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भूखी, प्यासी, परेशान और डरी हुई ये ओरेंग उटान पहले एक वर्षावन में रहती थी। ये वर्षावन अब मनुष्यों को पाम की खेती के लिए चाहिए। इसलिए वे जंगल साफ कर रहे हैं। और ओरेंग उटान अपने गर्भ में बच्चे को छुपाए आसरे की तलाश में आस-पास बचे एकमात्र पेड़ की ऊंची डाल पर चढ़ गई है। यहां से वो देख रही है कि मशीनें कैसे पूरा जंगल तहस-नहस करके साफ कर रहे हैं।
वर्षावनों को सबसे ज्यादा घने जंगलों में शुमार किया जाता है। इनके ऊपर पेड़ों का चंदोवा इतना घना होता है कि सूरज की रोशनी भी अक्सर ही जमीन के नीचे नहीं पहुंच पाती। इंडोनेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा के ऐसे ही वर्षावनों में ओरेंग उटान रहते हैं। इंसानों के सबसे ज्यादा नजदीकी रिश्तेदारों में गोरिल्ला, चिंपैजी और ओरेंग उटान को रखा जाता है। वे बुद्धिमान प्राणी होते है। लेकिन, इंसानों को अब न तो इनकी बुद्धिमत्ता की परवाह है और न ही रिश्तेदारी की। उन्हें तो पाम आयल प्लांटेशन के लिए ज्यादा से ज्यादा जगह चाहिए।
प्लांटेशन के लिए जंगलों को साफ करके जगह बनाई जा रही है। अभी कुछ ही दिनों पहले अपने जंगल को बचाने के लिए एक ओरेंग उटान जेसीबी मशीनों से उलझ गया था। अफसोस है कि जिस समय सनी लियोनी के जेसीबी पर चढ़ने को लेकर चुटकुले बनाए जा रहे थे और सोशल मीडिया पर जेसीबी की तस्वीरें साझा की जा रही थीं, उस समय भी एक ओरेंग उटान की इंसानी मशीनी राक्षस जेसीबी के साथ भिड़ंत की तस्वीरें लोगों के पास तक नहीं पहुंची।
जंगलों को साफ करने में बाधा बनने वाले ओरेंग उटान को मार दिया जा रहा है या फिर भूख और प्यास से वे खुद दम तोड़ रहे हैं। जो तस्वीर आप देख रहे हैं, यह भी एक ऐसी ही गर्भवती मादा ओरेंग उटान है। अपनी जान बचाने के लिए वो पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर चढ़ गई। वहां से डरी-सहमी और भूखी-प्यासी वो अपने आसपास के जंगलों को साफ होते हुए देखती रही। उसके अंदर इतनी भी ताकत नहीं थी कि वह खुद से पेड़ के नीचे उतर पाती।
उसे बचाने के लिए पहुंची टीम ने उसे डॉट मारकर बेहोशी का इंजेक्शन दिया और नीचे नेट लगाकर गिराया। वो उन कुछ खुशनसीब ओरेंग उटान में है जिसकी जान बच गई और उसने बाद में बच्चे को भी जन्म दिया। इस मादा का नाम बून मी रखा गया है। पर ज्यादातर ओरेंग उटान की किस्मत बून मी जैसी अच्छी नहीं है।
माना जाता है कि अगले दस-पंद्रह सालों में ही इंसानों के ये सबसे करीबी रिश्तेदार खतम हो जाएंगे। मतलब जंगलों से इनकी आबादी समाप्त हो जाएगी। भले ही फिर चिड़ियाघरों में कुछ पालतू ओरेंग उटान बचे रहें। लेकिन, जंगलों में इनका स्वच्छंद विचरण खत्म हो जाएगी।
हम इंसानों की कभी न खत्म होने वाली जरूरतों और विकास की जय हो !!!

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