हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

“दंगल गर्ल”के रूप में पहचान रखनेवाली कश्मीरी किशोर अभिनेत्री जायरा वसीमनेअचानक बॉलिवुड की दुनियासे निकलने का कारण दीन और इमानसे भटक जाना बताया है. उसने जो लंबा बयान दिया है, उसमे कुरआन शरीफकी आयते, पैगंबर साहब और ह. उमर के संदर्भदिये है. सब जानते है की गत एक सालसे जायरा का मन:स्वास्थ्य ठीक नही था. इतनीकम उम्र मे, पहले फिल्मों मे व्यस्तता और बाद में बिगडे मनस्वास्थ्य की शिकार रही जायराके द्वारा इस तरह का विस्तृत बयान देना बिलकुल नामुमकिन है. २-३ सालसे जिस तरहसे उसे आतंकी ट्रोल करते रहे, उसके घरवालों को डराया धमकाया गया वह देखकर ऐसा लगता है कि जो बयानउसने दिया है, वह उसपर थौंपा गया है. बेचारी जायरा बारबार धर्म और आस्था का डर दिखानेवाले बदमिजाजी दीनी बंदो के फन्दे मे फंस गयी.

इन बदमिजाजी दीनी बंदोने उसे आधी अधूरी जानकारी दी है.जिस कु. श. आयत (१) का बयान मे संदर्भ दिया है, और जिस में यह कहा गया है कि अल्लाह ईमानवालों की बुराइयों को दूर करेगा और उन्हे माफ करेगा,उस अल्लाह की कृपालुता सिर्फ दीनी बंदो के लिये होती है. औरतो और काफिरों के लिये अल्ला की कृपालुता कभीभी होनेवाली नही. बयान की दूसरी आयत (२) में परलोकके जीवन का संदर्भ दिया है. जायराको आयत ९.११३ कब और कैसे उतरी यह जरूर जानलेना चाहिये. उसकेअनुसार पैगंबर साहब की मां भी जन्नत नही जायेंगी.कु. श. (३) के अनुसार केवल दो महिलायें, फिरऔन की स्त्री आसीया और मरयमही जन्नत जाने की काबिलियत रखती है. इसको सहीह अल-बुखारी हदीस में दोहराया गया है.अल-बुखारी हदीस मे पैगंबर साहब की जीवन कथायें संग्रहित है. वह अत्यंत विश्वसनीय मानी जाती है. पैगंबर साहबने कई बार दोहराया था की उनके मुंहसे निकले हुये शब्द अल्लाह के होते थे. इसे गौर कर एक हदीस समझी जा सकती है. पैगंबर साहबने कहा था की उन्होने तीन कारणोंसे जहन्नम मे महिलायें बहुसंख्या (majority),मे देखी. एक, क्यूं की वे बारबार अपने पति को कोसते रहती है और उसके प्रति कृतघ्न रहती है.दूसरा कारण,निश्चित रूपसे(मर्दोसे) वे अक्लमंदी और धर्मपरायणता मे कमहोती है. गवाह देते समय दो महिलाओं की गवाह एक मर्द के बराबर होती है. अच्छे खासे समझदार आदमी को भी औरते धर्मपरायणतासे भटका देती है. तीसरा, महिलांये मासिक रजोकाल मे ना नमाज पढ  सकती और ना रोजा-उपवास रख सकती है. इस लिये अल-खुद्री हदीस  के अनुसार, काफिर और इस्लाम में श्रद्धा रखनेवाली भी औरतेमृत्यु के बाद के बाद नरक मे ही जानेवाली है ( (४). पैगंबर सहाब जहन्नम मे औरतों को जादा तादाद में क्यूं देख पाये? समझना आसान है. जहन्नम में काफिर मर्द और औरते कीतादाद समसमान होगी. उन में इमान रखनेवाली औरते दाखिल होती है तो जहन्नम में औरतों कीकुल तादादजादा होगी. जहन्नम में औरतों की जादा तादाद होनादूसरी दो जगह, ह. इम्रान बीन हुसैन (५), ह. उसामा (६) की हदीसों मे दोहराया है. लेकीन अल्लाह के सभी बंदे कैसे भी, सौ लोगों की कत्ल करनेवाले भीक्यूं न हो, केवल इमान जाहिर करने पर जन्नत में दाखिल होनेवाले है (७). इस्लाम में घोडा, औरत और मकान अपशकुन माने गये है (८).

जायरानिवेदन में अल्ला “अल-घफार”, बारबार  गलतीयों की माफी देनेवाला, लिखतीहै. वह माफी देना केवल मर्दो के लिये है. यह जानकारी बदमिजाजी दीनी बंदे कभी भी नही जाहिर करते. आज केमाहौल में तो सिर्फ वहाबी-सुन्नी कट्टरपंथी बंदे स्वर्ग के हकदार है. काफिरों की बात तो छोडीये, सभी औरते, शिया, अन-अल-हक–“अहं ब्रह्मास्मि” की अनुभूती लेनेवाले सूफी, अहमदीया और कितनेही, खुद को अल्लाह के बंदे और मुस्लिम माननेवाले सभी मरने के पश्चात नरक सिधारनेवाले है. यदी जायराने कु. श. और हदीस संकलनों का स्वयं अभ्यास किया होता तो वह बदमिजाजी दीनी बंदों की धोकाधडी तुरंत जान जाती.

जायरा केनिवेदन में कु. श. की आयत अल-बक्रा २.२२२ आधीअधुरी है. वह आयत औरतों के रजोकाल पूरा होने पर उनके साथ यौनसंबंध का जिक्र करती है. उसके तुरंत बाद आनेवाली आयत (९) के अनुसार मर्द के औरत लिये खेत बराबर होती है.उसे (बच्चे पैदा करने के लिये) जिस तरह से चाहो जोता जा सकता है. क्या जायरा और आधुनिक महिलांये इससे सहमत होगी? यदी जायरा खुद कुरआन शरीफ पढती तो क्या ऐसा आधाअधुरा भाषांतर देती और तुरंत दूसरी आयत अनदेखी करती? इसी लिये हम कहते है की जायरा वसीम का निवेदन उसपर थौंपा गया है. वह बेचारी कट्टरपंछीयों के सामने झुक गयी.

 

जायराके निवेदनसे संधित की कुरआनशरीफ की आयते और बुखारी शरीफ,

  • कु. श. ८.२९
  • कु. श.६.११३
  • कु.श.६६.११-१२
  • बुखारी हदिस मे अल-खुद्री हदीस पृ. १४४
  • तत्रैव पृ. ६४८
  • तत्रैव पृ. ९०१
  • तत्रैव पृ. ६८६
  • तत्रैव पृ. ५९४
  • कु. श.२.२२३

 

 

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: