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कुछ महीने पहले खबर आयी कि गुजरात के कोटा शहर में एक महीने के भीतर कुछ 19 बच्चों ने आत्महत्या कर ली. यह खबर बेहद चौंकानेवाली थी. इसके अलावा पिछले कुछ समय से लगभग हर हफ्ते बच्चों या किशोरों द्वारा आत्महत्या किये जाने के मामले सामने आ रहे हैं. पैरेंट्स समझ नहीं पा रहे कि जिन मासूमों को अभी जिंदगी की वास्तविक स्थिति से कोई सरोकार भी नहीं, उन्हें ऐसी क्या परेशानी हो गयी कि वे अपना जीवन समाप्त करने पर तुले हैं. माता-पिता यह सोच-सोच कर परेशान हैं कि वे अपने बच्चों की मनोवृति में किस तरह से सकारात्मक बदलाव लायें, जिससे कि उन्हें भटकने से बचाया जा सकें.
इसके लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है आखिर डिप्रेशन है क्या और बच्चों में इसके उभरने के क्या लक्षण है, ताकि उनके बदलते व्यवहारों को आसानी से पहचाना जा सकें. उसके बाद ही यह तय किया जा सकता है उन्हें किस तरीके से सही दिशा में मोल्ड किया जा सके.

एक साइकॉटिक डिज्ऑर्डर है डिप्रेशन
डिप्रेशन एक सायकोटिक डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चों में अवसाद या उदासी की अवधि करीब दो सप्ताह या उससे भी लंबे समय तक बनी रहती है. बच्चा किसी काम में दिलचस्पी नहीं लेता. उसके मन-मस्तिष्क पर नकारात्मक भावनाएं हावी रहती हैं. उसकी ऊर्जा का स्तर दिन-ब-दिन घटता चला जाता है. फलस्वरूप उसकी रोजमर्रा की जिंदगी बिल्कुल अस्त-व्यस्त हो जाती है. वह किसी काम में अपना ध्यान नहीं लगा पाता. न ही किसी से मिलना-जुलना, बात करना या कहीं आना-जाना पसंद करता है.

बच्चों के व्यक्तित्व को कई तरीके से करता है प्रभावित
दिल्ली यूनिवर्सिटी की मनोचिकित्सक डॉं अरुणा बूट्रा के अनुसार- ‘डिप्रेशन बच्चों के व्यक्तित्व को कई तरीके से प्रभावित करता है. बच्चों के जीवन पर इसका बहुआयामी असर पड़ता है. डिप्रेशन से ग्रसित बच्चे अक्सर खुद को नुकसान पहुंचाते हैं. हालांकि कई मामलों में वे दूसरों को भी नुकसान पहुंचाते देखे गये हैं. ऐसा करते समय वे गुस्से और हिंसा का सहारा लेते हैं. दूसरों से बदतमीजी करते हैं, दोस्तों या परिवारवालों के साथ लड़ते-झगड़ते हैं. तोड़-फोड़ करते हैं, दूसरों पर चिल्लाते हैं या फिर खुद को अकेले कमरे में बंद कर लेते हैं.
कुछ बच्चे अपने गुस्से या कुढ़न को दूसरों पर जाहिर नहीं कर पाते. ऐसे में वह खुद को नुकसान पहुंचाते हैं. जैसे खाना न खाना, खुद को कहीं अकेले बंद कर लेना, रोना, पूरी नींद न लेना या अन्य किसी तरह से खुद को चोट पहुंचाना. ऐसी स्थिति में अगर उन पर ध्यान न दिया जाये, तो वे डिप्रेशन की गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं. कुछ बच्चे आत्महत्या जैसा भयावह कदम भी उठा लेते हैं.

डिप्रेशन के कारण

जेनेटिक कारण : 

कई बार डिप्रेशन का कारण जेनेटिक होता है. जैसे अगर बच्चे के माता-पिता में से यदि कोई एक डिप्रेशन का शिकार हो, तो बच्चों में डिप्रेशन आना स्वाभाविक है.

व्यक्तिगत कारण :

 किसी वजह से अपराधबोध से ग्रस्त होना, जिंदगी को बोझ मानना और मनपसंद काम को न कर पाने की लाचारी.

सामाजिक कारण : 

बच्चे के आसपास का वातावरण भी उसे अवसाद ग्रसित कर सकता है, जैसे पारिवारिक कलह या अनबन की स्थिति में वह खुद को सबसे दूर रखना चाहता है, लेकिन जब ऐसा नहीं कर पाता तो डिप्रेशन में चला जाता है.

अन्य कारण :

 कई बार बच्चों को उनके द्वारा किये जानेवाले कार्यों के लिए प्रशंसा या सराहना नहीं मिलती है, तो भी वे तनाव का शिकार हो जाते हैं. कुछ बच्चे माता-पिता की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने से उत्पन्न दबाव की वजह से डिप्रेस्ड हो जाते हैं. इसके अलावा अभिभावकों द्वारा बच्चों की आपस में या बाहर किसी से तुलना करने पर वे अवसादग्रस्त हो जाते हैं.

सोशल साइट्स की भूमिका
पिछले कुछ सालों में ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जहां सोशल साइट्स पर लगातार सक्रिय रहने के कारण भी बच्चों में अवसाद के लक्षण देखने को मिले हैं. इसे ‘फेसबुक डिप्रेशन’ नाम दिया गया है. इन साइट्स पर अधिक-से-अधिक लाइक्स पाने, अपने किसी पोस्ट को शेयर किये जाने और एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ बच्चों में तनाव के साथ कई सामाजिक समस्याएं भी पैदा हो रही है. मनोचिकित्सकों की राय में बच्चों को इन साइट्स से जितना हो सके, दूर रखने का प्रयास किया जाना चाहिए.

कैसे पहचाने डिप्रेशन के लक्षणों को

* खाने-पीने से, पढ़ाई से और खेलों से मन का उचाट होना.
* बेवजह खुश या दुखी हो जाना या फिर घंटों रोना.
* हमेशा मूड खराब रहना. 
* भीड़ में होने पर भी अकेलापन फील करना. 
* हमेशा खुद में खोये रहना या गुमसुम रहना।
* पारिवारिक सदस्यों या दोस्तों के साथ आवेशपूर्ण व्यवहार करना.
* हर वक्त बैचेन रहना. 
* बात-बात पर चिड़चिड़ा जाना.
* बहुत जल्दी घबरा जाना.
* स्कूल से बच्चे की बहुत अधिक शिकायतें आना.
* मन में आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आना.

इन लक्षणों को पहचानने के बाद ही डिप्रेशन के निदान की दिशा में सही और ठोस प्रयास किये जा सकते हैं. अत: ध्यान दें कहीं आपके बच्चे में भी डिप्रेशन के लक्षण तो नहीं…

 

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