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आपकी आदतें तय करती हैं आपकी कामयाबी का स्तर और कामयाबी की रफ्तार भी। इसलिए जरूरी है कि आप स्वयं को इस तरह से तैयार करें कि कामयाबी को आपकी आदत हो जाए। आपकी आदतें ही आपका ‘सक्सेस मंत्र’ हैं। कामयाबी कुछ नहीं, बस आपकी आदतों का प्रतिबिम्ब ही है समझिए।

थोड़ा विचित्र ख़याल है लेकिन व्यवहारिक होकर देखेंगे तो पाएंगे कि ये वाकई एक अनकहा सच है। ज़रा सोच कर देखिए – अगर आपको ‘आदत’ हो रोज़ सुबह अखबार पढ़ने की, तो निश्चित ही आपके सामान्य ज्ञान का स्तर अपने उस मित्र से बहुत ऊपर होगा जिसे अख़बार ना पढ़ने की ‘आदत’ है।

आपने किसी भी कृत्य या हरकत को यदि आप बार-बार दोहराते हैं तो वही आगे चलकर आपकी ‘आदत’ बन जाता है। और दोहराते-दोहराते यही ‘आदत’ किसी परिस्थिति या किसी व्यक्ति के प्रति आपका आटोमेटिक एक्शन बन जाता है। ये आदतें धीरे-धीरे आपके मष्तिस्क में एक मजबूत स्थान बना लेती हैं और देखने वाले इन्हें आपके लक्षण स्वरूप स्वीकार करते हैं।

जैसे कभी कोई दोस्तों की मंडली आपस में किसी एक मित्र का परिचय देते हुए कहती सुनाई पड़ती है -“अरे, जो कक्षा में बालों को खुजाता हुआ किताब पढ़ रहा हो, वही सुभाष होगा।” यहाँ बाल खुजाना अच्छी आदत है या बुरी ये शायद लिखने की ज़रूरत नहीं, लेकिन ये समझना जरूरी है कि बाल खुजाने की ‘आदत’ सुभाष का वो लक्षण बन गया जिसने उसकी पहचान को थोड़ा अशिष्ट बना दिया। कई बार जब कोई बहुत छोटी उम्र की बच्ची, किसी बड़े को रसोई साफ रखने की हिदायत देती है, तो लोग अक्सर कहते हैं कि माँ पर गई है, उसी की ‘आदत’ है हिदायत देना और अब यही आदत बच्ची भी सीख रही है।

ऐसे ही, अगर आपकी ‘आदत’ है किसी भी  ज़रुरत मंद की मदद करना, तो देखिये कैसे बिना किसी से कुछ कहे और बिना किसी के कुछ कहे, आप एक नेक इंसान की पदवी पा जाते हैं। कोई कुछ कहे या नहीं आपकी आदतें को सभी नोटिस करते हैं, गैर हों या अपने। तो फिर एक तरह से, आपकी आदतें, आपका नॉन-वर्बल कम्यूनिकेशन अर्थात बात करने का  ग़ैर मौखिक तरीका ही होती हैं। आपकी आदतें आपके व्यवहार में इस गहराई से मिश्रित होती हैं कि कभी-कभी ना चाहते हुए भी हम किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा कुछ कर देते हैं या कह देते हैं जो उस समय, उस जगह, पर नहीं कहना चाहते हैं या नहीं कहना होता है।

इसलिए बेहद ज़रूरी है कि आप अपनी आदतों पर विशेष ध्यान दें, यदि वे आदतें जन्मजात हैं, तो भी एक बार उन पर मनन ज़रूर करें। और कुछ अच्छी आदतों को सदा के लिए जीवन में उतारें – जैसे  हर रोज़ अपने जीवन की अच्छी बातों को और घटनाओं को नियम से स्मरण करें। अपनी कमियों के विषय में कम और शक्ति के विषय में अधिक सोचें। स्वयं को समय दें – अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य पर ध्यान दें। दूसरों के प्रति ठीक वैसा  ही व्यवहार रखें, जैसा आपको अच्छा लगता है, जब दूसरे आपके साथ करते हैं।

एक बात हमेशा याद रखें- कि आपकी आदतें आपके व्यक्तित्व का आईना हैं, यही आपके विषय में लोगों को धारणाएं बनाने में सहयोग करती हैं और सबसे अच्छी बात ये है कि आपकी आदतें केवल आप पर निर्भर हैं। अपनी बुरी आदतों को अपना जीवन नष्ट करने की अनुमति ना देने में ही समझदारी है, कामयाबी है। अगर आज तक आपने इस बारे में कभी भी गंभीरता से नहीं सोचा… तो ये सही समय है – अपनी बुरी आदतें छोड़ने का, अच्छी आदतों को निखारने का, और अपनी सफलता का मंत्र स्वयं उच्चारित करने का !

 

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