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शरीर को सही, सादे और प्राकृतिक खानपान की आवश्यकता है, ताकि सारे पोषक तत्व शरीर में जाएं। इसके साथ नियमित व्यायाम भी आवश्यक है। ध्यान रहें, अनावश्यक सप्लिमेंट्स लेना घातक हो सकता है।

आजकल की भागदौड़ वाली दुनिया में स्वस्थ रहना बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण है। छोटे बच्चे से लेकर बड़े आदमी तक सभी बहुत व्यस्त दिन बिताते हैं। सुबह उठते ही ऑफिस, पढ़ाई, दिन भर का काम यही सब दिमाग में घूमने लगता है। ऐसे में सही खानपान अर्थात योग्य डाएट रखना बहुत ही आवश्यक हो गया है। क्या खाना चाहिए क्या नहीं, खाने का समय क्या होना चाहिए, कितनी मात्रा में खाना चाहिए इस विषय में ध्यान देने के लिए आज किसी के पास समय नहीं है, लेकिन यह अत्यंत आवश्यक है।

रोज की इसी व्यस्त दिनचर्या और बदलते मौसम, प्रदूषण वाले वातावरण के चलते खुद की तरफ ध्यान देना कुछ ज्यादा आवश्यक हो गया है। और इसमें हमारा खानपान और व्यायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारे भोजन को पोषक तत्वों के आधार पर 5 भागों में बांटा गया है। सबसे ज्यादा सेवन किया जाने वाला – अनाज, जो हमें ऊर्जा प्रदान करता है। फिर फलों और सब्जियों का स्थान आता है, जिनसे हमें पोषक तत्व और खनिज पदार्थ मिलते हैं, जो हमारे शरीर को सुचारू रूप से कार्यरत रखनें में अत्यावश्यक होते हैं। उसके बाद स्थान आता है, दूध, मांस, दालें, चीज आदि जो हमें प्रोटीन के माध्यम से शरीर की वृद्धि में मदद, टूटफूट की मरम्मत और समय पड़ने पर ऊर्जा देने का काम करते हैं, और शरीर को सबसे कम आवश्यकता होती है तेल, घी और शक्कर जैसे पदार्थों की।

लेकिन आजकल की जीवनशैली में ये पदार्थ सही क्रम और सही मात्रा में हमारे शरीर में नहीं जाते। ‘रेडी टू ईट’ खाद्य पदार्थों का चलन बढ़ गया है, जो पकाने में आसान हैं, और पाश्चिमात्य देशों से आए हैं। जैसे ब्रेड, बिस्किट, पीज्जा, बर्गर आदि का ट्रेंड सा सेट हो गया है। बाजार में जूस आदि की दुकानें भी बढ़ गई हैं, जिनमें खराब किस्म की शक्कर आदि का प्रयोग किया जाता है। ऐसे अस्वस्थ खानपान से बचने के लिए, सभी को अपने रोज के डाएट में अर्थात खानपान में ताजा फल सब्जियों, दूध/अंडा/ पनीर आदि का समावेश करना अत्यावश्यक हो गया है। भरपूर मात्रा में पानी पीना भी बहुत ही जरूरी है। घरों में समय समय पर तेल बदल-बदल कर प्रयोग करने से हमें आवश्यक ‘फैट्स’ भी मिलते हैं। यह धारणा होती है की फैट्स या वसा शरीर के लिए बुरा है, लेकिन ऐसा नहीं है, सही मात्रा में और सही फैट्स शरीर के लिए आवश्यक होते हैं, और वे हमें इस प्रकार प्राप्त हो सकते हैं।

इतने अव्यवस्थित खानपान के चलते भी युवाओं में फिट रहने का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है, और इस कारण युवाओं में जिम की क्रेज़ बहुत ज्यादा है। अनियमित और अव्यवस्थित खानपान की आदतों के चलते युवा ‘जिम’ द्वारा दी गई सप्लिमेंट्स का प्रयोग करते हैं, जो शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। अनेक जिमों में ट्रेनर्स सप्लिमेंट्स लेने और फॉलिक अ‍ॅसिड के इंजेक्शन्स लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं। और युवा, बिना इसके दुष्परिणामों को जाने इसका सेवन करना प्रारंभ कर देते हैं। यदि सप्लिमेंट्स लिए भी जाए तो बहुत कम मात्रा और कम समय के लिए लेना चाहिए ऐसा कहा जाता है, लेकिन यदि इसे अधिक मात्रा और अधिक समय तक लिया जाए तो इसके परिणाम काफी हानिकारक हैं।

राजधानी दिल्ली में स्थित एक युवा व्यक्ति को अचानक तबियत खराब के चलते अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी हालत देखकर उसे तुरंत आयसीयू में भर्ती किया गया। अतिरिक्त जांच से पता चला कि उसका बीपी 210/180 है, और उसका कारण उसके शरीर में क्रिएटिनिन तत्व का सामान्य से चार गुना अधिक होना है। उससे पूछने पर पता चला कि, वह पिछले चार सालों से जिम में ट्रेनर द्वारा दिया गया प्रोटीन सप्लिमेंट ले रहा है। उसे वे इतने समय तक नहीं लेने चाहिए थे, आज वह डायलेसिस की स्थिति में है।

इसलिए शरीर को एक स्वस्थ और सादे खानपान की आवश्यकता है। ऐसा खानपान जिससे प्राकृतिक रूप से सारे पोषक तत्व शरीर में जाएं और शरीर को स्वस्थ रखें। साथ ही डाएट के साथ नियमित व्यायाम भी आवश्यक है। जो हमारी सारी मांसपेशियों का भोजन है। घर का सादा खाना, ताजे फल सब्जियां, और ये सभी योग्य मात्रा में शरीर में जाना आवश्यक है तभी शरीर स्वस्थ रह सकता है। यदि शरीर के लिए कोई सप्लिमेंट आवश्यक है, तो भी पहले डॉक्टर की सलाह लें, यदि वे कहें तो ही सेवन करें और उनके मार्गदर्शन में ही सेवन करें। ताकि बाद में पछताना ना पड़े। अपना ध्यान रखें, सही खाएं, स्वस्थ रहें।

 

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