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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की दो दिवसीय बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक गए हुए है। सभी देशों की निगाहें इस पर थी कि क्या इमरान खान और पीएम मोदी एक दूसरे से मिलेंगे। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने डिनर के दौरान एक ही समय पर एंट्री की लेकिन मोदी जी ने इमरान खान को देखा तक नहीं, मुलाकात और बातचीत तो बहुत दूर की बात है। इसके पूर्व चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भी साफ शब्दों में पीएम मोदी ने कहा था कि आतंकवाद और बातचीत दोनों साथ-साथ नही हो सकती।आतंकवाद पर पाक ने कोई खास कार्रवाई नहीं की है,इसलिए पाक से बात करने का यह सही समय नहीं है। बता दें कि इमरान खान पीएम मोदी से मिलने को बेताब है लेकिन पुलवामा हमलें के बाद से ही मोदी ने पाक के खिलाफ कठोर भूमिका अपनाई हुई है। उन्होंने पाक प्रधानमंत्री से न मिलकर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अमन का डंका पीटकर आतंकवादी हमला करनेवाले पाकिस्तान को अब भारत माफ नहीं करेगा। क्या इमरान खान की अपील के बाद भी भेंट न कर पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है ?अपनी बेबाक राय दें.

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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