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वर्तमान समय में संवेदनहीन हो चुकी पुलिस को संवेदनशील बनाने के लिए जल्द से जल्द पुलिस सुधार करना अति आवश्यक है. भ्रष्ट,बिकाऊ,बदतमीज,हिटलर,गुंडा,षड्यंत्रकारी,माफिया,अन्यायी,शोषणकारी,रक्षक ही भक्षक आदि अनेकानेक तथाकथित उपनामों से कुख्यात पुलिस को अधिक जिम्मेदार और कर्तव्यपरायण बनाने के लिए तत्काल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव की दरकार है. आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार और विशिष्ट लोगों के साथ शिष्टाचार की भूमिका निभानेवाली पुलिस को निष्पक्षता,भेदभाव रहित और कानून के अनुसार समान रूप से कार्यवाही करने का पाठ पढ़ाना भी जरुरी है. पुलिस के बारे में कहा जाता है कि यदि पुलिस चाहे तो मन्दिर के बाहर कोई चप्पल तक चोरी नहीं कर सकता. बावजूद इसके अपराध में बढ़ोत्तरी होना पुलिस की संदिग्ध भूमिका की ओर इशारा करता है. इसके अलावा देश भर में पुलिस के ५.२८ लाख पद खाली पड़े हुए है,जिसकी भरपाई करना बेहद जरूरी है. गृह मंत्रालय केआंकड़ों के अनुसार सभी राज्यों के पुलिस बलों में कुल २३,७९,७२८ पद है,जिनमें से १८,५१,३३२ पदों को एक जनवरी २०१८ तक भर लिया गया हैं. इन खाली पदों में लगभग १.२९ लाख पद उत्तर प्रदेश में, बिहार में ५०,००० पद,पश्चिम बंगाल में ४९,००० पद, महाराष्ट्र में २६,१९५ इसी तरह अन्य राज्यों की भी स्थिति है. क्या मोदी सरकार देश हित में तत्काल पुलिस सुधार और रिक्त पदों पर भर्ती करेगी ? अपनी बेबाक राय दे 

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