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क्रिकेट खेल को दुनिया में सम्मान की नजर से देखा जाता है।उसकी अपनी एक अलग ही प्रतिष्ठा है।लेकिन आईसीसी के दोगले रवैये से उसकी प्रतिष्ठा पर आंच आई है और उसे शर्मशार होना पड़ रहा है।इसके साथ ही करोड़ो-करोड़ो क्रिकेट फैंस के गुस्से एवं आलोचना का शिकार भी होना पड़ा है।बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर अंकित भारतीय सेना की पेराट्रूप रेजिमेंट के बलिदान चिन्ह पर आईसीसी ने आपत्ति जताई थी,जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया और अब इस पर बवाल मच गया है।सोशल मीडिया पर लोगों ने आईसीसी के दोगलेपन पर जमकर भड़ास निकाली और उसे आईना दिखाते हुए कहां कि जब पाकिस्तानी टीम द्वारा खुलेआम मैदान पर धार्मिक कृत्य करते हुए नमाज अता की गई तब उन्होंने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई।यह आईसीसी का दोगलापन नहीं तो क्या है ?
नियमानुसार खिलाड़ी राजनैतिक,धार्मिक या नस्लवादी चिन्ह प्रदर्शित नहीं कर सकते जबकि धोनी का चिन्ह इन तीनों श्रेणियों में न होकर त्याग और बलिदान का द्योतक है।वर्ल्डकप क्रिकेट में इस बार हो रही निष्कृष्टतं एम्पायरिंग की ओर तो आईसीसी का ध्यान नहीं जाता मगर छोटे से बलिदान चिन्ह पर चला जाता है।भारतीय सेना के बलिदान चिन्ह पर आपत्ति जताकर आईसीसी ने न केवल सेना का अपमान किया है बल्कि भारत देश और देशवासियों का भी अपमान किया है।इसलिए देश की जनता आईसीसी के दुर्भावनापूर्ण दोहरे रवैये को कभी माफ नहीं करेगी।इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि सरकार खेल संस्थाओं के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती है,वे स्वायत्त संस्थाएं है।लेकिन जब मुद्दा देश की भावनाओं से जुड़ा होता है तब राष्ट्रहित ध्यान में रखना होता है।उन्होंने आग्रह किया कि बीसीसीआई इस मामले को आईसीसी के सामने उठाये।क्या खेल के नियमों की आड़ में भारत का अपमान कर रहीं है आईसीसी ? अपनी बेबाक राय दें…

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