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ख़ुशी की खोज में मनुष्य क्या नहीं करता – मेहनत मज़दूरी, दोस्ती प्यार, यहां तक कि चोरी, धोखाधड़ी भी. हर कृत्य केवल इसलिए की स्वयं के लिए ख़ुशी प्राप्त कर सके। कई लोगों का मानना है कि धन दौलत शौहरत मनुष्य को सबसे अधिक ख़ुशी दे सकते हैं जबकि कई अन्य लोगों का मानना है कि धन और शौहरत ख़ुशी नहीं ख़रीद सकते, खुशी रिश्तों से मिलती है, भावनाओं से मिलती है। दोनों ही तरह की विचारधारा ना तो पूर्ण रूप से ग़लत हैं, ना ही पूर्ण रूप से सही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बेशक़ ख़ुशी की कोई एक परिभाषा नहीं है लेकिन सबसे अधिक स्वीकृत यही मत है कि ख़ुशी एक मानसिक अवस्था है, जो आपको कभी बड़ी-बड़ी उपलब्धियों से भी नहीं मिलती और कभी किसी छोटे से कार्य के पूर्ण होने पर ही मिल जाती है। दरअसल, सत्य यह है कि इसे आप ना तो ख़रीद सकते हैं और ना ही स्थानांतरित कर सकते हैं। हाँ, लेकिन आप इसे बाँट कर दुगुना ज़रूर कर सकते हैं।

कभी किसी छोटे बच्चे की गतिविधियों को हम ग़ौर से देखें तो पायेंगे कि सचमुच खुशी एक मानसिक और भावनात्मक अवस्था ही है। एक छोटा सा बच्चा, फिर चाहे वह किसी अनजान व्यक्ति की ही संतान क्यों ना हो, यदि किसी रेस्टॉरेंट, शॉपिंग मॉल या सड़क पर ही हमें देख के मुस्कुराता है तो स्वतः ही हमारे चेहरे पर भी मुस्कुराहट बिखर ही जाती है। कितनी सहजता से, बिना किसी औपचारिक परिचय के,  वह बच्चा अपनी खुशी हमारे साथ बाँट कर उसे दोगुना कर लेता है।

यूँ तो, ख़ुशी के मायने व्यक्ति दर व्यक्ति बदलते हैं। लेकिन फिर भी, अच्छे काम और अच्छे विचार निश्चित ही सभी को एक समान खुशियाँ प्रदान करते हैं। हर अवस्था अच्छी तभी सिध्द होती है जब उससे जुड़े हमारे कृत्यों में सदभावना हो। इसलिए आवश्यक रूप से  ही हमें स्वयं को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। नकारत्मक विचारों को त्याग कर सकारात्मक बातों से अपने इर्द गिर्द के माहौल को भरने का प्रयास करते रहना चाहिए। अपने मन मष्तिस्क पर बिना कोई बोझ लिए, दूसरों के हित में पहले सोचना चाहिए। अक्सर हमारी खुशी से हमारे अपनों की और हमारी खुशी भी हमारे अपनों से जुड़ी होती है इस बात को सदा ध्यान में रखते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

सायकोलोजिकल साइंस की एक पत्रिका का कहना है कि कुछ पाने से ज़्यादा कुछ देने में मनुष्य की खुशी है और ये लंबे समय तक मनुष्य के साथ रहती है। सुनने पढ़ने में थोड़ा सा उलझा हुआ लगता है ये विचार किन्तु यदि इसे अपने जीवन में उतार सकें हम तो हमसे अधिक शायद ही कोई ख़ुश व्यक्ति नज़र आएगा हमें।

किन्तु ये भी तब ही संभव होगा जब खुश रहने का हमारा इरादा मज़बूत होगा और उससे भी मज़बूत होगा अपनी ख़ुशी का सही स्रोत चुनने का निर्णय। जीवन का रोज़मर्रा का संघर्ष तो हर व्यक्ति कर रहा है, लेकिन रोज़ हर व्यक्ति खुशी नहीं बाँट रहा, ख़ुश नहीं रह रहा। ख़ुशी हर पल आपके जीवन में रहे इसके लिए आपको बस अपने मन मष्तिष्क से कहना है – कि जब सब कुछ अच्छा हो रहा है , हम सबकुछ अपने और दूसरे की बेहतरी के लिए कर रहें हैं तो ख़ुशी निश्चित ही हमारी है। हमारे भीतर ही है। अब तो बस उसे महसूस करना है। और सभी के साथ बाँटकर उसे दोगुना करना है।

 

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