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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी परंपरा का त्याग कर भारत सरकार के स्वदेशीकरण नीति का प्रदर्शन करते हुए पहली बार बजट के बजाय बहीखाता पेश किया. लोकलुभावन नहीं बल्कि आम जनों से लेकर अत्योंद्य तक को भारत के विकास एवं प्रगति में सहभागी बनाने तथा अमीर व गरीब की खाई को पाटने के साथ ही समानता की ओर ले जाने का बेहतर प्रयास किया गया है. किसान, कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों पर बल देकर शहर और ग्रामीण की असमानता को कम करने की पहल की गई है. पानी, गैस, बिजली के लिए वन ग्रिड, सोशल स्टॉक एक्सचेंज, रेलवे के लिए पीपीपी मॉडल, नई शिक्षा नीति, खेल और राष्ट्रीयहित में शोध, नारी तू नारायणी योजना, ३ करोड़ खुदरा कारोबारियों को पेंशन, आदर्श किरायेदार कानून, रियल इस्टेट, पाईप से पेयजल, एक राष्ट्र एक जैसी नीति आदि अनेकानेक योजनायें वर्तमान और भविष्य में मजबूत भारत का नवनिर्माण करेगी. क्या वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दूरदृष्टी का परिचय देते हुए अपने बहीखाता से भविष्य के मजबूत भारत का खाका खिंचा है ? अपनी बेबाक राय दें

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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