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* पिछले अंक से आगे…

इनमें से से कुछ फिल्मों ने भविष्य में भारतीय सिनेमा के पर्दे पर दर्शाए जाने वाली  प्रेम कहानियों में प्रेम को एक नई अवधारणा से परिचित करवाया।

कुछ फिल्में जैसे कि ‘मेरे महबूब’ और ‘प्यासा’ में प्रेम की गहराई और अभिव्यक्ति को बड़े ही ख़ूबसूरत अंदाज़ में दर्शाया गया। और इसके महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्नीस सौ पचास और साठ के इस दौर में प्रेम की अभिव्यक्ति को एक विशेष कला के रूप में प्रस्तुत किया गया।

फिर 1965 में आई ‘गाईड’ फ़िल्म ने प्रेम की अभिव्यक्ति और प्रेम की संभावनाओं के मायने ही बदल दिए। आर.के.नारायण के प्रसिद्ध उपन्यास ‘गाईड’ पर आधारित इस फ़िल्म में कुछ ऐसा दर्शाया गया जो उस दौर में बड़ा अचम्भित करने वाला था- फ़िल्म की नायिका एक विवाहिता स्त्री होती है जो अपनी असफल शादी को तोड़कर अपने प्रेमी के साथ एक नया संसार बसाने की हिम्मत करती नज़र आती है।

उन्नीस सौ सत्तर और अस्सी में देश में बढ़ रहे सामाजिक, आर्थिक बदलावों के चलते प्रेम कहानियों ने पृष्ठ में रहकर ही सिनेमा में अपना स्थान बनाये रखा। ये वो दौर था जब ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि पर ही दर्शक मोहित हो गए। बेरोजगारी और ग़रीबी, स्मगलर्स का बढ़ता कहर, गैंग वार्स के बीच जी रहे नायकों का दौर भी इसे कहा जा सकता है, जहां एक प्रबल से प्रबल प्रेम कहानी भी केवल मजबूर होकर रह जाती है।

हालांकि, प्रेम अवधारणा को लेकर ये एक मिला जुला दौर रहा क्योंकि 1973 में आई फ़िल्म ‘बॉबी’ ने बॉक्स ऑफिस पर एक तहलका सा मचा दिया। युवा प्रेम पर आधारित ये एक ऐसी फ़िल्म थी जिसमें सबसे कम उम्र के नायक और नायिका अब देश भर में प्रेम की मिसाल बन गए थे। और करीब दो दशकों तक इस फ़िल्म ने बॉलीवुड की हर प्रेम कहानी पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इसी फ़िल्म के नक्शेकदम पर चलतीं, ‘एक दूजे के लिए’, ‘लव स्टोरी’ और अस्सी के दशक में आईं कुछ और फिल्में जैसे कि ‘कयामत से कयामत तक’ और ‘मैंने प्यार किया’ ने फिर प्रेम कहानियों को मेन-प्लाट में लाकर रख दिया। प्रेम की अवधारणा को पुनः बदलते हुए इन फ़िल्मों ने नफ़रत पर प्रेम की विजय, पुरानी रंजिशों और ख़ानदानी दुश्मनी पर नई शुरुआत की विजय, अमीरी ग़रीबी के फासले मिटाती, मानवीय संवेदनाओं की विजय जैसे सशक्त भावों को प्रस्तुत किया। इन फिल्मों को युवा पीढ़ी द्वारा ख़ूब सराहना मिली। बल्कि इनका जादू इस कदर जनता पर चढ़ा कि इन फिल्मों के कलाकारों को रातों रात सुपरस्टार्स का दर्जा भी प्राप्त हुआ। सभी फिल्में अच्छी चलीं, ख़ासतौर पर, ‘मैंने प्यार किया’ तो एक मील का पत्थर साबित हुई और नब्बे के दशक में आईं प्रेम कहानियों – ‘हम आपके हैं कौन’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ जैसी फिल्मों के लिए प्रेरणा बनी। इन फिल्मों ने फिर एक बार प्रेम कहानियों का रुख मोड़ा ।

* किस ओर, ये जानने के लिए इस आर्टिकल का अगला अंक ज़रूर पढ़ें।

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