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आईसीसी ने इस बार एक नया निर्णय लिया है कि क्रिकेट विश्वकप के दौरान फुटबॉल की तर्ज पर ‘होम’ और ‘अवे’ यानी घरेलू सरजमीं से बाहर प्रणाली के अंतर्गत मेजबान टीम को छोड़कर सभी टीम दूसरी जर्सी पहन कर मैच खेलेंगी। बताया जाता है कि इसी नियम के अंतर्गत भारतीय टीम भगवा रंग की जर्सी पहन कर मैदान में उतरेगी। निश्चित रूप से करोड़ो भारतीय प्रशंसक भारतीय टीम को नई भगवा जर्सी में देखने को बेताब व उत्साहित है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टी कांग्रेस,सपा एवं अन्य सेक्युलर दलों के नेताओं को भगवा जर्सी पर भी आपत्ति है। कांग्रेस विधायक एमए खान और सपा विधायक अबू आजमी ने सरकार पर सीधे आरोप लगाया कि वह हर चीज का भगवाकरण करने का प्रयास कर रहीं है। मोदी पूरे देश को भगवा रंग में रंगना चाहते है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने भी भगवा जर्सी पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि खेलों का भगवाकरण ठीक नहीं है।
भाजपा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आखिर भगवा रंग से विपक्ष को क्या आपत्ति है ? कभी भगवा आतंक तो कभी भगवा रंग का मुद्दा उठाकर विपक्ष रंगों की राजनीति कर रही है क्योंकि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है। आरपीआई नेता एवं केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि भगवा रंग तो बौद्ध धर्म के भिक्षुओं के कपड़ो का भी है। ये रंग शौर्य और विजय का रंग है। इससे किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। भगवा रंग को राष्ट्र की संस्कृति,सभ्यता,अध्यात्म,परंपरा, इतिहास और अस्मिता से जोड़ कर देखा जाता है। यह भगवा रंग शौर्य,त्याग एवं बलिदान का प्रतीक है। आखिर क्या कारण है कि कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस को भगवा रंग से घोर आपत्ति है ? अपनी बेबाक राय दें……

This Post Has One Comment

  1. Mental disaster of Indian politicians ….
    Feel ashamed we Indians voted them!

    Rahul Lonkar
    Nagpur

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