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अरबों रुपयों के घोटाले, भ्रष्टाचार, अनियमितता, षड्यंत्र आदि मामलों में चिदम्बरम को गिरफ्तार करने के बाद ईडी व अन्य जांच एजेंसियों की रडार पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे और राकांपा नेता अजित पवार आ गए है. ईडी ने राज ठाकरे से लगभग साढ़े आठ घंटे पूछताछ की. बताया जाता है कि सुबह ११ बजे से सवालों की जो झड़ी लगी वह रात तक लगातार जारी रही. कोहिनूर सिटीएनएल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी में आईएल एंड एफएस की ओर से ४५० करोड़ रु. का इक्विटी निवेश और कर्ज से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के सम्बंध में अधिकारीयों ने राज ठाकरे से कड़ी पूछताछ की. इसके अलावा महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में २५ हजार करोड़ के घोटाले में अजित पवार सहित अन्य ५० लोगों के विरुद्ध पांच दिनों के अन्दर एफआईआर दर्ज करने का आदेश बाम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को दिया है. नियमों का उल्लंघन कर बांटे गए कर्ज की वसूली नहीं होने से बैंक भारी घाटे में डूब गया. जनहित याचिका दायर कर सुरिंदर अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि अरबों रूपये के घोटालों में पुलिस नरमी बरत रहीं है. याचिकाकर्ता के अनुसार इस मामले की जांच के लिए पुलिस सक्षम नहीं है तो क्या २५ हजार करोड़ के बैंक घोटाले की जांच ईडी को करनी चाहिए ? बता दें कि बैंक संचालको में अजित पवार के अलावा आनदंराव अडसूल, शिवाजीराव नलावडे, जयंत पाटिल, मोहित पाटिल, मधुकर चव्हाण, हसन मुश्रिफ, आदि बड़े नाम शामिल है. खास बात यह है कि बैंक संचालकों में कांग्रेस–राकांपा के अलावा अन्य पार्टियों के बड़े नेता भी शामिल है. क्या महाराष्ट्र के दबंग नेताओं में सुमार राज ठाकरे और अजित पवार सहित अन्य के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी ? अपनी बेबाक राय दें 

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