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इंट्रो: कितनी बड़ी विडम्बना है कि २०२० तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बनने की राह पर खड़े “अवसाद” को लेकर लोग कितने लापरवाह होते हैं. ज्यदातयार मरीज और उसके आस-पास के लोग इसे हंसी में उड़ा देते हैं कि, अब इसका भी इलाज करें! पर यह बहुत भयानक है क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह बीमारी आत्महत्या के प्रति उकसाती है. रचना प्रियदर्शिनी ने इस आलेख में इसके लक्षणों तथा सुलभ इलाज पर कायदे से प्रकाश डाला है.

अवसाद या डिप्रेशन का तात्पर्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में मनोभावों संबंधी दुख से होता है। इसे रोग या सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है . इस स्थिति में व्यक्ति डिप्रेस्ड अवस्था में स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है . वजह से विभिन्न प्रकार की शारीरिक और भावनात्मक समस्या होती है, जिसका असर व्यक्ति की कार्य क्षमता पर भी पड़ता है . अगर किसी को भी एक बार अवसाद ( तनाव ) का स्ट्रोक आ गया, तो इसके पुनरावृत्ति की सम्भावना बढ़ जाती है . इसका प्रभाव इतना गहरा होता है कि कई लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं . आंकड़ों के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका मे हर दस में से एक व्यक्ति अवसाद की बीमारी से ग्रस्त है . विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान में भारत में पांच करोड़ से ज्यादा लोग अवसाद से ग्रसित हैं . वर्ष 2001 से 2015 के बीच के 15 वर्षों में कुल 126166 लोगों ने मानसिक रोगों से पीड़ित होकर आत्महत्या की हैं . विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2020 तक अवसाद विश्व में दूसरा सबसे बड़ा रोग होगा . इसके बावजूद बिडंवना यह है कि 99 प्रतिशत मानसिक रोगी उपचार को जरूरी नहीं मानते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसके इलाज पर पैसे खर्च किये जायें . ऐसी स्थिति में जरूरी है कि समय रहते उन लक्षणों की पहचान की जाये, ताकि व्यक्ति को अवसादग्रस्त होने से बचाया जा सके .

– अवसाद का सबसे प्रमुख लक्षण यही है कि व्यक्ति हर समय परेशान रहता और उदास है . किसी काम में उसका मन नहीं लगता .

– हर समय उसके दिमाग में नकारात्मक विचार आते रहते हैं और उसे अपना जीवन निरुद्देश्य लगने लगता है .

– व्यक्ति खुद को अकेला महसूस करता है और उसमें आत्मविश्वास की कमी होती है .

– कुछ लोगों में शारीरिक उत्तेजना या व्यग्रता के लक्षण भी देखने को मिलते हैं . वे किसी भी काम को मन लगा कर नहीं कर पाते .

– अवसादग्रस्त व्यक्ति को या तो बिल्कुल भी नींद नहीं आती या फिर बहुत ज्यादा नींद आती है .

– व्यक्ति की नींद बीच रात में खुल जाती हो और यदि यह लक्षण दो सप्ताह से ज्यादा कायम रहें, तो ये अवसाद के लक्षण हैं .

– किसी बात से कोई खुशी न होनी, यहां तक गम का भी अहसास न होना अवसाद के लक्षण हैं .

– अवसाद की स्थिति में कुछ लोग खाना – पीना छोड़ देते हैं, तो वहीं कुछ अन्य ज्यादा खाने लगते हैं .

– इस रोग की सबसे गंभीर स्थिति यह होती है कि जब व्यक्ति के मन में रह – रह कर खुदकुशी करने का विचार आने लगता है .

कीमोथेरेपी के असर को भी कम कर सकता है अवसाद

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में व्यक्ति का सकारात्मक दृष्टिकोण बेहद लाभकारी साबित होता है, लेकिन कैंसर का नाम सुनते ही ज्यादातर मरीद अवसादग्रस्त हो जाते हैं . उन्हें लगने लगता है कि अब तो उनकी दुनिया ही खत्म हो गयी . उनके इस नकारात्मक नजरिये के फलस्वरूप उनके दिमाग की सक्रियता धीरे – धीरे कम होने लगती है . दिमाग में मौजूद ब्रेन – डीरीव्ड न्यू्रोट्रोफिक फैक्टर ( बीडीएनएफ ) का स्तर कम होने लगता है . इसके चलते कीमो के प्रति उनकी संवेदनशीलता कम होने लगती है और दवाओं का असर भी कम होने लगता है .

कैसे करें अवसाद से बचाव

– अवसाद से गुजर रहे लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे लगातार ऐसे व्यक्ति से बात करते रहें, जिनपर वे भरोसा करते हों . खुलकर उनके साथ अपनी समस्याएं शेयर करें और परिस्थितियों से लड़ने के लिए उनकी मदद मांगें . ऐसे लोगों का भी यह फर्ज बनता है कि वे उसे यह एहसास दिलाएं कि वे उसके साथ हैं .

– सेहतमंद और संतुलित खानपान से मन खुश रखता है . इससे व्यक्ति का शरीर चुस्त और स्फूर्त रहता है .

– व्यायाम शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है . व्यायाम करने से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो मन को एकाग्र रखने में सहायक होते हैं . इससे व्यक्ति का डिप्रेशन स्वत : कम होने लगता है .

– अवसाद दूर करने का एक बढिया उपाय है अपनी भावनाओं को लिख कर अभिव्यक्त कर देना . जिन लोगों को रोजाना डायरी लिखने की आदत होती है, उनमें डिप्रेशन होने की संभावना नगण्य होती है . लिखने से आत्मनिरीक्षण और विश्लेषण करने में मदद मिलती है . आजकल सोशल मीडिया भी इस दिशा में एक बेहतर टूल साबित हो रहा है, जहां लोग अपने मन की बात शेयर करते हैं .

– यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हुए एक शोध के मुताबिक प्रार्थना मन के साथ – साथ शरीर को भी स्वस्थ रखता है . नियमित सच्चे मन से प्रार्थना करने से मन में सकारात्क ऊर्जा का संचार होता है . ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और हृदय गति संतुलित रहती है .

– हमेशा सकारात्मक और ऊर्जावान लोगों के संपर्क में रहें और ऐसे लोगों से खुद को दूर रखें, जो नकारात्मकता से भरे होते हैं और हमेशा दूसरों का मनोबल गिराने का काम करते हैं .

– समय – समय पर अपने काम से छुट्टियां लेकर किसी मनपसंद जगह पर घूम आना भी अवसाद दूर करने का एक अच्छा उपाय है . शेाध की मानें, तो नियमित रूप से छुट्टी पर जानेवाले लोग, लगातार कई सप्ताह तक काम में लगे रहने लोगों की तुलना में बहुत कम अवसादग्रस्त होते हैं .

– एक अच्छी और बेहतर नींद हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है . रोजाना 7 से 8 घंटे सोने वाले लोगों में अवसाद के लक्षण कम देखे जाते हैं .

– संगीत में मूड बदलने, मन को अवसाद से निकालने की अद्भुत ताक़त होती है . जब भी आप खुद को मानसिक रूप से परेशान महसूस करें, तो अपना पसंदीदा गाना सुनें, लेकिन ध्यान रहे गम में डूबे हुए गानों से परहेज करें वरना आपके अवसाद का स्तर बढ़ सकता है .

– अपनी पुरानी भूलों और ग़लतियों का शिकवा करना आपको पूरी तरह से अवसाद के चंगुल में फंसा सकता है . पुरानी बातों के बारे में सोचने के बजाय आज पर फोकस करें .

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