्युलर सिस्टम को सुधारने के लिए प्रेरित करता है जिसकी वजह से डिमेंशिया हो सकता है .

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