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पूरी दुनिया में भारतवर्ष ही एकमात्र ऐसा सनातन राष्ट्र है जिसने गुरु शिष्य की महान एवं अतुलनीय परंपरा को जन्म दिया. गुरुओं के तपोबल से ही पूर्व में भारत विश्वगुरु के पद पर विराजमान था. गुरुओं के आदेश से ही हमारे राष्ट्र के असंख्य संतों, महात्माओं, योद्धाओं, स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत भूमि और संस्कृति, धर्म, राष्ट्र जीवन के मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया था. दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतवर्ष को पुनः परम वैभवशाली बनाने और विश्वगुरु के पद पर आसीन करने का संकल्प लिया है. परम पवित्र भगवा ध्वज को ही संघ ने गुरु माना है. इसी ध्वज की छत्रछाया में और प्रेरणा से भारतीयों ने निरंतर १२०० वर्षो तक विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष किया है इसलिए संघ के स्वयंसेवक भगवा ध्वज को ही गुरु मानकर बलिदान, त्याग, तपस्या, और सेवा की प्रेरणा लेते है. गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आज करोड़ो भारतवासी फिर से भारत को विश्वगुरु के पद पर विराजमान करने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर एक निश्चित दिशा में काम करने के लिए सजग हों, तो यह उप्लब्धि पाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. क्या भारत फिर से विश्वगुरु के पद पर आसीन हो पायेगा ? अपनी बेबाक राय दे 

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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