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भारत दुनिया का सबसे प्राचीन देश और सभ्यता है।आदि गुरु शिव शंकर योग के जनक माने जाते है और पतंजलि आधुनिक युग के प्रचारक। योग का अर्थ है जुड़ना या जोड़ना।योग के माध्यम से हम किसी से भी जुड़ सकते है।मन,मष्तिष्क और आत्मा से परमात्मा के जुड़ने को ही आध्यात्मिक योग कहा जाता है।योग अब केवल शारारिक लाभ और अध्यात्म जीवन तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि भारत की पुरानी मान्यता “वसुधैव कुटुम्बकम” को भी साकार करता हुआ दुनिया को एकता के सूत्र में पिरो रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी तब शायद ही किसी ने कल्पना की हो कि योग द्वारा दुनिया को भी एकसूत्र में जोड़ा जा सकता है।5 हजार साल से अधिक पुरानी भारतीय परंपरा का अंग रहे योग ने उसी समय अपनी ताकत का लोहा मनवा लिया था जब संयुक्त राष्ट्र संघ में 193 सदस्य देशों में से 177 देशों ने इसका समर्थन किया था।आज पूरे विश्व में हर्षोल्लास के साथ योग दिवस मनाया जा रहा है।जिसमें करोड़ो लोग हिस्सा ले रहे है और देशविदेश में व्यापक रूप से विराट व भव्य आयोजन किये गए।एक समय विश्वगुरु के नाम से जाना जानेवाला भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पुनः उठ खड़ा हुआ है और योग विश्वगुरु के रूप में अपनी प्रतिमा स्थापित की है।क्या योग दुनिया को वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देने और दुनिया को एकजुट करने में सफल हो पायेगा ? अपनी बेबाक राय दें

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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